
अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट
दिल्ली-एनसीआर के कॉलेजों, यूनिवर्सिटीज और हॉस्टलों में पढ़ने वाले छात्रों को नशे के दलदल में धकेलने वाले एक बहुत बड़े ऑनलाइन ड्रग्स सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। यूपी एसटीएफ की नोएडा यूनिट ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए इस इंटरनेशनल ड्रग्स रैकेट के मास्टरमाइंड को ग्रेटर नोएडा के परी चौक से दबोच लिया है। यह शातिर कातिल भी रह चुका है और अब डार्क वेब व सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक हाई-क्वालिटी विदेशी नशा पहुंचा रहा था। रैपिडो, उबर और पोर्टर जैसी ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों के जरिए यह नेटवर्क ऑपरेट हो रहा था।एसटीएफ की गिरफ्त में खड़ा गौरव खन्ना कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर के युवाओं के भविष्य से खेलने वाला ड्रग माफिया गौरव खन्ना है। आरोपित गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन के अजनारा इंटीग्रिटी का रहने वाला है। एसटीएफ के एडिशनल एसपी राजकुमार मिश्र ने बताया कि लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे कि कुछ लोग डार्क वेब और सोशल मीडिया पर सीक्रेट कम्युनिटी ग्रुप बनाकर विदेशी ड्रग्स जैसे इम्पोर्टेड गांजा, ओजी, बाबा कुश और चरस की ऑनलाइन सप्लाई कर रहे हैं। इसी सूचना पर कार्रवाई करते हुए एसटीएफ नोएडा यूनिट ने जाल बिछाया और इसके मास्टर माइंड गौरव खन्ना को परी चौक के पास से गिरफ्तार कर लिया।
एडिशनल एसपी ने बताया कि इस गिरोह के एक अन्य सदस्य करण राजीव को एसटीएफ ने 5 मई 2026 को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया था। उसके पास से भारी मात्रा में मादक पदार्थ, पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुए थे। इस मामले में नंदग्राम थाने में केस दर्ज होने के बाद से ही मुख्य आरोपित गौरव खन्ना फरार चल रहा था। पूछताछ में सामने आया कि गौरव खन्ना का पुराना आपराधिक इतिहास है। 1999 में फरीदाबाद से बीसीए की पढ़ाई के दौरान इसके साथी छात्र हेमराज की हत्या हो गई थी, जिसमें यह 10 महीने रोहतक जेल में बंद रहा। इसके बाद भी इस पर हत्या के प्रयास और मारपीट के मुकदमे दर्ज हुए।आरोपित ने पूछताछ में बताया कि वह 2019 से थाईलैंड से इम्पोर्टेड गांजा और हिमाचल प्रदेश से चरस मंगवाकर ऑनलाइन बेच रहा था। इसका निशाना दिल्ली-एनसीआर के नामी कॉलेजों और हॉस्टलों के छात्र होते थे। यह व्हाट्सएप और टेलीग्राम के सीक्रेट ग्रुप्स में ड्रग्स का प्रचार करता था और ऑर्डर मिलने पर ऑनलाइन यूपीआई (UPI) के जरिए पेमेंट लेता था। पकड़े जाने से बचने के लिए यह शातिर तरीका अपनाता था। ड्रग्स को कंप्यूटर पार्ट्स, पेन ड्राइव या इलेक्ट्रॉनिक सामान की तरह पैक किया जाता था, ताकि किसी को शक न हो। इसके बाद रैपिडो, उबर और पोर्टर जैसी डिलीवरी सेवाओं के जरिए इसे सीधे छात्रों तक कूरियर करा दिया जाता था। पूछताछ में गौरव खन्ना ने विदेशी इम्पोर्टेड ड्रग्स रेट्स का भी खुलासा किया है, ओजी गांजा करीब 1400 प्रति ग्राम, बाबा कुश 5500 प्रति ग्राम, एलएसडी 4400 प्रति ग्राम तक, हशीश (चरस) 4500 प्रति 10 ग्राम वसूलता था. जांच एजेंसियों ने इसके अब तक 17 बैंक खातों का पता लगाया है, जिनमें करोड़ों के लेनदेन की आशंका है।
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