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अपराध गुडगाँव चंडीगढ़ पंचकूला हरियाणा

अपराध नियंत्रण को लेकर डीजीपी अजय सिंघल की मैराथन बैठक आयोजित, प्रदेशभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने लिया भाग।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़: हरियाणा को अपराध मुक्त एवं सुरक्षित प्रदेश बनाने के उद्देश्य से पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने आज प्रदेशभर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशकों , पुलिस महानिरीक्षकों, पुलिस आयुक्तों एवं पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च स्तरीय बैठक की। लगभग 3 घंटे चली इस बैठक में प्रदेश में अपराध की स्थिति की थाना-वार तथा अपराध के विभिन्न हेड के अनुसार विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में डीजीपी अजय सिंघल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि अपराध नियंत्रण में किसी भी स्तर पर लापरवाही,जिम्मेदारी से बचने अथवा खराब प्रदर्शन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि थाना प्रभारियों (SHO) एवं सुपरवाइजरी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना होगा। जो अधिकारी अपनी जिम्मेदारी के अनुरूप अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करेगा, उसके विरुद्ध सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अपराध की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण में विफल रहने वाले थाना प्रभारियों को निलंबित करने के निर्देश देते हुए डीजीपी ने स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी के अनुरूप कार्य न करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। यह कार्रवाई अपराध नियंत्रण में लापरवाही के प्रति विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति का स्पष्ट संदेश है।
अजय सिंघल ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में थाना-वार अपराध की माइक्रो लेवल मॉनिटरिंग एवं गहन विश्लेषण सुनिश्चित किया जाए। यह देखा जाए कि किस थाने में किस प्रकार के अपराध में वृद्धि हुई है, उसके वास्तविक कारण क्या हैं तथा अपराध की रोकथाम के लिए अब तक क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि केवल अपराध के आंकड़े एकत्र करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका विश्लेषण कर कारण आधारित कार्रवाई एवं प्रभावी अपराध नियंत्रण की स्ट्रैटेजी तैयार की जानी चाहिए। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि जिस थाना क्षेत्र में अपराध बढ़ेगा, वहां संबंधित SHO के साथ-साथ सुपरवाइजरी अधिकारी की भी जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में प्रत्येक SHO के साथ नियमित बैठक कर थाना-वार अपराध की समीक्षा करें और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ठोस एवं प्रभावी रणनीति तैयार कर अपराध पर नियंत्रण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पुलिस अधीक्षक, पुलिस आयुक्त एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को अपने अधीन आने वाले प्रत्येक थाने की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा करनी होगी। सीसीटीएनएस में उपलब्ध डेटा का वैज्ञानिक एवं तथ्यात्मक विश्लेषण करते हुए यह पता लगाया जाए कि किस थाने में कौन-सा अपराध बढ़ रहा है और उसके पीछे क्या कारण हैं। इसके आधार पर समय रहते प्रिवेंटिव एक्शन लिया जाए, ताकि अपराध की घटना होने से पहले ही उसे रोकने की प्रभावी व्यवस्था की जा सके।डीजीपी अजय सिंहल ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष प्रदेश में BNS के तहत कुल अपराध में 9.11प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने इसे पुलिस विभाग के निरंतर प्रयासों का सकारात्मक परिणाम बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि उत्साहजनक है, लेकिन किसी विशेष प्रकार के अपराध में वृद्धि होने की स्थिति में उसके कारणों की तत्काल पहचान कर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण के लिए अब माइक्रो लेवल प्लानिंग पर विशेष जोर दिया जाएगा। प्रत्येक थाने के अपराध पैटर्न का गहन विश्लेषण कर यह समझना होगा कि अपराध बढ़ने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं। पुलिसिंग का फोकस केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित न रहकर अपराध की जड़ और उसके मूल कारणों तक पहुंचकर उनका समाधान करने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कारण आधारित कार्रवाई और प्रभावी माइक्रो प्लानिंग ही दीर्घकालिक एवं परिणामदायी अपराध नियंत्रण की कुंजी है।डीजीपी अजय सिंघल ने बैठक में गत 15 जून को प्रदेशभर के पुलिस अधिकारियों को जारी निर्देशों की भी समीक्षा की, जिसमें थाना स्तर पर माइक्रो प्लानिंग एवं अपराध की प्रभावी मॉनिटरिंग पर जोर दिया गया था। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक थाने की कार्यप्रणाली का विस्तृत अध्ययन करते हुए उपलब्ध अपराध डेटा का विश्लेषण किया जाए और थाना प्रभारियों के साथ नियमित समीक्षा के माध्यम से अपराध की रोकथाम के लिए प्रभावी एवं ठोस कदम उठाए जाएं। सिंघल ने कहा कि हर छोटे से छोटे अपराध की भी बारीकी से निगरानी आवश्यक है, क्योंकि समय रहते छोटे अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई कर भविष्य में गंभीर एवं संगठित अपराधों को बढ़ने से रोका जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर अपराध के ट्रेंड और पैटर्न की पहचान कर प्रिवेंटिव पुलिसिंग को और मजबूत करने तथा अपराध की घटनाओं को जड़ स्तर पर रोकने के निर्देश दिए।डीजीपी ने अधिकारियों को अपराध नियंत्रण के लिए बेस्ट प्रैक्टिसेस अपनाने, सफल पुलिसिंग मॉडल को अन्य जिलों में लागू करने तथा पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उचित रूप से प्रोत्साहित एवं सम्मानित किया जाना चाहिए, ताकि पूरे पुलिस बल में उत्कृष्ट कार्य करने की सकारात्मक प्रतिस्पर्धा विकसित हो।डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगली समीक्षा बैठक में उनसे थाना-वार अपराध विश्लेषण, अपराध में वृद्धि के कारण तथा उसके आधार पर की गई कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी ली जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को अभी से आवश्यक तैयारियां पूरी करने तथा अपने-अपने क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के लिए स्पष्ट कार्ययोजना लागू करने को कहा।बैठक में डीजीपी अजय सिंघल ने साइबर अपराध से संबंधित लंबित मामलों एवं शिकायतों की समीक्षा करते हुए इनके शीघ्र निपटारे के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिकायत की गंभीरता से समयबद्ध जांच एवं नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा लंबित मामलों की नियमित मॉनिटरिंग कर जांच में तेजी लाई जाए। उन्होंने साइबर फ्रॉड मामलों में ठगी गई राशि को फ्रीज एवं रिकवर कराने, पीड़ितों को राशि वापस दिलाने, शिकायतों को FIR में कन्वर्ट करने तथा साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी सहित विभिन्न बिंदुओं पर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि साइबर अपराध के मामलों में पुलिस की कार्रवाई में स्पष्टता और ठोस परिणाम दिखाई देना चाहिए तथा पीड़ितों को समय पर राहत दिलाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।बैठक में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, सीआईडी सौरभ सिंह ने धमकी भरी कॉल, फायरिंग की घटनाओं तथा अन्य गंभीर आपराधिक घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी एवं समन्वित रणनीति तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने ऐसे मामलों में समयबद्ध कार्रवाई, आपसी समन्वय तथा संवेदनशील क्षेत्रों की निरंतर निगरानी को आवश्यक बताया। उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अफवाहों एवं भ्रामक सूचनाओं की पहचान और निगरानी पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही। डीजीपी श्री अजय सिंघल ने निर्देश दिए कि सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह या भ्रामक सूचना फैलाकर कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने के किसी भी प्रयास पर तत्काल संज्ञान लेकर प्रभावी कार्रवाई की जाए तथा ऐसी गतिविधियों की समय रहते पहचान कर उन्हें फैलने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।डीजीपी अजय सिंघल ने अंत में अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि हर अधिकारी को अपने क्षेत्र में अपराध की स्थिति पर व्यक्तिगत निगरानी रखनी होगी। अपराध नियंत्रण में जवाबदेही और परिणाम आधारित पुलिसिंग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि विभाग में केवल काम करने की नहीं, बल्कि नतीजा देने की संस्कृति विकसित की जाएगी और जो अधिकारी अपेक्षित परिणाम नहीं देगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित होगी।

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