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दिल्ली राजनीतिक राष्ट्रीय

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने आज आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
दिल्ली:भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवंराज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने आज शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा केकेंद्रीय कार्यालय में मीडिया को संबोधित किया। डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने पश्चिम बंगाल सरकार के बजट पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जहां एक ओर देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में विकास, पारदर्शिता और समावेशी प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, वहीं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार का बजट तुष्टीकरण औरअसंतुलित प्राथमिकताओं को दर्शाता है। पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने बजट मेंमाइनॉरिटी अफेयर्स और मदरसों के लिए ₹5713 करोड़ का आवंटनकिया गया है, जबकि इंडस्ट्री और कॉमर्स के लिए मात्र ₹1400करोड़ रखे हैं। ममता बनर्जी ने मां, माटी,मानुष की जगह मौलवी, मुअज्जिन और मदरसा के लिएपूरी ममता का खजाना लुटा दिया है। डॉ.सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि देश आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास की नई ऊंचाइयों की ओर आगे बढ़ रहा है,जिसका स्पष्ट प्रतिबिंब हाल ही मेंप्रस्तुत केंद्रीय बजट में देखने को मिला है। वहीं दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के नेतृत्व में राज्यतुष्टीकरण की गहरी खाई में लगातार गिरता चला जा रहा है, जिसकीअत्यंत विद्रूप झलक पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में दिखाई पड़ती है।

माइनॉरिटी अफेयर्स और मदरसों के लिए ₹5713 करोड़ का आवंटनकिया गया है,जबकि इंडस्ट्री और कॉमर्स के लिए मात्र ₹1400करोड़ रखे गए हैं। यानी उद्योग और वाणिज्य के लिए केवल ₹1400करोड़ जबकि माइनॉरिटी मदरसों के लिए ₹5713 करोड़।इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के लिए ₹217 करोड़, माइनॉरिटी मदरसों के लिए ₹5700 करोड़। साइंस वरिसर्च के लिए केवल ₹82 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यहवही पश्चिम बंगाल की भूमि है जहां से सत्येन्द्र नाथ बोस, जगदीश चन्द्र बोस और अमल कुमार राय चौधरी जैसे महान वैज्ञानिक निकले, लेकिन आज वहां साइंस एंड टेक्नोलॉजी के लिए सिर्फ ₹82 करोड़ और माइनॉरिटी व मदरसों के लिए ₹5113 करोड़ काप्रावधान किया गया है।डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल के उत्तरी औरपश्चिमी भाग के विकास के लिए क्रमशः ₹920 करोड़ और ₹810 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मदरसों को दिया जाए, इसमें कोई आपत्ति की बात नहीं है, लेकिन एक तरफ यह कहा जाता है कि माइनॉरिटी कम्युनिटी में शिक्षा की स्थिति खराब है और दूसरी तरफ केवल मुअज्जिनों को,जिन्हें बहुत से लोग नहीं जानते कि वेवही होते हैं जो उस समय अजान लगाते हैं और लाउडस्पीकर पर जाते हैं, उनकी तनख्वाह दी जाती है। इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि ममता बनर्जी द्वाराप्रस्तुत बजट में विकास के प्रति पूरी तरह निर्ममता दिखाई देती है और मां, माटी, मानुष की जगह मौलवी और मदरसा को ममता दी गईहै। मां, माटी, मानुष की जगह मौलवी, मुअज्जिन और मदरसा के लिए पूरी ममता का खजाना लुटा दिया गया है। इसके लिए पश्चिम बंगाल सरकार को दोष देना सही नहीं होगा, क्योंकिउनके मंसूबे पूरी तरह साफ हो चुके हैं। ममता बनर्जी ने कुछ दिन पहले कहा था कि 30प्रतिशत की कम्युनिटी है और वो रोड रेज कर सकती हैं। ममता बनर्जी सेसवाल यह है कि यह प्यार से दिया गया है या डर के कारण, क्योंकिउन्होंने स्वयं कहा है कि रोड रेज हो सकती है?डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि वर्ष 2021 में तृणमूल कांग्रेस के मुख्य रणनीतिकार  प्रशांतकिशोर ने बयान दिया था कि उनकी गिनती 30 प्रतिशत से शुरूहोती है। जिसकी जितनी संख्या भारी,उसकी उतनी भागीदारी केसिद्धांत पर बजट में किसने किसकी बाजी मारी? ममता बनर्जी सेएक प्रश्न हैं, पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेवभट्टाचार्जी ने कहा था कि पश्चिम बंगाल के कुछ मदरसे, जिन्हेंमान्यता प्राप्त मदरसा बोर्ड से समर्थन मिलता है, देश विरोधीगतिविधियों के केंद्र हैं। यह बात कोई और नहीं बल्कि ममता बनर्जी से पहले मुख्यमंत्री रहे बुद्धदेव भट्टाचार्य ने कही थी। 9 सितंबर 2006 को एक बैठक में आंतरिक सुरक्षा के संदर्भ में बुद्धदेव भट्टाचार्य जी नेकहा था कि पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा प्रायोजित अनेक मदरसे पश्चिम बंगाल में कामकर रहे हैं और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलग्न हैं, जिनमें से कई बॉर्डर एरिया में सक्रिय हैं। ममता बनर्जी जवाब दें कि जिन मदरसों के एकबड़े हिस्से को पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने आईएसआई प्रायोजित बतायाथा, यदि उनकी सरकार उन्हें पोषित कर रही है, तो क्या यह राष्ट्र की सुरक्षा और सद्भावना की कीमत पर राजनीति करना नहींहै?भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि एक तरफमुस्लिम समाज की 87 में से 78 जातियोंको ओबीसी का दर्जा देकर पहले उन पर संवैधानिक ममता उड़ेली गई और अब वित्तीय ममता भीउढेली जा रही है, यह जानते हुए भी कि इसमें से एक बहुत बड़ाहिस्सा किन्हें जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि मौलवी और मुअज्जिन को जो पैसामिलेगा, उसके लिए किसी प्रकार का रेजिडेंशियल या रेजिडेंसीप्रूफ भी नहीं मांगा जा रहा है। इससे यह साफ हो जाता है कि इंडी गठबंधन,जो अपने जिस मूल विचार पर चल रहा है, वह तमिलनाडु सेलेकर पश्चिम बंगाल तक अत्यंत विद्रूप और विकृत स्वरूप में दिखाई पड़ रहा है। इसकेलिए केवल तृणमूल कांग्रेस ही दोषी नहीं है, बल्कि माइनॉरिटी कम्युनिटी की एक ऐसी ताकत भी है, जो यह दर्शाती है कि वे कुछ भी करेंगे और सरकारों व सेक्युलर दलों को झुकाने में सफल होंगे। एक पंक्ति मेंकहें तो उन्होंने अपनी ताकत से यह दिखा दिया है कि ‘झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए, जबकि हिंदू समाज के लिए ‘हंसती है दुनिया, लड़ाने वाला चाहिए’। उत्तर-दक्षिण पर लड़ाना है, राज्य पर लड़ाना,भाषा के नाम पर लड़ाइयां कराई जा रही हैं और जाति के नाम पर लड़ाया जा रहा है। ममता बनर्जी बताएं कि जब उन्होंने ₹5700 करोड़ मौलवी और मदरसा को दिए, तो मां, माटी,मानुष के साथ ऐसा अन्याय क्यों किया?

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