
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बैठक में दुनिया के सामने भारत का सिर शर्म से झुका दिया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बैठक का हवाला देते हुए कहा कि मोदी ने अमेरिकी दबाव में डोनाल्ड ट्रंप के सामने पूरी तरह सरेंडर कर दिया है और वह अमेरिकी सेना द्वारा भारतीय नाविकों की हत्या तथा अमेरिका के हित में हुए व्यापार समझौते पर कोई आपत्ति नहीं जता पाए। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के मीडिया और प्रचार (संचार विभाग) के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने कहा कि बैठक में मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के सीजफायर पर भी कोई बात नहीं की। जबकि ट्रंप ने लगातार कहा है कि उन्होंने भारत को धमकी देकर सीजफायर कराया है। साथ ही जब ट्रंप ने ब्रिक्स के कमजोर पड़ने की बात कही, तब भी मोदी चुप रहे।खेड़ा ने कहा कि बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने नरेंद्र मोदी की नजरें झुकी हुई थीं, वे सोफे पर दुबककर बैठे हुए थे।
कांग्रेस नेता ने कहा कि अमेरिका ने तीन निर्दोष भारतीय नाविकों की हत्या कर दी। माफी मांगना तो दूर, ट्रंप ने मोदी की मौजूदगी में कह दिया कि यह सब तो चलता रहता है। उन्होंने कटाक्ष किया कि ट्रंप ने जब प्रधानमंत्री की दमकती त्वचा की तारीफ की, तो वे उसी में खुश हो गए और देश का अपमान सहकर वापस आ गए। उन्होंने कहा कि इसी तरह भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से डांट खाकर वापस आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि 12 वर्षों में मोदी सरकार की विदेश नीति भारत-प्रथम के बजाय विनाशकारी रूप से पीआर-प्रथम रही है।खेड़ा ने कहा कि बैठक में अमेरिका के साथ हुए एकतरफा व्यापार समझौते पर भी कोई आपत्ति नहीं जताई गई, जबकि इससे भारत के छोटे-मध्यम उद्योगों और किसानों को भारी नुकसान होगा।कांग्रेस नेता ने बताया कि इस बैठक के दौरान भारत को तीन बड़े झटके भी लगे। अमेरिका ने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया, जो क्षेत्र में भारत के रणनीतिक महत्व को कम करने जैसा है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी ने नक्शे में पाक अधिकृत कश्मीर के हिस्से को भारत की जगह पाकिस्तान का भाग दिखाया। इसके अलावा अमेरिकी विदेश विभाग ने जुलाई 2026 के वीजा बुलेटिन में भारतीयों के लिए ईबी-2 और ईबी-5 वीजा को बंद कर दिया।
पवन खेड़ा ने ट्रंप के उस बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने कहा कि मोदी के रहते भारत पर हमला हुआ तो अमेरिका मदद करेगा। उन्होंने कहा कि यह बयान ऐसा था, जैसे भारत अमेरिका की कोई कॉलोनी हो। उन्होंने कहा कि कोई दूसरा प्रधानमंत्री होता तो कहता कि भारत अपनी रक्षा करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि हमें अंग्रेजों को भगाने में 200 साल लगे थे, लेकिन नरेंद्र मोदी अपनी नीतियों से 12 साल में फिर से देश को गुलामी की ओर ले आए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि एच-1 बी वीजा 2023 के लिए ट्रंप ने अमेरिकी कंपनियों को सलाह दी थी कि वह भारतीयों को न रखें। अमेरिका ने भारतीयों को हथकड़ियां बांधकर वापस हिंदुस्तान भेजा। अमेरिका ने हमारे मेहमान रहे ईरान के युद्धपोत को डुबो दिया। इन सबके बावजूद मोदी ने अमेरिका के समक्ष विरोध दर्ज नहीं कराया।खेड़ा ने कहा कि यूपीए सरकार ने पाकिस्तान को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में डलवाया था, लेकिन मोदी सरकार में पाकिस्तान ने मजबूत स्थिति हासिल कर ली है और पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर को ट्रंप ऑपरेशन सिंदूर के बाद कई बार डिनर पर बुला चुके हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका को खुश करने के लिए अपनी संप्रभुता से समझौता करना, राष्ट्रीय हितों को दांव पर लगाना और हद से ज्यादा झुकना मोदी की विदेश नीति का सार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मोदी को ट्रंप द्वारा बार-बार नजरअंदाज किया जाना केवल उनका अपमान नहीं है, यह 140 करोड़ भारतीयों के लिए भी शर्मनाक है। कांग्रेस नेता ने पूर्व प्रधानमंत्रियों का जिक्र करते हुए कहा कि किसी ने भी विदेशी ताकतों के सामने कभी इस तरह सरेंडर नहीं किया। उन्होंने याद दिलाया कि देवयानी खोबरागड़े के मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने अमेरिका को कड़ा संदेश दिया था। इसी प्रकार वर्ष 1986 में राजीव गांधी ने वॉइस ऑफ अमेरिका को श्रीलंका में भारतीय तट के पास ट्रांसमीटर लगाने से रोक दिया था।
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