अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने देश में गहराते आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा घोटालों और लोकतंत्र पर कुठाराघात जैसे मुद्दों को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ जमीनी स्तर पर बड़ा देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।इंदिरा भवन स्थित कांग्रेस मुख्यालय में देश के मौजूदा हालात पर पार्टी महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों की तीन घंटे तक चली महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव प्रियंका गांधी और संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश समेत वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बैठक के बाद पत्रकार वार्ता करते हुए केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश ने बताया कि यह आंदोलन सिर्फ राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर तक ले जाया जाएगा। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता सीधे उन लोगों के बीच जाएंगे जो महंगाई, बेरोजगारी तथा वर्तमान व्यवस्था से पीड़ित हैं, उनका दर्द बांटेंगे और उनकी आवाज को आंदोलन के जरिए राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि इस पूरे आंदोलन का विस्तृत कार्यक्रम अगले 4-5 दिनों में जारी कर दिया जाएगा।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बताया कि बैठक में देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (रसोई गैस) के दाम दिन प्रति दिन बढ़ रहे हैं। आम जनता गंभीर संकट में है, लेकिन सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। देश में बेरोजगारी उच्चतम स्तर पर है। मोदी सरकार द्वारा की गई नोटबंदी और गलत नीतियों के कारण पूरा एमएसएमई सेक्टर बर्बाद हो चुका है। रोजगार न होने की वजह से देश का युवा अपने भविष्य को लेकर बेहद चिंतित है। वेणुगोपाल ने नीट पेपर लीक और सीबीएसई परीक्षा में हुई गड़बड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि आज सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि उनके परिवार भी निराशा में हैं। उन्होंने सरकार की नैतिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को दोहराया।वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्य प्रदेश और झारखंड के हालिया घटनाक्रमों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश से कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन सिर्फ इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि उन्होंने कोर्ट के एक सामान्य नोटिस का खुलासा नहीं किया, जबकि उनके खिलाफ न तो कोई आपराधिक मामला है, न कोई एफआईआर है और न ही कोई चार्जशीट दाखिल हुई है। दूसरी तरफ, भाजपा समर्थित एक कॉर्पोरेट उम्मीदवार के नामांकन पत्र में कई बड़ी कमियां होने के बावजूद उनका नामांकन स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र की दयनीय स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि एक तरफ विपक्ष के सांसदों का इस्तीफा कराकर उन्हें भाजपा में शामिल किया जा रहा है, और दूसरी तरफ नामांकन रद्द किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे वोट चोरी के बाद अब सरेआम सीट चोरी की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि बैठक में निर्णय लिया गया है कि कांग्रेस इस अन्याय के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर मजबूती से लड़ेगी।वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने जोर देते हुए कहा कि देश में हालात इतने खतरनाक हैं कि एक तरफ लोकतंत्र नहीं है और दूसरी तरफ आम लोग अपनी आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए यह भी लिखा कि मोदी सरकार के कुशासन से प्रभावित सभी वर्गों को एकजुट किया जाएगा और आम लोगों को यह संदेश दिया जाएगा कि कांग्रेस पार्टी उनके साथ है जबकि भाजपा अमीर और ताकतवर लोगों के साथ है।

