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श्रीराम मंदिर में चोरी की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी से कराई जाए- कांग्रेस


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली:कांग्रेस ने अयोध्या के भगवान श्रीराम मंदिर में बड़े पैमाने पर हुई चोरी की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी से कराने की मांग दोहराई है। पार्टी नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि मंदिर में केवल चढ़ावे की चोरी ही नहीं हुई, बल्कि शिला पूजन के समय से ही गड़बड़ियां शुरू हो गई थीं और जमीन खरीद में भी बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ था।कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान राज्यसभा में पार्टी के उपनेता प्रमोद तिवारी ने अयोध्या में हुए जमीन सौदों में भ्रष्टाचार का ब्योरा देते हुए कहा कि दो करोड़ रुपये मूल्य की एक जमीन खरीदकर महज 10 मिनट के भीतर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 18 करोड़ रुपये में बेच दी गई। इसी प्रकार एक अन्य मामले में 20 लाख रुपये की जमीन कुछ ही समय में ढाई करोड़ रुपये में बेच दी गई। उन्होंने कहा कि अयोध्या के 10 सबसे बड़े भूमि सौदों में से सात सौदे राम मंदिर से जुड़े थे, जिनमें सर्किल रेट से 17 गुना अधिक कीमत चुकाई गई।
 वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए श्रीराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर 112 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने कहा कि पांच से दस गुना ज्यादा दाम पर फूल खरीदे गए और कुर्सियों पर इतना खर्च किया गया कि उतनी राशि में नई कुर्सियां खरीदी जा सकती थीं। चढ़ावे की चोरी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम भक्तों द्वारा मंदिर में चढ़ाए गए सोना, चांदी और कीमती जेवरातों पर डकैती डाली गई। सोना-चांदी पिघला कर बेचा गया तथा धन को शेयर बाजार और सट्टा बाजार में लगाया गया। उन्होंने कहा कि जांच में केवल 40 दिनों के भीतर चढ़ावे की चोरी की 70 घटनाएं सामने आईं, जबकि यह चोरी बहुत बड़ी है।तिवारी ने आगे कहा कि लोकसभा चुनाव के चलते नरेंद्र मोदी के लिए चुनाव मंदिर से ज्यादा महत्त्वपूर्ण था, इसलिए उन्होंने अधूरे श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कर अशुभ काम किया। उन्होंने यह भी कहा कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शंकराचार्यों को भी नहीं बुलाया गया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में साधु-संतों को बाहर रखकर भाजपा-आरएसएस के लोगों को शामिल किए जाने पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस घोटाले के लिए ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा सीधे जिम्मेदार हैं, लेकिन प्रधानमंत्री और भाजपा के संरक्षण के कारण उनपर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच के लिए एक फर्जी एसआईटी का गठन कर उसकी जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को सौंप दी गई है, जो खुद आपराधिक जांच के दायरे में है। उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई धांधली नहीं हुई थी, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा को ट्रस्ट के पदों से इस्तीफा क्यों देना पड़ा।उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। इसलिए इस पूरे घोटाले की जवाबदेही सीधे प्रधानमंत्री की बनती है।तिवारी ने भाजपा के इस आरोप का भी तथ्यों के साथ खंडन किया कि कांग्रेस ने भगवान राम के अस्तित्व को काल्पनिक बताया था। उन्होंने याद दिलाया कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान लोगों की भावनाओं के खिलाफ रामसेतु से जुड़ा आदेश जारी हुआ था। जबकि 9 नवंबर, 1989 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि का शिलान्यास हुआ था। उन्होंने पूछा कि यदि कांग्रेस भगवान श्रीराम के अस्तित्व को नहीं मानती तो फिर शिलान्यास उसके कार्यकाल में कैसे हुआ? उन्होंने कहा कि कांग्रेस भगवान श्रीराम के अस्तित्व को हमेशा से मानती रही है और सदैव मानती रहेगी। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा कभी नहीं चाहती थी कि राम मंदिर का निर्माण हो, बल्कि वह इस मुद्दे को जीवित रखकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहती थी। उन्होंने कहा कि मंदिर का निर्माण भाजपा के किसी प्रयास का परिणाम नहीं है, बल्कि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हुआ।

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