
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आज प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल प्रशासन की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ऑटो म्यूटेशन प्रणाली एवं पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 का शुभारंभ कर दिया है। अब हरियाणा में इंतकाल के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। इतना ही नहीं, घर बैठे ही इंतकाल को डाउनलोड भी किया जा सकेगा। हरियाणा निवास पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रिमोट का बटन दबाकर इन परियोजनाओं का आगाज किया। इस दौरान राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री विपुल गोयल, जनस्वास्थ्य आभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा, विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव व एफसीआर डॉ. सुमित्रा मिश्रा भी मौजूद थे। कार्यक्रम में हरियाणा के सभी जिलो से भी विभाग के अधिकारीगण और उपायुक्त वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जुड़े थे। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेशवासियों के जीवन को सरल, सुगम और सुविधाजनक बनाने का जो संकल्प राज्य सरकार ने लिया था, आज ऑटो म्यूटेशन प्रणाली एवं पेपरलेस रजिस्ट्री 2.0 के शुभारंभ के साथ उसे एक नई दिशा मिली है। यह व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ और ‘विकसित हरियाणा’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल शासन में पारदर्शिता , सुगमता और तकनीक के अधिकतम उपयोग के माध्यम से नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पहले लोगों को इंतकाल और भूमि संबंधी कार्यों के लिए एक-एक और दो-दो वर्ष तक इंतजार करना पड़ता था। आम नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश की डबल इंजन सरकार पूरी पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है, ताकि आमजन को सरकारी सेवाओं और सुविधाओं का लाभ सरल, सुगम और समयबद्ध तरीके से मिल सके। ऑटो म्यूटेशन एवं पेपरलेस रजिस्ट्री 2.0 जैसी पहलें इसी सोच का परिणाम हैं, जो नागरिकों को बेहतर और परेशानी-मुक्त सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश में पेपरलेस रजिस्ट्री की शुरुआत 29 सितंबर, 2025 को कुरुक्षेत्र की लाडवा तहसील से की गई थी, जिसे 1 नवंबर, 2025 से पूरे राज्य में लागू कर दिया गया था। पिछले आठ महीनों के दौरान विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों और अनुभवों के आधार पर अब इसके दूसरे चरण पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 को लागू किया गया है, जिसमें रजिस्ट्री प्रक्रिया के साथ-साथ इंतकाल को भी शामिल कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नई प्रणाली में रजिस्ट्री के लिए आवेदन फॉर्म को पहले की तुलना में अधिक सरल और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाया गया है। दोनों पक्षों के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी (e-KYC) अनिवार्य की गई है, जिससे पहचान की शत-प्रतिशत पुष्टि सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति, कंपनी, संस्था अथवा एनआरआई स्वयं रजिस्ट्री प्रक्रिया में उपस्थित नहीं हो सकता है, तो वह अब एक से अधिक व्यक्तियों को अपना प्रतिनिधि नियुक्त कर सकेगा। नागरिक स्वयं, डीड राइटर, अधिवक्ता अथवा हेल्पडेस्क के माध्यम से डीड भर सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री के समय भूमि का कौन-सा भाग प्राइम श्रेणी तथा कौन-सा नॉन-प्राइम श्रेणी में आता है, इसकी जानकारी सिस्टम में स्वतः प्रदर्शित होगी। पूरी प्रक्रिया में डिजिटल हस्ताक्षर एवं बायोमेट्रिक प्रणाली लागू की गई है। यदि किसी भूमि पर हरियाणा स्टाम्प नियमों के तहत धारा 7ए लागू होती है, तो उसकी जानकारी भी रजिस्ट्री के समय सिस्टम में स्वतः दिखाई देगी। उन्होंने कहा कि नागरिकों को ऑनलाइन स्टेटस सत्यापन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। किसी भी प्रकार की अनियमितता की स्थिति में स्वतः रोक (ऑटो-होल्ड) व्यवस्था लागू होगी। विभिन्न संबंधित विभागों की जानकारी सीधे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में प्रदर्शित होगी। नागरिक अतिरिक्त दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड कर सकेंगे तथा रजिस्ट्रेशन के समय भी अतिरिक्त दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि दस्तावेजों के सत्यापन के लिए क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था लागू की गई है तथा अधिकतम तीन अवसरों के भीतर मामले का निर्णय सुनिश्चित किया जाएगा। अब पासपोर्ट की तरह रजिस्ट्री की अपॉइंटमेंट भी तत्काल श्रेणी में भी प्राप्त की जा सकेगी। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त ई-स्टाम्प जोड़ने की सुविधा उपलब्ध होगी। डीटीपी तथा एनओसी के लिए अलग से दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी तथा विभागीय सत्यापन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रणाली में अलग-अलग स्तरों पर किए जाने वाले आरसी-1 और आरसी-2 के कार्यों को एकीकृत (कम्बाइन) कर दिया गया है, जिससे अनावश्यक प्रक्रियाओं में कमी आएगी और समय की बचत होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज राजस्व प्रशासन में एक और ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी सुधार के रूप में स्वचलित (ऑटो) इंतकाल प्रणाली की भी शुरुआत की जा रही है, जिससे प्रदेश के लाखों किसानों और भू-स्वामियों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में लोगों को इंतकाल दर्ज करवाने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए राजस्व विभाग ने पिछले एक वर्ष से निरंतर कार्य किया है। प्रदेश में लगभग 6 लाख से अधिक इंतकाल लंबित थे, जिनमें से करीब 4 लाख मामलों का निपटान पहले ही किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑटो म्यूटेशन प्रणाली को लागू करने से पहले इसे एक माह तक पायलट आधार पर संचालित किया गया। इस दौरान प्राप्त सभी सुझावों एवं फीडबैक को प्रणाली में शामिल किया गया। प्रारंभिक चरण में ही लगभग 50 हजार इंतकाल स्वतः दर्ज किए जा चुके हैं। नई व्यवस्था के तहत अब रजिस्ट्री होते ही इंतकाल स्वतः दर्ज हो जाएगा तथा रजिस्ट्री के समय ही संबंधित इंतकाल नंबर उपलब्ध हो जाएगा। जिन मामलों में खेवट विभाजन की आवश्यकता नहीं होगी, उनमें 24 घंटे के भीतर इंतकाल स्वीकृत कर दिया जाएगा। वहीं जिन मामलों में खेवट विभाजन आवश्यक होगा, उनमें अधिकतम 10 दिनों के भीतर इंतकाल का निपटान सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी तथा प्रत्येक चरण की निगरानी डिजिटल माध्यम से की जाएगी। सरकार का लक्ष्य आगामी 15 दिनों के भीतर शेष सभी लंबित इंतकालों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि अब रजिस्ट्री और इंतकाल की प्रक्रियाएं एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़ जाएंगी। नागरिकों को अलग से इंतकाल के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। वे अपने इंतकाल की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे तथा इंतकाल की प्रति ऑनलाइन डाउनलोड और प्रिंट भी कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि पेपरलेस रजिस्ट्री 2.0 और स्वचलित इंतकाल प्रणाली के लागू होने से प्रदेश में राजस्व प्रशासन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह, भ्रष्टाचार-मुक्त और नागरिक केंद्रित बनेगा तथा लोगों को तेज, सरल और समयबद्ध सेवाएं प्राप्त होंगी। हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दूरदर्शी नेतृत्व, मार्गदर्शन और निरंतर मॉनिटरिंग के कारण यह महत्वपूर्ण पहल साकार हो पाई है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए अनेक समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का स्पष्ट विजन था कि आम नागरिकों को अपने कार्यों के लिए पटवारियों और राजस्व कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लंबे समय से लंबित लगभग इंतकालों में से ज्यादातर का निपटान किया जा चुका है और शेष का भी शीघ्र समाधान कर दिया जाएगा। नई ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था लागू होने के बाद नागरिकों को इंतकाल के लिए अलग से आवेदन करने या कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। अब संपत्ति की रजिस्ट्री होते ही म्यूटेशन की प्रक्रिया भी स्वतः पूरी हो जाएगी। मंत्री विपुल गोयल ने इस पहल को नागरिक हितैषी, पारदर्शी और क्रांतिकारी पहल बताया और कहा कि हरियाणा इस प्रकार की व्यवस्था लागू करने वाले देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। कार्यक्रम के दौरान विभाग की अतिरिक्त मुख्यसचिव डॉ सुमिता मिश्रा ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि ऑटो म्यूटेशन प्रणाली एवं पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 से प्रदेश के नागरिकों को अपने जमीन के इंतकाल और रजिस्ट्रेशन की बेहतर सुविधा मिलेगी। इससे पारदर्शिता और कार्यो का तेजी से निपटान संभव हो पाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग इस सुविधा को और अधिक कारगर बनाने के लिए अन्य परियोजनाओं पर भी काम कर रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव यशपाल यादव, मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव श्री प्रवीण अत्रे सहित विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
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