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वीडियो सुने: दिल्ली पुलिस आखिर चुपचाप क्यों हैं- कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस प्रवक्ता श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सबको हमारा नमस्कार और एक अत्यंत ज्वलंत मुद्दे पर आपके समक्ष आए हैं और आशा करते हैं कि इसको अहमियत से उठाया जाएगा। 72 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं, दिल्ली के दिलशाद गार्डन में एकत्रित लोगों की एक भीड़ के सामने भारतीय जनता पार्टी के चुने हुए सांसद प्रवेश वर्मा ने बहुत नफ़रती भाषण दिया है। उन्होंने कहा – “अगर कुछ लोगों की तबीयत और दिमाग सही करना है, तो उनका पूर्ण बहिष्कार कर दो, तभी वो ठिकाने पर आएंगे। अगर तबीयत और दिमाग ठीक करना है, तो उनकी रेहड़ियां और उनकी दुकानों से सामान मत खरीदो”। ऐसा कहा और उसके बाद उस भीड़ से नारे लगवाए और तालियाँ पिटवाईं, ये भाजपा के चुने हुए सांसद प्रवेश वर्मा जी का कुत्सित कार्य देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुआ हैं।

एक और भाजपा के शिरोमणि हैं, गाजियाबाद लोनी से विधायक हैं, नंद किशोर गुर्जर, वो तो दो हाथ आगे निकल गए। उन्होंने मारने काटने की बात तक कर डाली और अखलाक जिसकी लिंचिंग में हत्या की गई थी, उसको उन्होंने सूअर भी बता डाला। ये चुने हुए विधायक हैं, भाजपा के उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के लोनी के। उस रैली में और भी लोगों ने कहा चुन-चुनकर मुसलमानों को मारना है।चुन-चुनकर मारना, पूर्ण बहिष्कार, दिमाग ठीक करना, तबीयत दुरुस्त कर देना, अगर ये हेट स्पीच, नफरती भाषण नहीं है, तो नफरती भाषण क्या है, पहला सवाल तो ये बनता है। 72 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं और इन लोगों से पहली बार मासूमियत मे गलती नहीं हुई है, ये सब रिपीट ऑफेंडर्स हैं। सबको पता है कि दिल्ली दंगे के दौरान प्रवेश वर्मा ने कितनी भड़काऊ बातें, कितनी कुत्सित बातें बार-बार लगातार की थी, लेकिन एक रत्ती भर फर्क नहीं पड़ा उनको, उसके बाद।

नंद किशोर गुर्जर जिस तरह की बातें हमेशा से करते आए हैं, वो अपने आप में शर्मसार करती हैं, लेकिन जो उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान हाथापाई और दंगे भड़काने की कोशिश की थी, वो कैमरे में कैद है, किसी से छुपा नहीं था। ये अलग बात है कि मोदी जी के शासन में उनका कुछ हुआ नहीं, बाल भी बांका नहीं हुआ। अब कुछ सवाल अपने आप मन में कौंधते हैं कि आखिर ऐसा ये लोग क्यों करते हैं? चुने हुए सांसद, चुने हुए विधायक इस तरह की बातें करने को क्यों मजबूर हैं? वो क्यों ऐसा करते हैं? क्या उनको नहीं पता कि ऐसी बातों से हिंसा भड़कती है, दंगे भड़कते हैं, उन्माद फैलता है, नफरत फैलती है? क्या वो हेट स्पीच नहीं समझते- भलीभांति समझते हैं और इसलिए बोलते हैं। उनको पता है कि इस तरह के भाषण देकर, इस तरह की भड़काऊ बातें करके, इस तरह की नफ़रत फैलाकर आपका मार्ग और प्रशस्त हो जाता है भाजपा में। जो जितनी नफ़रत फैलाएगा, जो कुछ समुदाए को, कुछ सम्प्रदायों को जितनी ज्यादा गाली देगा, वो उतना आगे जाएगा।

इन सबके आराध्य, इन सबके रोल मॉडल अनुराग ठाकुर जैसे लोग हैं, जो मंच से खड़े होकर एक सम्प्रदाय के खिलाफ़ गाली देते हैं, नारे लगवाते हैं और फिर मोदी जी उनको अपनी विशेष अनुकंपा से कैबिनेट मंत्री बना देते हैं। पूरी सरकार भरी पड़ी है, ऐसे लोगों से, फिर ये तो ऊपर से शुरु होता है न। ये तो मोदी जी और अमित शाह जी शुरु करते हैं। जब कपड़ों से लोगों का पता लगा लिया जाता है, जब विकास की जगह, श्मशान, कब्रिस्तान की बात होती है, जब 80/20 की बात होती है, तो ये तो ऊपर से शुरु होता है। निर्देश ऊपर से आ रहा है, चर्चा और भाषा ये इस्तेमाल करनी है। सारा विकास और सारा काम धरा रह जाता है, क्योंकि ठन-ठन गोपाल, वहाँ कुछ है नहीं दिखाने को, इसी का सहारा रह जाता है। लेकिन एजेंसीज से भी सवाल बनते हैं, 72 घंटे से ऊपर हो गए, नंद किशोर गुर्जर और प्रवेश वर्मा, ये चुने हुए प्रतिनिधि हैं, देश के। दिल्ली पुलिस क्या कर रही है? दिल्ली पुलिस वहाँ पर मौजूद थी, जिस रैली में ये सब कहा गया। दिल्ली पुलिस के कर्मी वहाँ पर तैनात थे। दिल्ली पुलिस किस मुहूर्त का इंतजार कर रही है? कौन सा मुहूर्त देखकर इनके खिलाफ एफआईआर और गिरफ्तारी होगी, ये पहली चीज है?

दूसरी चीज, मुझे थोड़ी सी शिकायत मीडिया से भी है और होनी लाजमी भी है, जो नोएडा के वॉरियर एंकरगण हैं, जो चरण चुंबक हैं, जो इस देश में अशांति होने पर स्टूडियो में दंगा मचा देते हैं, वो चुप क्यों बैठे हैं? एक चुना हुआ एमपी और एमएलए चुन-चुनकर लोगों को मारने की और पूर्ण बहिष्कार की बात कर रहा है, क्यों इतना सुई पटक सन्नाटा है, इन चरण चुंबकों की महफिल में? मोदी जी और शाह जी कुछ बोलेंगे नहीं, लेकिन आपकी चुप्पी सारा देश और सारा विश्व देख रहा है। आपकी चुप्पी का नतीजा एक बार हिंदुस्तान ने झेला है, जब आपकी बददिमाग प्रवक्ता के मुंह से निकले शब्दों के लिए देश को माफी मांगनी पड़ी थी और अंततोगत्वा आपने उसे दूध की मक्खी की तरह फ्रिंज एलीमेंट कहकर बाहर निकाल दिया था। आज भी नहीं बोलिएगा। आज भी कुछ नहीं कहिएगा। आज भी ऐसे नफरतियों को पनपने दीजिएगा और इनको अपना पोस्टर बॉय बनाकर घुमाइएगा। ये सवाल मोदी जी और अमित शाह जी से है।

उससे बड़ा सवाल छोटे भाई से भी है। मोदी जी के छोटे भाई, छोटा रीचार्ज, अरविंद केजरीवाल जी। अरविंद केजरीवाल जी दिल्ली में चुने हुए मुख्यमंत्री हैं और जब दिल्ली में बुल्डोजर चलता है, जब दिल्ली में दंगे होते हैं, जब जंतर-मंतर पर काटो-काटो का नारा लगाया जाता है, या अब जब दिल्ली में दिल्ली के सांसद एक पर्टिकुलर समुदाय के खिलाफ जहर उगल रहे हैं, तो अरविंद केजरीवाल जी मौन व्रत धारण किए हुए हैं। एक शब्द नहीं बोलते हैं और इसीलिए हम कहते हैं कि ये संघ का मोदी जी का छोटा रीचार्ज है और अगर नहीं है, तो हिम्मत करिए और साहस करिए, आप दिल्ली के चुने हुए मुख्यमंत्री हैं, यहाँ पर कोई दंगे भड़काने का, नफरत फैलाने का काम कर रहा है, कैसे नींद आती है रात को आपको बिना कुछ बोले हुए? आप क्या कहिएगा- मेरे अधीन तो दिल्ली पुलिस है नहीं। दिल्ली पुलिस आपके अधीन नहीं है, लेकिन आपकी जुबान तो आपके अधीन है, कुछ कहने की हिम्मत तो आपके अधीन है, कुछ करने का साहस तो आपके अधीन है।

अंततोगत्वा मैं कोर्ट्स का हवाला जरुर देना चाहूंगी, क्योंकि कल और क्योंकि कोर्ट्स ने एक ऑब्जर्वेशन दिया था कि अगर हंसकर कही जाए नफरती बात, तो वो हेट स्पीच नहीं होती है, शायद उसी का हवाला दिया जा रहा है, मुझे नहीं पता, लेकिन कल सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, श्री यू.यू. ललित जी ने एक बयान दिया था और उसमें उन्होंने कहा था कि “Hate speeches sullying nation’s atmosphere: The remarks came from Chief Justice of India U U Lalit while hearing the plea alleging that hate speeches were being made against the minority community “to win the majority Hindu votes, to grab power at all posts, to commit genocide and make India a Hindu Rashtra before 2024 elections”. ये ऐलिगेशन था और उन्होंने हेट स्पीच के खिलाफ ऑब्जर्वेशन दिया है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ही संज्ञान ले ले, सरकार कुंभकरण की नींद सो रही है। दिल्ली पुलिस वो अपने आका के खिलाफ जाएगी नहीं। मीडिया, जिसको इस पर बोलना चाहिए, वो स्टूडियोज़ साइलेंस मेंटेन किए हुए है, सुई पटक सन्नाटा है। तो कोर्टस को ही संज्ञान लेना चाहिए और अपनी बात खत्म करने से पहले मैं कल जो सिटीजन्स कमेटी रिपोर्ट दिल्ली के दंगों पर आई है, जिसके मेम्बर्स, जस्टिस लोकुर, जस्टिस शाह, जस्टिस सोढ़ी, जस्टिस रंजना प्रकाश और फॉर्मर होम सेक्रेटरी श्री जीके पिल्लई जी हैं। उन्होंने जिस तरह की बातें देश के मीडिया चैनलों के लिए कहीं हैं, जिस तरह की बात उन्होंने कही हैं, दिल्ली दंगो में कैसे जो वाकई में अपराधी थे, वो बिल्कुल मुक्त आजाद घूमते रहे, उनके खिलाफ कुछ नहीं हुआ, ये अपने आप में आईना दिखाता है सरकार को और ये आईना दिखाना चाहिए एजेंसीज को, पुलिस और न्यायालय दोनों को।

हमारी 5 ही मांगें हैं और वो मांगे बहुत प्रबल हैं-

1.जिस तरह की बात सुनने में आई है, जिस तरह का वक्तव्य दिया गया है, सबसे पहले तो 72 घंटे हो जाने के बावजूद पुलिस ने अभी तक एक्शन नहीं लिया, पुलिस तुरंत ऐसे नफरतियों के खिलाफ कार्रवाई करे, जिनको लगता है कि वो कानून अपने हाथ में लेकर कुछ भी कह जाएंगे और उनका बाल भी बांका नहीं हो सकता।

2.कोर्ट इस मामले का संज्ञान लें, क्योंकि सरकार तो चुप है और कोर्ट्स क्योंकि बार-बार हेट स्पीच का जिक्र कर रहे हैं, एक दिशानिर्देश दें, इस बात का संज्ञान लें, स्वतः।

3.प्रधानमंत्री जी से तो मैं ये जरुर पूछना चाहूँगी कि आप क्यों चुप हैं? आप कब तक चुप रहिएगा? कब तक ये देश नफरत की आग में झोंका जाता रहेगा? क्योंकि ये बात अब बढ़ रही है। अब ये बात उन देशों में पहुंच रही है, जिनके सामने आपको पहले माफी मांगकर नूपुर शर्मा को निकाल फेंकना पड़ा था। तो उस चीज का इंतजार करिएगा कि बाकी जो विश्व है, वो आपके ऊपर प्रेशर बनाए, तब आप एक्ट करिएगा, या आप इस देश के चुने हुए प्रधानमंत्री हैं, ये आपका कर्तव्य है कि कानून व्यवस्था सुचारू रूप से चले और हर सिटीजन, हर नागरिक अपने आपको महफूज और सुरक्षित महसूस करे। 2002 के बाद एक बार फिर से लगातार आपको आपका राजधर्म याद दिलाया जाता रहा है, तो कुछ तो बोलिए।

4.उससे ज्यादा सवाल मेरा अरविंद केजरीवाल जी से है। स्कूल से, शिक्षा से, स्वास्थ्य से किसी को कोई दिक्कत नहीं है, ये बातें सार्वजनिक जीवन में होनी चाहिए। लेकिन आपका जो पाखंड का पर्दा था, वो बार-बार उतर जाता है और अपना पाखंड छोड़िए दिल्ली के चुने हुए मुख्यमंत्री हैं, जरुर आपका जन्म जन्माष्टमी के दिन हुआ होगा और श्री कृष्ण जी ने आपको एक मिशन से भेजा होगा, वो मिशन अपने दिल्ली के लोगों को सुरक्षित रखने का भी है। आप जिस भी चश्मे से देखना चाहिएगा, चाहे धर्म के चश्मे से, चाहे लोकंतत्र के चश्मे से, लोगों को सुरक्षित रखना, उनके बारे में बात करना, अगर कोई गलत आपके लोगों के साथ कर रहा है, उसके खिलाफ उसके प्रतिकार में बोलना बहुत जरुरी है। कब तक छोटे रीचार्ज बनकर अपनी दुकान चलाते रहिएगा?

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