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खोरी गांव से बेदखल परिवारों को सुप्रीम कोर्ट से ज्यादा राहत नहीं मिली

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली:मजदूर आवास संघर्ष समिति के राष्ट्रीय कन्वीनर निर्मल गोराना ने बताया कि खोरी गांव से बेदखल हजारों परिवार पुनर्वास की आस में सुप्रीमकोर्ट की ओर अपनी निगाहे गाड़ कर बेसब्री से आवास मिलने का इंतजार कर रहे थे किंतु आज सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्वास के मुद्दे पर अपना अंतिम निर्णय देते हुए बताया कि खोरी गांव से बेदखल हुए परिवारों को अगर पुनर्वास चाहिए तो उन्हें आज 15 नवंबर 2021 तक नगर निगम फरीदाबाद को आवेदन प्रस्तुत करना था जिसकी आज अंतिम तारीख है जिसे आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है और साथ ही कोर्ट ने यह फैसला दिया कि बेदखल परिवारों के पास पूर्व में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दिए गए आदेश के अनुसार इन तीनो दस्तावेजों का होना अनिवार्य है तभी वह पुनर्वास के अधिकारी होंगे जिसमें से पहला दस्तावेज राशन कार्ड दूसरा दस्तावेज परिवार पहचान कार्ड एवं तीसरा दस्तावेज बिजली बिल था।

लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में हो रही इस मामले की सुनवाई के दौरान आधार कार्ड को भी आवश्यक दस्तावेज के रूप में चर्चा का विषय बनाया गया किंतु उसका कोई परिणाम नहीं निकला सुप्रीम कोर्ट के अनुसार आधार कार्ड को केवल आईडी प्रूफ के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है किंतु एड्रेस प्रूफ के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं हुई अतः यदि किसी बेदखल परिवार के पास आधार कार्ड है तो वह इस आधार कार्ड का इस्तेमाल अपने एड्रेस प्रूफ प्रूफ के रूप में नहीं कर सकता है और ना ही इस आधार पर को बेदखल परिवार पुनर्वास का अधिकारी होगा। आधार कार्ड की चर्चा मात्र एक ढकोसला साबित हुई। मजदूर आवाज संघर्ष समिति खोरी गांव की सदस्य सरकार ने बताया कि सरकार ने बेदखल परिवारों के प्रति बेपरवाही और लापरवाही की किंतु सुप्रीम कोर्ट ने भी बेदखल परिवारों के प्रति अपनी संवेदनशीलता नहीं दिखाई। खोरी गांव निवासी सपना देवी ने बताया कि पुनर्वास के मुद्दे पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला दे दिया है किंतु पीएलपीए की जमीन का मामला आज भी सुप्रीम कोर्ट में सुना गया पर इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ इसकी अगली तारीख 26 नवंबर रखी गई है इसलिए हम सभी खोरी वासी आगामी 26 नवंबर के फैसले को सुनेंगे एंव इंतजार करेंगे क्योंकि यदि पीएलपीए की जमीन फॉरेस्ट की जमीन नहीं है तो फिर हमें खोरी से बेदखल किस आधार पर किया गया। 

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