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दिल्ली राष्ट्रीय हाइलाइट्स

एक्यूआई के ‘खराब’ श्रेणी में पहुँचने पर सीएक्यूएम ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप चरण-I लागू किया।


अजीत सिन्हा / नई दिल्ली
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान(ग्रैप) का चरण-I लागू कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया जब दिल्ली का दैनिक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़कर 208 पर पहुँच गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है।यह निर्णय दिल्ली- एनसीआर में वायु गुणवत्ता की वर्तमान स्थिति की समीक्षा और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी)/भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के पूर्वानुमानों के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ग्रैप उप-समिति द्वारा लिया गया, जिसमें यह संकेत दिया गया है कि आने वाले दिनों में भी वायु गुणवत्ता के ‘खराब’ श्रेणी में ही बने रहने की आशंका है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी दैनिक एक्यूआई बुलेटिन के अनुसार, उप-समिति ने पाया कि दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में लगातार बढ़त देखी जा रही है और 19 मई 2026 को यह 208 (‘खराब’ श्रेणी) दर्ज किया गया।
तदनुसार, उप-समिति ने पूरे एनसीआर में तत्काल प्रभाव से मौजूदा ग्रैप के पहले चरण के तहत सभी कार्रवाइयों को लागू करने का निर्णय लिया है। इस 31-सूत्रीय कार्य योजना में विभिन्न एजेंसियों द्वारा लागू और सुनिश्चित किए जाने वाले उपाय शामिल हैं, जिनमें एनसीआर राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) भी शामिल हैं। ये कदम इस प्रकार हैं:
दिनांक 11.06.2021 के निर्देश संख्या 11-18 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना और 500 वर्ग मीटर या उससे अधिक के भूखंड (प्लॉट साइज) वाले ऐसी परियोजनाओं में निर्माण एवं ध्वंस (सी&डी) गतिविधियों की अनुमति न देना, जो संबंधित राज्य/राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के ‘वेब पोर्टल’ पर पंजीकृत नहीं हैं और/या जो धूल नियंत्रण उपायों की दूरस्थ निगरानी के लिए ऊपर उल्लिखित वैधानिक निर्देशों के अनुसार अन्य आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते हैं।
नगरपालिका ठोस कचरे, निर्माण और विध्वंस कचरे और खतरनाक अपशिष्टों को निर्धारित डंप स्थलों से नियमित रूप से उठाना सुनिश्चित करें और यह भी सुनिश्चित करें कि खुले ज़मीनी क्षेत्रों में कोई भी अपशिष्ट अवैध रूप से न डाला जाए।
सड़कों पर समय-समय पर मशीनों से सफ़ाई और पानी का छिड़काव करवाएँ और यह सुनिश्चित करें कि इस दौरान जमा हुई धूल का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारित स्थलों/लैंडफिल में निपटान किया जाए।
यह सुनिश्चित करें कि सी&डी सामग्री और कचरा परिसर में ठीक से जमा/रखा गया हो और उचित रूप से ढका हुआ हो। सी&डी सामग्री और सी&डी कचरे का परिवहन केवल ढके हुए वाहनों से ही सुनिश्चित करें।
सी&डी स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन के उपयोग के लिए वैधानिक निर्देशों और मानदंडों को सख्ती से लागू करें, जो निर्माणाधीन परियोजना के कुल निर्मित क्षेत्र के अनुपात में हों।
सड़क निर्माण/चौड़ीकरण/मरम्मत परियोजनाओं और रखरखाव गतिविधियों में एंटी-स्मॉग गन, पानी के छिड़काव और धूल नियंत्रण उपायों का उपयोग तेज़ करें।
बायो-मास और नगर निगम के ठोस कचरे को खुले में जलाने पर लगी रोक को सख्ती से लागू करें। ओए 21/2014 में माननीय एनजीटी के 04.12.2014 और 28.04.2015 के आदेशों के अनुसार, उल्लंघन करने वालों पर अधिकतम अधिकतम पर्यावरण हर्जाना लगाएं।
लैंडफिल साइटों/डंपसाइटों पर आग लगने की कोई घटना न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी निगरानी रखें।
भारी ट्रैफिक वाले सभी चिह्नित कॉरिडोर और भीड़भाड़ वाले चौराहों पर ट्रैफिक के सुचारू प्रवाह के लिए ट्रैफिक पुलिस तैनात करें।
वाहनों के लिए पीयूसी (प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र) मानदंडों की कड़ी निगरानी और उन्हें सख्ती से लागू करें।
दिखाई देने वाले उत्सर्जन के प्रति कोई भी ढिलाई न बरतें – ऐसे वाहनों को ज़ब्त करके और/या उन पर अधिकतम जुर्माना लगाकर रोकें, जिनसे प्रदूषण दिखाई देता हो।
दिल्ली के लिए निर्धारित न किए गए ट्रक यातायात को ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से मोड़ने के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को सख्ती से लागू करें।
पुरानी हो चुकी डीज़ल/पेट्रोल गाड़ियों के संबंध में एनजीटी/माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को तथा मौजूदा कानूनों के अनुसार, सख्ती से लागू करें।
नियमों का पालन न करने वाली और अवैध औद्योगिक इकाइयों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक/कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
उद्योगों, ईंट भट्ठों और हॉट मिक्स प्लांट आदि में प्रदूषण नियंत्रण के सभी नियमों को सख्ती से लागू करें-उत्सर्जन के निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
यह सुनिश्चित करें कि एनसीआर में स्थित उद्योग (जिनमें ईंट भट्ठे और हॉट मिक्स प्लांट भी शामिल हैं) केवल स्वीकृत ईंधनों का ही उपयोग करें; किसी भी प्रकार के उल्लंघन की स्थिति में, उन्हें बंद करने की कार्रवाई करें।
थर्मल पावर प्लांटों में उत्सर्जन मानकों को सख्ती से लागू करें और इनका पालन न करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करें।
पटाखों पर प्रतिबंध के संबंध में माननीय न्यायालयों/अधिकरणों के आदेशों को सख्ती से लागू करें।
औद्योगिक और गैर-विकास क्षेत्रों से औद्योगिक कचरे को नियमित रूप से उठाने और उसका उचित निपटान सुनिश्चित करें।
बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) द्वारा एनसीआर में बिजली आपूर्ति में की जाने वाली कटौती को कम करें।
यह सुनिश्चित करें कि डीज़ल जनरेटर सेट का उपयोग बिजली आपूर्ति के नियमित स्रोत के रूप में न किया जाए।
होटलों, रेस्टोरेंटों और खुली जगहों पर खाने-पीने की दुकानों में तंदूरों में ईंधन के तौर पर कोयले/जलाऊ लकड़ी के इस्तेमाल पर लगे मौजूदा प्रतिबंध को सख्ती से लागू करें।
यह सुनिश्चित करें कि होटल, रेस्टोरेंट और खुली जगहों पर खाने-पीने की दुकानें केवल बिजली/गैस-आधारित/स्वच्छ ईंधन-आधारित उपकरणों का ही उपयोग करें।
सोशल मीडिया और बल्क एसएमएस आदि के माध्यम से सूचना का प्रसार किया जाये। मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल लोगों को प्रदूषण के स्तर और कंट्रोल रूम की संपर्क जानकारी के बारे में बताने के लिए किया जाएगा; साथ ही, ये ऐप्स लोगों को प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों/स्रोतों की रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को करने और सरकार द्वारा की जाने वाली कार्रवाई के बारे में जानकारी देने में भी सक्षम बनाएंगे।
प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए, 311 एपीपी, ‘ग्रीन दिल्ली एप’, ‘समीर एप’ और ऐसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली शिकायतों के समाधान के लिए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।
सड़कों पर ट्रैफिक कम करने के लिए, कार्यालयों को कर्मचारियों के लिए एक साथ आने-जाने की व्यवस्था शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करें।
बिजली की लगातार सप्लाई सुनिश्चित करें, ताकि बिजली के लिए दूसरे उपकरण (जैसे डीजल जनरेटर सेट वगैरह) इस्तेमाल करने की ज़रूरत न पड़े।
यातायात के सुचारू प्रवाह के लिए चौराहों/यातायात जाम वाले स्थानों पर यातायात की आवाजाही को व्यवस्थित करें और पर्याप्त कर्मियों को तैनात करें।
समाचार पत्रों/टीवी/रेडियो के माध्यम से लोगों को वायु प्रदूषण के स्तर तथा प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को कम करने के लिए ‘क्या करें और क्या न करें’ के बारे में सूचित करने हेतु अलर्ट जारी करें।
अतिरिक्त बेड़े को शामिल करके और सेवा की आवृत्ति बढ़ाकर सीएनजी/इलेक्ट्रिक बसों और मेट्रो सेवाओं के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बढ़ाएं। पीक-ऑवर (अत्यधिक भीड़ वाले समय) के अलावा अन्य समय में यात्रा करने को प्रोत्साहित करने के लिए अलग-अलग दरें लागू करें।
मौजूदा ग्रैप के चरण-I के तहत की जाने वाली कार्रवाइयों को एनसीआर भर में सभी संबंधित एजेंसियों द्वारा लागू, निगरानी और समीक्षा की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एक्यूआई का स्तर और खराब न हो। सभी कार्यान्वयन एजेंसियों को मौजूदा ग्रैप अनुसूची के तहत कड़ी निगरानी रखने और उपायों को तेज करने का निर्देश दिया गया है। नागरिकों से भी अनुरोध किया गया है कि वे ग्रैप चरण-I के तहत नागरिक चार्टर का सख्ती से पालन करें।
उप-समिति ने एनसीआर के नागरिकों से आगे यह भी आग्रह किया कि वे ग्रैप के कार्यान्वयन में सहयोग करें और मौजूदा ग्रैप के चरण-I के तहत ‘नागरिक चार्टर’ में उल्लिखित उपायों का पालन करें, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
अपने वाहनों के इंजन को दुरुस्त रखें।
वाहनों में टायरों का हवा का दबाव (टायर प्रेशर) सही बनाए रखें।
अपने वाहनों का पीयूसी प्रमाण पत्र हमेशा अपडेट रखें।
वाहन को बेवजह स्टार्ट न रखें, साथ ही रेड लाइट पर इंजन बंद कर दें।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हाइब्रिड वाहनों या ईवी (इलेक्ट्रिक वाहनों) को प्राथमिकता दें।
खुले स्थानों पर कचरा, कूड़ा-कचरा न फैलाएं और न ही उसका निपटान करें।
वायु प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की शिकायत ‘311 ऐप’, ‘ग्रीन दिल्ली ऐप’, ‘समीर ऐप’ आदि के माध्यम से करें।
अधिक से अधिक पेड़ लगाएं।
त्योहारों को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से मनाएं-पटाखों से बचें।
उप-समिति वायु गुणवत्ता की स्थिति पर लगातार कड़ी नज़र रखेगी और दिल्ली की वायु गुणवत्ता तथा आईएमडी/आईआईटीएम द्वारा जारी पूर्वानुमानों के आधार पर, आगे उचित निर्णय लेने के लिए समय-समय पर स्थिति की समीक्षा करेगी।

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