
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता की जेब काटकर अपने मित्रों की तिजोरी भर रहे हैं।कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक ने कहा कि कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी कह रहे थे कि देश में तेल का कोई संकट नहीं है, महंगाई नहीं बढ़ेगी।उन्होंने सवाल किया कि अगर सब सही है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटकर लगभग 98 डॉलर प्रति बैरल होने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल क्यों महंगा हो रहा है? सोमवार को फिर से पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी क्यों की गई? पिछले 11 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम लगभग आठ रुपये क्यों बढ़े?रागिनी नायक ने कहा कि जब देश की आम जनता त्राहिमाम कर रही है, तब 90 प्रतिशत घरेलू रिटेल बाजार को नियंत्रित करने वाली तेल कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम) के चौथी तिमाही के संयुक्त शुद्ध लाभ में 41 प्रतिशत का उछाल आया है। उन्होंने बताया कि जनवरी से मार्च के बीच वैश्विक संकट के दौरान इन तेल कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ 19,470 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
रागिनी नायक ने कहा कि जब दूसरे देशों में पेट्रोल-डीजल पर जनता को राहत दी जा रही है, ऐसे में पिछले 12 वर्षों में एक्साइज ड्यूटी बढ़ा-बढ़ाकर 43 लाख करोड़ रुपये वसूलने के बाद भी सरकार महंगाई बढ़ाकर जनता की कमर तोड़ रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश में तेल और गैस की किल्लत के बावजूद अंबानी जैसे उद्योगपति तेल निर्यात कर मुनाफा कमा रहे हैं।कांग्रेस प्रवक्ता ने यूपीए सरकार के कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम 147 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने जनहित को ध्यान में रखते हुए एक्साइज ड्यूटी नहीं बढ़ने दी। इसका नतीजा यह था कि जनता को 71 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल, 55 रुपये प्रति लीटर डीजल और 412 रुपये में घरेलू एलपीजी सिलेंडर मिलता था।रागिनी नायक ने कहा कि आज मोदी सरकार में हर दूसरे दिन चीजों के दाम बढ़ रहे हैं। आज डिग्री है तो नौकरी नहीं है, गाड़ी है तो पेट्रोल-डीजल नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों की परेशानियों के प्रति प्रधानमंत्री की उदासीनता पर तंज कसते हुए कहा कि देश में पेपर लीक हो रहे हैं, अभ्यर्थी आत्महत्या कर रहे हैं और लोग अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री की प्राथमिकता विदेश यात्राएं करना, टॉफी- चॉकलेट खिलाना और रील बनाना है। रागिनी नायक ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने सरेंडर न किया होता तो देश को तेल आपूर्ति की चिंता नहीं करनी पड़ती, पेट्रोल-डीजल महंगे न होते और मोदी सरकार को रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका से अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि देश में रोजाना 12 लाख बैरल तेल कम आ रहा है। रागिनी नायक ने कहा कि वैश्विक संकट से पहले ही देश पर कर्ज का बोझ 2014 के 52 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 216 लाख करोड़ रुपये हो चुका था। उन्होंने देश की घरेलू बचत 50 वर्षों में सबसे निचले स्तर पर पहुंचने का भी उल्लेख किया। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय रुपया एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन चुका है; स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में भारत के 13 जहाज फंसे हुए हैं और तेल आपूर्ति में बाधा आ रही है। उन्होंने ट्रंप के चीन जाने और ऑपरेशन सिंदूर के समय चीन के पाकिस्तान के साथ खड़े होने का हवाला देते हुए यह भी पूछा कि मोदी सरकार अपनी विदेश नीति कैसे सुधारेगी?प्रधानमंत्री द्वारा पिछले 12 वर्षों में एक भी पत्रकार वार्ता नहीं करने को लेकर भी हमला करते हुए रागिनी नायक ने मांग की कि प्रधानमंत्री तुरंत एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर देश की जनता को यह भरोसा दिलाएं कि अब ईंधन के दाम और नहीं बढ़ेंगे, एलपीजी सिलेंडर की कालाबाजारी नहीं होगी व यह भी बताएं कि बढ़ी हुई कीमतों को कब तक कम किया जाएगा।
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