Athrav – Online News Portal
दिल्ली राजनीतिक राष्ट्रीय हाइलाइट्स

सिंघवी ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के एसआईआर संबंधी फैसले ने जितने सवालों के जवाब दिए, उससे कहीं अधिक सवाल खड़े कर दिए।


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली:कांग्रेस के कानून, मानवाधिकार एवं आरटीआई विभाग के चेयरमैन डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को लेकर अपने फैसले से जितने जवाब दिए हैं, उससे कहीं अधिक प्रश्न खड़े कर दिए हैं।कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार नागरिकता के विषय में अंतिम निर्णय लेने वाली संस्था चुनाव आयोग नहीं है। उन्होंने कहा कि नागरिकता अधिनियम के तहत इसकी निर्णायक संस्था केवल सक्षम प्राधिकारी, मुख्य रूप से गृह मंत्रालय ही है। फैसले में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग इस मुद्दे को केवल प्रशासनिक रूप से संभाल सकता है। एक बड़े विरोधाभास की ओर इशारा करते हुए डॉ. सिंघवी ने कहा कि फैसले में लिखा है कि जहां नागरिकता का सवाल उठेगा, वहां चुनाव आयोग को यह मामला गृह मंत्रालय जैसे सक्षम प्राधिकारी को भेजना होगा और उसका निर्णय बाध्यकारी होगा। उन्होंने सवाल उठाए कि यदि नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है, तो देश के विभिन्न राज्यों में लगभग 7.5 करोड़ लोगों को नागरिकता का निर्णय होने से पहले ही मतदाता सूची से कैसे बाहर कर दिया गया? उन्होंने पूछा कि करोड़ों लोगों का मताधिकार एक ऐसी संस्था द्वारा कैसे छीना जा सकता है, जिसे ये अधिकार ही नहीं है? उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैरा 97 से 101 तक का अध्ययन करने पर साफ पता चलता है कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की ओर से गंभीर खामियां थीं, जिनमें सुधार केवल इसलिए संभव हो पाया क्योंकि विभिन्न राजनीतिक दल और एनजीओ अदालत पहुंचे थे।डॉ. सिंघवी ने कहा कि बिहार में 65 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे और अदालती हस्तक्षेप के बाद ही उन नामों को दोबारा प्रकाशित करना और उनके हटाने का कारण देना संभव हो पाया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में राजनीतिक दलों को हाईकोर्ट द्वारा इस प्रक्रिया में पक्षकार बनाया गया, जिसके बाद बीएलए और पैरालीगल वॉलिंटियर्स को शामिल किया गया ताकि लोगों को यह सिखाया जा सके कि सही तरीके से फॉर्म कैसे भरा जाता है। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि चुनाव आयोग ने जल्दबाजी और खामियों के साथ यह पूरी प्रक्रिया संचालित की। उन्होंने अफ़सोस जताया कि इतनी बड़ी विसंगतियों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की इन गंभीर कमियों पर कोई सख्त टिप्पणी नहीं की।डॉ. सिंघवी ने एसआईआर की समयसीमा पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी प्रक्रिया की ‘मूल गलती’ करार दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में इस प्रक्रिया के लिए महज चार महीने और पश्चिम बंगाल में पांच महीने का समय दिया गया। उन्होंने पूछा कि जब इस प्रक्रिया में करोड़ों लोग शामिल थे, तो चुनाव आयोग ने जानबूझकर इतनी जल्दबाजी क्यों की?  उनका कहना था कि यदि यही प्रक्रिया चुनाव से एक वर्ष पहले शुरू की जाती, तो आम जनता को इतनी परेशानी नहीं होती। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण पहलू पर भी सुप्रीम कोर्ट की कोई टिप्पणी नहीं आई।डॉ. सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया में सबसे बड़ी विसंगति यह रही कि मतदाताओं के नाम पहले हटा दिए गए और उनके दावों व अपीलों पर निर्णय बाद में आया। इस बीच में ही चुनाव संपन्न हो गए, जिससे लाखों नागरिक अपने सबसे बड़े लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित रह गए। उन्होंने गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि चुनाव हो जाने के बाद उस फैसले का क्या औचित्य रह जाता है? उन्होंने कहा कि इस पर भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी नहीं आई। डॉ. सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले के पैरा 156 में आधार कार्ड और पैरा 198 में राशन कार्ड को नागरिकता का प्रमाण मानने से इनकार किया है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि आधार और राशन कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं हो सकते, तो चुनाव आयोग द्वारा सूचीबद्ध बाकी दस्तावेज-जैसे जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता के जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, 10 वीं की मार्कशीट- भी नागरिकता के प्रमाण नहीं माने जा सकते; मगर चुनाव आयोग ने एसआईआर की पूरी प्रक्रिया इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर संचालित की।डॉ. सिंघवी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में आंतरिक आदेशों द्वारा सुप्रीम कोर्ट ने एक सिस्टम बनाया है कि जो लोग निष्कासित हुए हैं, उन्हें एक अपील का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि छह हजार अपीलों में चार हजार अपील स्वीकार कर ली गईं।  उन्होंने कहा कि अगर 80 फीसदी लोगों को गलत तरीके से हटाया गया था और बाद में उनकी अपीलें स्वीकार हो गईं, लेकिन चुनाव तो खत्म हो चुका है और परिणाम भी आ चुके हैं, ऐसे में क्या यह पूरी चुनावी प्रक्रिया और उसके परिणामों पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न नहीं लगाता?

Related posts

चंडीगढ़ ब्रेकिंग: जेजेपी ने 22 महिला जिला अध्यक्ष समेत 31 पदाधिकारी नियुक्त किए

Ajit Sinha

फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने किसे किया दिल से “THANK YOU” देखें वीडियो

Ajit Sinha

फरीदाबाद: कांग्रेस पूर्व सांसद अवतार भड़ाना के होली मिलन समरोह में प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर पहुंचे, भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट दूरी बनाए रखा।

Ajit Sinha
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
error: Content is protected !!
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x