
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़:हरियाणा में जमीन संबंधी विवादों के त्वरित समाधान के लिए राजस्व लोक अदालतें लगाई जाएंगी जिनके माध्यम से उपायुक्त, एसडीएम व तहसीलदार विवादित पक्षों के बीच आपसी सहमति से विवादों का समयबद्ध ढंग से समाधान करवाएंगे। यह निर्देश मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा विकसित भारत-2047 के अंतर्गत तैयार किए गए 5 वर्षीय कार्यान्वयन रोडमैप और कार्य योजना की समीक्षा करते हुए कही। बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं एफसीआर डॉ.सुमिता मिश्रा ने बताया कि राजस्व संबंधी विवादों के शीघ्र समाधान के लिए विभाग द्वारा डिजिटल कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा ताकि विवादों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जा सके। इस पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भूमि विवादों के तीव्र समाधान के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत की तर्ज पर राजस्व लोक अदालत लगाई जाएं जिसमें संबंधित अधिकारी दोनों पक्षों की आपसी सहमति से विवादों का समाधान करवाएं। इसके लिए सभी जिलों में पटवारियों के माध्यम से लोगों को सूचित व जागरूक किया जाए और उपायुक्त, एसडीएम तथा तहसीलदार लक्ष्य निर्धारित कर भू-विवादों का समाधान करवाएं ताकि आमजन को राहत मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व विभाग में परंपरागत तरीकों से अलग हटकर नई ऑन लाइन सेवाएं शुरू की जाएं ताकि आमजन को सभी सरकारी सेवाएं पारदर्शी व सरल तरीके से मिल सकें। उन्होंने कहा कि सभी नव-नियुक्त पटवारियों के लिए लैपटॉप व टेबलेट की खरीद की जाए और हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएं ताकि सभी पटवारी डिजिटल माध्यम से सेवाएं दे सकें। पटवारियों को नई तकनीक व राजस्व कार्यों में पारंगत करने के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण केंद्र भी खोला जाए। नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश में सभी प्रकार के स्टाम्प की बिक्री ई-स्टाम्प के माध्यम से की जाए और इनकी बिक्री को ब्लॉक-चैन आधारित करने की दिशा में कार्य किया जाए ताकि स्टाम्प की खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने कहा कि उन व्यक्तियों के लिए फेसलेस रजिस्ट्रेशन की सुविधा शुरू की जाए जो कहीं बाहर दूसरे राज्यों या विदेश में रहते हैं और रजिस्ट्री के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकते हैं। मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश में पेपरलैस रजिस्ट्रेशन कार्य की जानकारी मांगने पर अधिकारियों ने बताया कि इसके तहत अब तक 4 लाख रजिस्ट्रेशन किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसी भी तहसील में 15 दिन से पुराना कोई भी रजिस्ट्रेशन आवेदन लंबित नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से राजस्व विभाग द्वारा अपने डाटा की स्टोरेज के लिए हारट्रोन के माध्यम से प्रदेश में अपडेटिड डाटा सेंटर स्थापित किया जा रहा है जिसके लिए टेंडर किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने शहरी संपत्ति के राजस्व रिकॉर्ड को प्रॉपर्टी आईडी के साथ लिंक करवाकर सुव्यवस्थित करवाने के भी निर्देश दिए। राजस्व अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में कृषि विभाग के साथ मिलकर भूमि अभिलेखों का 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण और इनकी जीयो-टैगिंग का कार्य किया जा रहा है। इसके तहत सभी लैंड पार्सल का यूनिक नंबर जनरेट किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी विभागों की सरकारी जमीनों को भी पोर्टल पर अपडेट किया जाए। आपदा प्रबंधन की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री को बताया गया कि आपदा एवं अग्नि तथा आपात सेवाओं के लिए अलग से विभाग बनाने का प्रस्ताव है। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में आपदा मित्र योजना 8 जिलों में चल रही है। इसका सभी 23 जिलों तक विस्तार किया जाएगा। इसके लिए आपदा मित्रों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। अग्निशमन विभाग के महानिदेशक शेखर विद्यार्थी ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में विदेशों की तर्ज पर एआई आधारित एकीकृत कमांड तथा नियंत्रण केंद्र की स्थापना की जाएगी। अग्निशमन कार्यों में रोबोट के इस्तेमाल की भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अग्निशमन विभाग का आधारभूत ढांचा मजबूत करते हुए इसका आधुनिकीकरण किया जाए और नवीनतम उपकरण भी खरीदे जाएं। मुख्यमंत्री ने अग्निशमन कार्यों में लगे कर्मचारियों का रिस्क कम करने तथा उनके कल्याण हेतु कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश दिए। ये रहे मौजूद: इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, मुख्यमंत्री के ओएसडी व स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव यशपाल यादव सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
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