

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़:संसद में दीपेन्द्र हुड्डा के सवाल के जवाब से हरियाणा में नकारा बीजेपी सरकार का एक और प्रमाण मिला। लोकसभा में सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने दिल्ली-रोहतक-हिसार और दिल्ली-फरीदाबाद-पलवल जैसे महत्वपूर्ण RRTS कॉरिडोर विकसित करने की योजना, व्यवहार्यता अध्ययन की वर्तमान स्थिति, राज्य सरकारों के साथ परामर्श और ऐसे विस्तार के लिए विचाराधीन समय-सीमा का पूरा ब्यौरा माँगा तो हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री व मौजूदा केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जवाब दिया कि वर्तमान में हरियाणा सरकार द्वारा दिल्ली–रोहतक–हिसार और दिल्ली–फरीदाबाद–पलवल के बीच RRTS कनेक्टिविटी के लिए कोई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) केंद्र सरकार को प्रस्तुत नहीं की गई है।

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि इस जवाब से साबित होता है कि मौजूदा बीजेपी सरकार हरियाणा के हितों की रक्षा नहीं कर पा रही है, क्योंकि हरियाणा में विकास कार्य इनके एजेंडे में ही नहीं है। उन्होंने कहा कि हरियाणा को RRTS नेटवर्क से जोड़ने में जानबूझकर देरी की जा रही है। दिल्ली-रोहतक-हिसार और दिल्ली-फरीदाबाद-पलवल जैसे महत्वपूर्ण RRTS कॉरिडोर , जो हरियाणा के लाखों यात्रियों और उद्योगों के लिए जीवनरेखा साबित हो सकते थे, जो आज भी फाइलों में बंद हैं।

हैरानी की बात यह है कि इन परियोजनाओं के लिए आज तक हरियाणा सरकार ने केंद्र के पास कोई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तक जमा नहीं करवाई। जबकि, 5 अप्रैल, 2018 को सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने तत्कालीन केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी से मिलकर RRTS का काम पूरा कराने के साथ ही दिल्ली-रोहतक-हिसार और दिल्ली-फरीदाबाद-पलवल RRTS की भी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने की मांग को भी मंजूरी दिलायी थी। लेकिन, हरियाणा की नकारा सरकार के उदासीन रवैये के चलते यहाँ के शहरों को रैपिड रेल से जोड़ने का काम खटाई में पड़ा हुआ है।दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि 2010 में भूपेन्द्र हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान हरियाणा के लिए 5 हाईस्पीड रेल (RRTS) कॉरीडोर केंद्र सरकार को प्रस्तावित कर वर्ष 2012 में NCR प्लानिंग बोर्ड की कार्य योजना में शामिल कराए थे। इनमें दिल्ली–फरीदाबाद–बल्लभगढ़–पलवल, दिल्ली–बहादुरगढ़–रोहतक-हिसार, दिल्ली – सोनीपत – पानीपत, दिल्ली – गुरुग्राम – रेवाड़ी – अलवर और दिल्ली–गाजियाबाद–मेरठ शामिल था। लेकिन 2014 में सरकार बदलने के बाद मौजूदा हरियाणा सरकार ने इन सभी का काम ठंडे बस्ते में डाल दिया। वे लगातार इसका काम शुरू कराने की मांग करते रहे। वहीं, 82.15 किमी लंबा दिल्ली–गाजियाबाद–मेरठ RRTS कॉरिडोर आज पूरी तरह से चालू है। इससे साबित होता है कि हरियाणा में खुद को डबल इंजन सरकार बोलकर अपनी पीठ थपथपाने वाली बीजेपी सरकार पूरी तरह फेल सरकार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने पर हरियाणा के सभी RRTS कॉरीडोर का काम युद्द स्तर पर पूरा कराएंगे। दीपेन्द्र हुड्डा ने आगे बताया कि बीते 13 मार्च, 2023 को जब उन्होंने संसद में हरियाणा के रैपिड रेल कॉरीडोरों के काम का ब्योरा मांगा तो तत्कालीन शहरी कार्य राज्य मंत्री कौशल किशोर द्वारा ने कहा कि दिल्ली-सोनीपत-पानीपत, दिल्ली-गुड़गाँव-अलवर, दिल्ली-रोहतक-हिसार और दिल्ली-फरीदाबाद-पलवल गलियारों के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा न तो स्वीकृति दी गई न कोई राशि आवंटित की गई है। सांसद दीपेन्द्र ने कहा कि 2014 के बाद से हरियाणा हर मामले में विकास की पटरी से उतर गया और लगातार प्रदेश हितों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि ये सभी RRTS कॉरीडोर बन जाते तो इसका सीधा फायदा प्रदेश के लाखों युवाओं, रोजाना दिल्ली आने वाले कर्मचारियों, कामगारों को होता।
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