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दिल्ली राजनीतिक राष्ट्रीय हाइलाइट्स

कांग्रेस ने कहा- मोदी सरकार द्वारा 16 अप्रैल से बुलाया गया संसद का विशेष सत्र चुनाव आचार संहिता का खुला उल्लंघन।



अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली:कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने मोदी सरकार द्वारा 16 अप्रैल से बुलाए गए संसद के विशेष सत्र को आचार संहिता का खुला उल्लंघन करार देते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य तमिलनाडु व पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों को प्रभावित करना है।संसदीय सत्र में परिसीमन के लिए भी संविधान संशोधन लाने के समाचारों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए और इस प्रस्ताव पर व्यापक विचार-विमर्श की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी से दक्षिण भारत, उत्तर-पश्चिमी भारत और उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों सहित कई राज्यों को नुकसान होगा और उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा।

कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि महिला आरक्षण कानून में संशोधन का एकमात्र उद्देश्य विधानसभा चुनावों में लाभ लेना और प्रधानमंत्री द्वारा दोबारा इसका श्रेय बटोरना है। सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस का मानना है कि महिला आरक्षण 2024 के आम चुनाव से ही लागू होना चाहिए था। अगर सरकार का 2029 के चुनाव से इसे लागू होने का इरादा है तो कांग्रेस इसका समर्थन करती है। चुनाव को देखते हुए यह संसद सत्र 29 अप्रैल के बाद बुलाया जा सकता था। उन्होंने आगे कहा कि परिसीमन के प्रस्ताव पर जल्दबाजी नहीं, बल्कि व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में पास हुए महिला आरक्षण अधिनियम में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि परिसीमन और जनगणना के बाद ही इसे लागू किया जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने उस समय भी मांग की थी कि इसे 2024 के आम चुनावों से ही लागू किया जाए, लेकिन सरकार नहीं मानी थी।

जयराम रमेश ने कहा कि अब लगभग 30 महीने बाद जागने पर मोदी सरकार कह रही है कि जनगणना के नतीजे में तीन-चार साल लगेंगे, इसीलिए अभी संशोधन जरूरी है, ताकि 2029 के चुनाव से यह लागू हो जाए। सरकार के इस दावे को खारिज करते हुए उन्होंने रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त का वीडियो दिखाया, जिसमें उन्होंने बताया कि 2027 में ही जनगणना के आंकड़े उपलब्ध हो जाएंगे।जयराम रमेश ने बताया कि अगले सप्ताह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पार्टी सांसदों और अन्य विपक्षी दलों के साथ बैठक करेंगे, ताकि इस विशेष सत्र के लिए साझा रणनीति तैयार की जा सके।

जयराम रमेश ने खुलासा किया कि किरेन रिजिजू के पत्रों में केवल महिला आरक्षण कानून में संशोधन की बात थी, लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि सरकार इस विशेष सत्र में परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन को भी लाने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें अनौपचारिक तौर पर पता चला है कि सरकार संविधान के अनुच्छेद 81 और अनुच्छेद 82 में संशोधन करना चाहती है। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों में भले ही 50 प्रतिशत समानुपातिक वृद्धि होगी की बात कही जा रही है, लेकिन इससे केरलम, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा, असम और अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। उन्होंने उदाहरण दिया कि यदि केरलम की लोकसभा सीटें 20 से बढ़कर 30 और यूपी की सीटें 80 से बढ़कर 120 होती हैं, तो दोनों के बीच का अंतर 60 से बढ़कर 90 हो जाएगा। सरकार से पत्र व्यवहार का विस्तृत ब्यौरा देते हुए जयराम रमेश ने बताया कि 16 मार्च को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संशोधन पर चर्चा की इच्छा जताई थी। खरगे ने तुरंत जवाब देते हुए कहा कि विभिन्न दलों से अलग-अलग बातचीत करने के बजाय सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। 24 मार्च को सभी विपक्षी दलों ने भी सर्वसम्मति से पत्र लिखकर पांच राज्यों में चुनाव और आचार संहिता लागू होने के कारण 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। 26 मार्च को रिजिजू के फिर पत्र भेजने पर खरगे ने दोहराया कि सभी दलों को एक साथ बुलाया जाए और 29 अप्रैल के बाद बैठक आयोजित की जाए। जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने विपक्ष की मांगों को नजरअंदाज कर एकतरफा फैसला लिया और विशेष सत्र की घोषणा कर दी। सरकार असम और केरलम विधानसभा चुनाव में भी लाभ लेने के लिए विशेष सत्र 3 या 4 अप्रैल को बुलाना चाहती थी, लेकिन खतों का आदान-प्रदान कई दिन चलता रहा, इसलिए उसकी यह कोशिश नाकाम हो गई।कांग्रेस महासचिव ने यह भी याद दिलाया कि पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं को आरक्षण देने की नींव राजीव गांधी ने रखी थी, जिसके कारण आज देश में लगभग 15 लाख महिला प्रतिनिधि हैं। 30 लाख चुने हुए प्रतिनिधियों में से करीब 50 प्रतिशत महिलाएं हैं।

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