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दिल्ली राजनीतिक राष्ट्रीय हाइलाइट्स

10 साल का एलडीएफ शासन ‘विफल अवसरों की कहानी’- प्रियंका गांधी


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली/कलपेट्टा:केरलम विधानसभा चुनाव प्रचार के अंतिम दिन कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा कि केरलम में पिछले दस वर्षों का एलडीएफ शासन “विफल अवसरों की कहानी” रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य पर भारी कर्ज, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार चरम पर है, जबकि वायनाड की समस्याओं के समाधान में केंद्र और राज्य सरकार, दोनों का सहयोग नहीं मिल रहा है।कलपेट्टा में आयोजित एक जनसभा में वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि जनप्रतिनिधि के तौर पर वह जनता की समस्याओं को हल करने की कोशिश करती हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी निराशा यह है कि जनहित के कार्यों में न तो राज्य की एलडीएफ सरकार सहयोग कर रही है और न ही केंद्र की मोदी सरकार। इसके कारण जनता की समस्याओं का समाधान करना अत्यंत कठिन हो गया है।

भाजपा-एलडीएफ के बीच अंदरूनी समझौते का जिक्र करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि जब विपक्षी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो उन पर केस दर्ज किए जाते हैं और छापेमारी होती है। लेकिन इतने भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद केरलम के मुख्यमंत्री के खिलाफ केंद्र सरकार की किसी भी एजेंसी ने कार्रवाई नहीं की है।  उन्होंने कहा कि सीपीएम के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार जनता के बजाय कॉरपोरेट हितों के लिए काम कर रही है।

कांग्रेस महासचिव ने स्थानीय समस्याओं को उठाते हुए राज्य सरकार की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए। जानवरों के बढ़ते हमलों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि लोग अपनी जान गंवा रहे हैं और फसल बर्बाद होने के कारण किसान तबाह हो रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मानव-पशु संघर्ष को सुलझाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने समस्या को सुलझाने के लिए यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के समाधानों को सामने रखा। उन्होंने बताया कि यूडीएफ चाहती है कि मुआवजे में 50 प्रतिशत की वृद्धि हो और फसल बीमा मिले। यूडीएफ की प्राथमिकताओं में दीर्घकालिक समाधान के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन करना भी है। जल्द चेतावनी देने वाली तकनीक के उपयोग के साथ सीएसआर फंडिंग बढ़ाने की कोशिश की भी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार होने पर यह कार्य तेजी से करने में मदद मिलेगी।प्रियंका गांधी ने चूरलमाला-मुंडक्कई भूस्खलन त्रासदी का उल्लेख करते हुए आगे कहा कि प्रभावितों के पुनर्वास के लिए जमीन हासिल करने और कागजी कार्रवाई के दौरान उन्हें हर कदम पर मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अंततः जब सरकार टाउनशिप का उद्घाटन करने के लिए तैयार हुई,  तो उन्हें अनुमति मिली और फिर कांग्रेस उद्घाटन कर पाई। प्रियंका गांधी ने स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज की कमी के कारण हाल ही में बाघ और हाथी के हमलों में घायल लोगों की रास्ते में ही मौत हो गई। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने केंद्र सरकार को कई बार पत्र लिखा है और जल्द ही एक क्रिटिकल केयर सेंटर शुरू करने का आश्वासन मिला है।सड़क और बुनियादी ढांचे को लेकर कांग्रेस महासचिव ने कहा कि उन्होंने पूझीथोड-पडिंजाराथारा सड़क का दौरा किया और स्थिति देखने के बाद राज्य सरकार को पत्र लिखा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसी के साथ उन्होंने बताया कि हाल ही में चुराम बाईपास परियोजना को लेकर उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर काम में तेजी लाने की मांग की। भाषण के अंत में उन्होंने जनता से यूडीएफ उम्मीदवारों को भारी मतों से जिताने का आह्वान किया और कई चुनावी वादे भी गिनाए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस वायनाड में एक वर्ल्ड क्लास ट्राइबल यूनिवर्सिटी खोलना चाहती है।

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