अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद: 39 वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में मंगलवार का दिन कला और संस्कृति के नाम रहा। मेले के मुख्य आकर्षण बड़ी चौपाल पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने न केवल भारतीय विरासत की झलक दिखाई, बल्कि विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियों ने अंतरराष्ट्रीय मैत्री का संदेश भी दिया। एक तरफ जहां भारत के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने अपने पारंपरिक लोक नृत्यों के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं विदेशी कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों से दर्शक थिरक उठे।

मंगलवार को मुख्य चौपाल पर मेघालय, कज़ाकिस्तान, टोगो, सूडान, जिंबाब्वे, जाम्बिया, इथोपिया, मिस्र, नाइजीरिया, इराक, वियतनाम सहित उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न लोक कलाकारों द्वारा अपनी प्रस्तुतियां दी गई। जिन पर पर्यटक थिरकते नजर आए। चौपाल पर उमड़ी भीड़ कलाकारों का उत्साहवर्धन करती नजर आई। सेल्फी और वीडियो के माध्यम से लोग इन यादगार पलों को सहेजते दिखे।इस वर्ष मेला का स्वरूप आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना पर आधारित है। जहां एक ओर शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक कार्यक्रम युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम कर रहे हैं। सूरजकुंड मेला केवल व्यापार का केंद्र नहीं है, बल्कि यह विश्व की विविध संस्कृतियों के मिलन का एक मंच है।
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