
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने एआई सम्मेलन के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर कई यूथ कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की निंदा की है। पार्टी का कहना है कि कार्यकर्ताओं ने पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया था, जैसा कि दुनिया के अन्य लोकतांत्रिक देशों में भी किया जाता है।
कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी सांसद शशिकांत सेंथिल, हरीश चंद्र मीना, कैप्टन विरियाटो फर्नांडिस, वरुण चौधरी, श्रेयस एम पटेल, अनिल यादव ने प्रदर्शन करने वाले यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के समर्थन में मोदी सरकार को पुरजोर तरीके से आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस का शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कोई व्यवधान नहीं, बल्कि देश के करोड़ों बेरोजगार युवाओं की आवाज थी। साथ ही यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस की कार्रवाई को युवाओं की आवाज दबाने की सुनियोजित साजिश करार दिया।सांसदों ने कहा कि यूथ कांग्रेस के सदस्यों ने बेरोजगारी और अन्य लंबित संकटों से जूझ रहे करोड़ों युवाओं की आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में युवाओं की समस्याओं पर गंभीर चर्चा के लिए कोई मंच उपलब्ध नहीं कराया गया। संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस की मांग पर मोदी सरकार ने चुप्पी और टालमटोल का रवैया अपनाया।

कांग्रेस सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश के डेटा को बेचने के लिए समझौता करने का आरोप लगाते हुए कहा कि युवाओं को अब सच्चाई दिखाई दे रही है। उन्होंने दावा किया कि एक समझौता कर चुके प्रधानमंत्री के नेतृत्व में युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं है।मोदी सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल ने कहा कि इस प्रदर्शन को लेकर चार युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, जिनमें आपराधिक साजिश जैसी गैर-जमानती धारा भी शामिल है। यह कार्रवाई केवल दिल्ली तक सीमित नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश में चार और उत्तर प्रदेश में तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। सेंथिल के मुताबिक, दिल्ली में यूथ कांग्रेस कार्यालय के बाहर 200-300 पुलिसकर्मी तैनात किए गए और हिमाचल सदन सहित कई स्थानों पर छापेमारी की गई। सेंथिल ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने तमाम सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच की, पोस्टर जब्त किए और प्रिंटिंग प्रेस पर छापे मारे, सिर्फ इसलिए क्योंकि ‘प्रधानमंत्री कॉम्प्रोमाइज़्ड हैं’ नारे से सरकार डर गई है और यह छानबीन करने की कोशिश की जा रही है कि इस नारे वाली टी-शर्ट्स कहां बनीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला स्तर के युवा कांग्रेस अध्यक्षों को भी इसी नारे के कारण हिरासत में लिया गया है और कुछ कार्यकर्ताओं के माता-पिता तक को तलब किया रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या दिल्ली पुलिस के पास टी-शर्ट और पोस्टरों की जांच से ज्यादा गंभीर काम नहीं है? साथ ही यह भी सवाल उठाया कि मोदी सरकार को इस नारे से इतना डर क्यों है?कांग्रेस सांसद ने कहा कि जिन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, उनमें लोक सेवक को ड्यूटी से रोकने का आरोप भी शामिल है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध वीडियो फुटेज में कहीं भी ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं पर गर्व जताते हुए कहा कि युवाओं ने लोक तांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। सेंथिल ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस मजबूती से अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी है। कांग्रेस सांसदों ने मांग रखी कि शांतिपूर्ण असहमति को अपराध या धमकी मानना तुरंत बंद किया जाए। किसी संगठन या कार्यकर्ताओं के परिवारों को निशाना बनाना बंद हो। हिरासत में लिए गए यूथ कांग्रेस के लोगों की गिरफ्तारी का आधार और एफआईआर का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। सरकार सीसीटीवी फुटेज जारी करे जिसके आधार पर गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। हिरासत में लिए गए सभी व्यक्तियों को तत्काल कानूनी पहुंच प्रदान की जाए। वहीं कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली पुलिस द्वारा यूथ कांग्रेस अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि सरकार भूल गई है कि विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र की आत्मा है, अपराध नहीं। यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने साहसपूर्वक यह उजागर किया कि प्रधानमंत्री ने किस तरह समझौता किया हुआ है। यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किया गया, बिना किसी प्रकार की हिंसा भड़काए। उन्होंने हिरासत को पूरी तरह से अवैध बताते हुए मांग की कि उन्हें तुरंत रिहा किया जाए और सभी आरोप हटाए जाएं।
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