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उदय भानु चिब ने आज 20 जुलाई को युवा कांग्रेस के कार्यालय के बाहर पत्थरों से भरे ट्रक के संबंध में पत्रकार वार्ता को संबोधित किया।


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली: भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने आज 20 जुलाई को युवा कांग्रेस के कार्यालय के बाहर पत्थरों से भरे ट्रक के संबंध में पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। इस अवसर पर भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि 20 तारीख को जब पार्लियामेंट घेराव हो रहा था, तो एक ट्रक, पूरा डंपर, उसमें पत्थर भरे हुए थे। वह आईवाईसी ऑफिस, एनएसयूआई ऑफिस—जो देश की अपोजिशन पार्टी है,यहां उनके यूथ का और स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन का ऑफिस है—उसके बाहर यह ट्रक मिला। यह ट्रक स्टार्टिंग में जंतर-मंतर के आसपास वाले एरिया में था, उसके बाद दोपहर को यह ट्रक जो है आईवाईसी ऑफिस के बाहर मिला। ऐसा क्यों? और यह ट्रक उस दिन यहां पर कैसे था? पुलिस को पता नहीं था? यहां हर जगह बैरिकेड थे, पूरा हाई अलर्ट था। यह ट्रक यहां कैसे पहुंचा? किसके कहने पर पहुंचा? किसकी कॉन्सपिरेसी पर पहुंचा? सवाल है- संसद मार्च के दिन वो ट्रक वहां कैसे खड़ा किया गया और ये काम किसके कहने पर किया गया? हमारा सवाल है कि पत्थर से भरे हुए ट्रक को IYC के दफ्तर के सामने किस मंशा के साथ खड़ा किया गया था, क्योंकि ये एक बड़ी सुरक्षा चूक भी है। क्या सरकार यह चाहती थी कि प्रदर्शन के दौरान उस पत्थर को इस्तेमाल किया जाए और फिर सरकार एक बड़ा Crackdown करे? यह बहुत बड़ा सिक्योरिटी लैप्स है कि एक ट्रक पत्थरों से भरा हुआ यूथ कांग्रेस ऑफिस के बाहर 20 तारीख को मिला और 25 तारीख तक वहीं था! कैसे हो सकता है ये? हैरानी की बात ये है कि हाईकोर्ट में गवर्नमेंट काउंसिल ने कहा कि ये ट्रक प्रदर्शनकारियों से जुड़ा हुआ है। उसके बाद 28 जुलाई को दिल्ली पुलिस का ट्वीट आया कि वो ट्रक एक हादसे के बाद सीज किया गया था। ये अपने आप में ही एक बड़ा contradiction है। एक तरफ नरेंद्र मोदी वीडियो बना रहे हैं और दूसरी तरफ अमित शाह छात्रों को लाठियों से पिटवा रहे हैं, आंसू गैस के गोले फिंकवा रहे हैं। सरकार का ये खेल एक्सपोज हो चुका है।
भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने यह मांग करते हुए कहा कि हमे पूरा भरोसा है कि दिल्ली पुलिस को यह मालूम था। किसके कहने पर यह हुआ है, यह हम सब जानते हैं। एक भी चीज जो है, पत्ता हिलता नहीं अमित शाह के कहने के बगैर—जो दिल्ली पुलिस को चलाते हैं, जो होम मिनिस्टर हैं इस देश के। उन्होंने यह मांग कि इस पूरे मामले में स्वतंत्र और न्यायिक जांच हो, ट्रक की मूवमेंट वाले CCTV फुटेज preserve किए जाएं, इस मामले में जवाबदेही तय हो और ये सब किसके इशारे पर हुआ- वो बताया जाए। अंत में उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ केस हो रहे हैं, उनपर दबाव डाला जा रहा है, लेकिन हम सभी छात्रों के साथ मजबूती से खड़े हैं।भारतीय युवा कांग्रेस के साथी शांतनु सिंह ने कहा कि मैंने 20 जुलाई को 3:45 बजे पत्थरों से भरा ट्रक IYC दफ्तर के सामने खड़ा देखा था, तब वहां करीब 500 छात्र प्रदर्शन में मौजूद थे। उसी दिन जब 12 बजे के करीब संसद मार्च शुरू हुआ तो पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें छात्र और युवा तितर-बितर हो गए। लाठीचार्ज के बाद भी छात्र बिलकुल शांत थे, लेकिन मैंने देखा कि उस प्रदर्शन में कई ऐसे लोग थे, जिन्हें पुलिस ने नहीं रोका और वे ट्रक में चढ़े हुए थे। जबकि इस ट्रक का एक वीडियो सुबह ही वायरल हो चुका था और दिल्ली पुलिस ने यह कहा कि उन्होंने इस ट्रक को भलस्वा में खाली कर दिया था। इस घटना के बाद, सरकार ने कोर्ट में उस ट्रक को छात्रों से जोड़ा। ये दिखाता है कि दिल्ली पुलिस किसके इशारे पर इन आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रही थी। सीधा सवाल है- अगर दिल्ली पुलिस ने पत्थरों भरा ट्रक विपक्ष के यूथ ऑर्गेनाइजेशन के दफ्तर के बाहर खड़ा किया, तो वे क्या चाहते थे?  इसमें दो ही बातें हो सकती हैं पहली प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी-हिंसा होती और और ये प्रोटेस्ट खत्म हो जाता और दूसरी दिल्ली पुलिस और RAF के लोग ये पत्थर छात्रों पर चलाने वाले थे। ऐसे में दिल्ली पुलिस को पूरा ‘चेन ऑफ कमांड’ समझाना चाहिए।
गुरमेहर कौर ने पत्रकार वार्ता में कहा कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर पत्थरों और फेंकने वाली चीज़ों (प्रोजेक्टाइल) से भरा एक रहस्यमयी ट्रक दिखाई दिया। इसी ट्रक का 16 जुलाई को एक्सीडेंट हुआ था और इसे पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में पुलिस कस्टडी में ले लिया गया था। फिर, अचानक, यह संसद मार्ग और जंतर-मंतर पर, और आखिर में इंडियन यूथ कांग्रेस ऑफिस के बाहर पत्थरों और फेंकने वाली चीज़ों से भरा हुआ फिर से दिखाई दिया।
हम पूछते हैं:
⦿ पत्थरों से भरा ट्रक यूथ कांग्रेस ऑफिस के बाहर कैसे खड़ा किया गया?
⦿ अगर इतनी सघन पुलिस चेकिंग और इतने सारे बैरिकेड्स थे, तो यह ट्रक संसद मार्ग तक कैसे पहुँचा?
⦿ ट्रक किसने चलाया, और किसके सीधे आदेश पर पुलिस कस्टडी में मौजूद ट्रक को कई दिनों तक सड़कों पर रखा गया?
⦿ संसद से सिर्फ़ 100 मीटर की दूरी पर सुरक्षा के इतने बड़े जोखिम की इजाज़त कैसे दी जा सकती थी?
⦿ पत्थरों और फेंकने वाली चीज़ों से भरे इस ट्रक को बिना किसी देखरेख के छोड़ने के लिए कौन ज़िम्मेदार था?
⦿ क्या होता अगर उपद्रवी इन चीज़ों का इस्तेमाल हिंसा भड़काने के लिए करते?
भारतीय युवा कांग्रेस के लीगल विभाग कि राष्ट्रीय संयोजक चितवन गोदारा ने कहा कि यह सिर्फ़ एक ट्रक का सवाल नहीं है; यह अकाउंटेबिलिटी, सच्चाई और कानून के राज का सवाल है। दिल्ली पुलिस के वकील ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक कहानी पेश की, जिसमें पूरे मामले को प्रदर्शनकारियों से जोड़ा गया। यह बहुत खतरनाक है और संविधान की बुनियादी नींव के खिलाफ है। एक ट्वीट में दावा किया गया कि दिल्ली पुलिस ने कहा कि ट्रक हमारा है। अगर ऐसा है, तो कोर्ट के सामने पेश की गई पिछली कहानी को किसने मंज़ूरी दी थी?

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