
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:ओमान की खाड़ी में एक जहाज पर अमेरिकी सेना के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत को लेकर कांग्रेस ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी चुप्पी तोड़ें, राष्ट्र को संबोधित करें और शोक संतप्त परिवारों से स्वयं बात कर उन्हें न्याय का आश्वासन दें। पार्टी ने कहा कि मोदी सरकार अमेरिका के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए उसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहे; साथ ही प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और क्षेत्र में कार्यरत सभी भारतीय नाविकों की सुरक्षा की गारंटी की मांग भी करे। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए कांग्रेस सोशल मीडिया विभाग की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने यह मांग भी की कि समुद्री क्षेत्रों और संघर्ष वाले इलाकों में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था की तुरंत व्यापक समीक्षा हो और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जाए। इसके अलावा उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारत की विदेश नीति की विफलता पर संसद में चर्चा कराए जाने की भी मांग की।उन्होंने इस हमले में जान गंवाने वाले आदित्य शर्मा (हिमाचल प्रदेश), शिवानंद चौरसिया (उत्तर प्रदेश) और पटनाला सुरेश (आंध्र प्रदेश) को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बेहद संवेदनशील मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं और उनका यह कायराना रवैया विफल विदेश नीति का जीता जागता सबूत है।
श्रीनेत ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से भारत का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, इसके बावजूद अमेरिका ने भारतीय नागरिकों पर हमला करने का दुस्साहस किया।कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके संबंधों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भारतीयों को मारने वाला प्रधानमंत्री का ‘डियर फ्रेंड ट्रंप’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका को यह पता था कि जहाज पर भारतीय सवार हैं,इसके बावजूद हमला किया गया और भारतीय नागरिक मारे गए,लेकिन इस सबसे बेपरवाह प्रधानमंत्री विदेश में नृत्य-संगीत का आनंद ले रहे हैं।उन्होंने कहा कि आजाद हिंदुस्तान में पहली बार भारत की संप्रभुता और स्वतंत्रता पर इस तरह का प्रहार हो रहा है,अमेरिका मनमानी कर रहा है,लेकिन नरेंद्र मोदी बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि किसी भी पूर्व प्रधानमंत्री ने देश की संप्रभुता को दांव पर लगाकर इस तरहअमेरिका के समक्ष समर्पण नहीं किया।श्रीनेत ने भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया को महज एक औपचारिकता करार देते हुए कहा कि 13 जून को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी चार्जडी’अफेयर्स को तलब किया और दबी ज़ुबान में थोड़ा सा विरोध दर्ज कराया,इसके बाद उन्होंने बयान दिया कि अमेरिका के सामने आपत्ति दर्ज कराई गई है। श्रीनेत ने इसके तुरंत बादआए अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो के बयान का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने माफी मांगने या शोक जताने के बजाय भारत को यह कहते हुए धमका दिया कि अगर अमेरिकी सेना का आदेश नहीं माना तो अगली बार फिर ऐसा ही होगा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अब तक रुबियो के बयान का खंडन नहीं किया है, इसलिए उनकी बात सच प्रतीत होती है। कांग्रेस नेता ने राहुल गांधी के बयानों का संदर्भ देते हुए कहा कि भारत की संप्रभुता की रक्षा करने के बजाए कॉम्प्रोमाइज्ड प्रधानमंत्री एक आज्ञाकारी नौकर की तरह अमेरिका के आदेशों को मानना ज्यादा उचित समझते हैं। उन्होंने पूछा कि नरेंद्र मोदी की ऐसी कौन सी नस है, जिसे अमेरिका ने दबा रखा है? उन्होंने सवाल किया कि वर्तमान विदेश यात्रा में जब पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मिलेंगे, तो क्या वे अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की क्रूर हत्या का मुद्दा उठाएंगे? क्या प्रधानमंत्री अमेरिकी नेतृत्व से पूछेंगे कि भारतीयों को मारने की अमेरिका की हिम्मत कैसे हुई?
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