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प्रियंका गांधी ने आज आयोजित जनसभा में महंगाई को लेकर मोदी और योगी को जमकर कोसा -देखिए वीडियो में

अजीत सिन्हा / नई दिल्ली
नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भूपेश बघेल,अजय कुमार लल्लू, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, प्रदीप जैन ‘आदित्य’, बृज लाल खाबरी, राकेश सचान,जयवंत सिंह,आलोक चतुर्वेदी, विक्रम सिंह,नीरज दीक्षित,विजेंद्र व्यास, सोमन भाई, जगदीश नारायण शर्मा, सुरेन्द्र सिंह सरसेला, तुलसीदास लोधी जी, यहाँ पर उपस्थित सारे नेतागण, कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी, सचिव, महासचिव आप सबका इस सभा में स्वागत इसके साथ-साथ बुंदेलखंड के सब भईया, बहन को राम-राम और सब मोड़ियन को बहुत-बहुत प्यार।

हमार बड़े भाग कि हमको आल्हा ऊदल, रानी लक्ष्मीबाई, झलकारी बाई, महाराजा छत्रसाल, दीवान हरदौल जू राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त, स्वामी ब्रह्मानंद महाराज की महान और वीरों की धरती पर आवे को मौका मिलो। महोबा वालों, यहाँ आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है और एक तरह से थोड़ा दुख भी है। दो हफ्ते पहले मैं आप ही के बुंदेलखंड मे ललित पुर गई थी। मैंने सुना कि दो किसानों ने आत्महत्या की है और दो किसानों की मृत्यु खाद की लाइन में खड़े-खड़े हो गई, तो मैंने सोचा कि मुझे जाना चाहिए, मिलना चाहिए औऱ जो मैंने देखा, जो मैंने सुना, उससे मुझे, खासतौर पर बुंदेलखंड के लोगों के लिए बहुत दुख हुआ। जब मैं वहाँ पहुँची तो एक छोटे से घर में उन किसानों के परिवार के सदस्य बैठे थे। मैंने उनकी विधवाओं से बात की, उनकी बेटियों से बात की, उनके भाईयों से बात की। पता चला कि सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा था। अचानक दो-तीन दिनों के लिए अच्छी तरह से बारिश हुई। जब बारिश हुई तो बहुत खुश हो गए थे। उन्होंने सोचा कि अगर अच्छी खाद डाल दूँ, तो फसल अच्छी तरह से उग जाएगी, तो खाद वितरण केन्द्र में गए, वहाँ पर उन्होंने लाइन लगी थी, लाइन में खड़े हो गए। 2-3 दिन लाइन में खड़े रहे। घर नहीं आए। कुछ खाने को नहीं मिल रहा था, जो भी आसपास मिल रहा था, वो मिल गया, पीने को पानी नहीं मिला, लाइन में खड़े-खड़े उनकी मृत्यु हो गई। जो दो किसानों ने आत्महत्या की, वे भी लाइन में खड़े-खड़े मायूस हो गए। खाद खत्म हो गई, उनकी बारी नहीं आई। ढाई लाख-तीन लाख का कर्ज था। घर आए, कुछ कहा नहीं किसी से, चुपचाप से चले गए दूसरे कमरे में आत्महत्या कर ली। तो जब मैं परिवारों से बात कर रही थी, तो पता चला कि तमाम किसान इस पूरे बुंदेलखंड में कर्ज में डूब रहे हैं। खाद का वितरण सही ढंग से नहीं होता, बल्कि उसके बाद जब हम खाद के वितरण केन्द्र में गए, तो वो सरकारी केन्द्र बंद पड़ा था। दो प्राइवेट केन्द्र खुले थे, उसमें लाइनें लम्बी-लम्बी लगी थीं। खाद नहीं मिल रही है, मटर, चना, गेहूँ का दाम नहीं मिलता। सिंचाई के लिए पानी नहीं है।

भूपेश बघेल जी ने कहा कि आवारा पशु की जो समस्या है, वो सिर्फ उत्तर प्रदेश में नहीं है, सिर्फ बुंदेलखंड में नहीं है, छत्तीसगढ़ में भी थी, लेकिन जब सरकार की नीयत ठीक थी, इनकी सरकार ने एक ऐसी व्यवस्था बनाई, ऐसी योजना बनाई कि अब वहाँ पर ये समस्या नहीं है। वो कह रहे हैं कि गोबर को भी खरीदते हैं, किसलिए- ताकि ये समस्या दूर हो। ताकि आवारा पशु न घूमें। यहाँ उत्तर प्रदेश की सरकार तो ये मानती और पहचानती भी नहीं है कि ये बड़ी समस्या है। हम 2019 के चुनाव में जब यहाँ आए थे, तो मुझे याद है कि यही समस्या सब किसानों ने बताई। आज दो साल हो गए हैं, तीन साल होने को जा रहे हैं, अभी भी इस समस्या को हल करने के लिए कुछ नहीं किया गया है। 1,500 किसानों ने आत्महत्या की है, सिर्फ बुंदेलखंड में।आप सब जानते हैं कि महंगाई किस तरह से बढ़ रही है। डीजल और पेट्रोल का क्या दाम हो चुका है। यहाँ से बहुत पलायन होता है और पलायन इसलिए होता है क्योंकि रोजगार बुंदेलखंड में नहीं मिलता। आपने देखा कोरोना के समय में जहाँ-जहाँ बड़े-बड़े शहरों में बुंदेलखंड के भाई-बहन थे, उनको किस तरह से घर आना पड़ा। पूरा परिवार पैदल चल रहा है, नंगे पांव चल रहा है, खाने को नहीं है, कोई मदद नहीं है सरकार से। जब कांग्रेस पार्टी ने कहा कि हम बसें देंगे, तो सरकार ने बसें ली नहीं हमसे और अब जब इनकी बड़ी-बड़ी मीटिंग होती हैं, तो बसों की लाइन लग जाती है कि बस भरो, लाइए, मीटिंग में दिखे कि कितनी भीड़ आई है हमारी मीटिंग में। लेकिन जब जरुरत थी आपको, जब आपके बेटे, आपके भाई-बहन, दिल्ली से, अन्य शहरों से पैदल यहाँ आ रहे थे, क्योंकि लॉकडाउन अचानक किया गया, बगैर उनके बारे में सोचे, तब ये सरकार कहाँ थी, तब इनकी बसें कहाँ थी? आपको मालूम है कि नहीं कि आज देश में किसान की आय 27 रुपए प्रति दिन है। केवल 27 रुपए!
जब मैं ललितपुर गई उसी के दो-तीन दिन बाद प्रधानमंत्री जी ने झांसी में एक बड़ी रैली की, शायद यहाँ महोबा भी आए, अपने जहाज में आए, झांसी। आपको मालूम है कि वो जहाज कितने रुपए का है- 8 हजार करोड़ रुपए का वो जहाज, वो एक जहाज प्रधानमंत्री जी का है। उस जहाज में वो यहाँ आते हैं, भाषण देने के लिए, लेकिन आपकी आय नहीं बढ़ा पाते। उस जहाज में आते हैं, लेकिन किसानों का कर्ज माफ नहीं कर सकते।आपको मालूम है कि प्रधानमंत्री जी के बड़े-बड़े उद्योगपति मित्रों की आय कितनी है- प्रतिदिन 10 हजार करोड़ रुपए कमाते हैं और आप 27 रुपए कमा रहे हैं और आपके लिए ये सरकार कुछ नहीं कर रही है। आपने देखा कि कांग्रेस की सरकार जब थी, तब बुंदेलखंड में एक विकास का पैकेज आया था, उसके जरिए बहुत कार्य किए गए थे। ये सब परिस्थितियों को देखकर हमने ये तय किया है कि अगर हमारी सरकार आएगी, तो किसानों का पूरा कर्जा माफ किया जाएगा।आपने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री जी से सुना कि उन्होंने कितने कर्ज माफ किए हैं, छत्तीसगढ़ में। इससे पहले देशभर में 72 हजार करोड़ रुपए का कर्जा कांग्रेस पार्टी ने माफ कराया। अगर हमारी सरकार आएगी तो आपको गेहूँ और धान का 2,500 रुपए प्रति क्विंटल दाम मिलेगा। हमने ये भी तय किया है कि सबकी बिजली का बिल हाफ किया जाएगा। कोरोना काल में कई ऐसे लोग थे, खासतौर से जो छोटे दुकानदार और छोटे कारोबार चलाते हैं, जिनको बिल भरने पड़े, लेकिन कारोबार बंद हो गया था, क्योंकि लॉकडाउन की वजह से, कोरोना की वजह से बहुत नुकसान हुआ। जिन-जिन ने वो कोरोना के समय वो बिल भरा, उनका बकाया माफ किया जाएगा, साफ किया जाएगा।हमने यह भी तय किया है कि जो आवारा पशु की समस्या है, उसको दूर करने के लिए जो छत्तीसगढ़ में मॉडल है, वही हम यहाँ पर भी करवाएंगे, ताकि यहाँ पर भी जो ये समस्या इतनी बड़ी हो चुकी है कि मेरी बहनें भी रात-रात, मैंने सुना है कि आप भी रात-रात खेत में बैठी रहती हैं, आवारा पशुओं को भगाने के लिए, मेरे भाई भी बैठते हैं, तो ये समस्या इससे दूर हो जाएगी।आप सब जानते ही हैं, मुझसे अच्छी तरह जानते हैं कि बेरोजगारी कितनी है प्रदेश में। जहाँ-जहाँ मैं जाती हूँ, नौजवान दिखते हैं, बहुत पढ़े-लिखे भी होते हैं। सबने अपनी मेहनत की कमाई से सबसे पहले अपने बच्चों को पढ़ाया है। कुछ बच्चे बी.ए. पास हैं, कुछ आईटीआई पास हैं, कुछ ने कोर्स किए हुए हैं, लेकिन रोजगार नहीं मिल रहा। लॉकडाउन की वजह से काफी दिक्कत हुई, काफी धंधे भी बंद हुए, कारोबार बंद हुए, इस बीच हमारे प्रधानमंत्री जी, योगी आदित्यनाथ जी कहते हैं कि देश के लिए तपस्या कर रहे हैं। मैं बताना चाहती हूँ, आप कोई तपस्या नहीं कर रहे हैं, अपने बड़े-बड़े जहाजों में घूम रहे हैं। तपस्या इस देश का श्रमिक कर रहा है, इस देश का नौजवान कर रहा है।
कोरोना के समय उन परिवरों पर सबसे ज्यादा आर्थिक मार पड़ी, जो सबसे ज्यादा गरीब हैं। जिनके छोटे-छोटे कारोबार बंद हुए, उनके लिए अगर कांग्रेस की सरकार आएगी, तो 25 हजार रुपए दिए जाएंगे, ताकि वो फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें। हमने तय किया है कि 20 लाख सरकारी रोजगार दिलवाएंगे और अगर कोई भी बीमारी हो, कैसी भी बीमारी हो, तो 10 लाख रुपए तक सरकार इलाज कराएगी।एक बुंदेली कहावत है, लबरा बड़ा कि बोंदा बड़ा? तो आप जानते हैं कि कौन बड़ा। योगी जी, मोदी जी, भाजपा के सब नेता, यहाँ आकर, मंच पर खड़े होकर आपके सामने झूठा प्रचार करते हैं। बड़े-बड़े वचन देकर जाते हैं। आपने अब खुद परख लिया है कि उन वचनों को किस तरह से वे निभाते हैं। आपने तो देखा है कि झूठे विज्ञापन भी देते हैं। अब कल ही आपने देखा होगा, मोदी जी गए, उद्घाटन किया उन्होंने, जेवर में एक बहुत बड़ा एयरपोर्ट बनेगा, हवाई अड्डा बनेगा। तो सब अपनी सोशल मीडिया पर, जितने भी इनके नेता हैं, सब फोटो लगाने लग गए। सबने देखा कि बहुत बढ़िया है ये जेवर का एयरपोर्ट- पता चला कि चीन की फोटो है और नोएडा में शिलान्यास करने गए थे, चीन के एयरपोर्ट की फोटो लगाते हैं। अमेरिका की फैक्ट्रियों की फोटो लगाते हैं अपने विज्ञापनों में, आन्ध्र प्रदेश के बांध की फोटो लगाते हैं, तो इनको तो कोई परवाह ही नहीं है कि सच्चाई बोलनी चाहिए जब जनता के सामने आते हैं। उनको ये एहसास नहीं हो रहा है, वो समझ नहीं पा रहे हैं कि आपके प्रति कोई जवाबदेही है उनकी। वे समझ रहे हैं कि उनका काम सिर्फ चुनाव में झूठे वचन देना, यहाँ आना मंच पर तमाम आपके सामने वचन दें, उसके बाद आपको भूल जाएं। चुनाव जीत जाएं, उसके लिए कुछ भी प्रयोग हो तो ठीक है। धर्म का प्रयोग करेंगे, जाति का प्रयोग करेंगे, अलग-अलग प्रयोग करेंगे। अब देखिए, कोई नहीं कहता कि जाति का अधिकार आपको नहीं मिलना चाहिए, आपको पूरी तरह से मिलना चाहिए। राजनीति में धर्म का, जाति का प्रतिनिधित्व पूरी तरह से होना चाहिए, लेकिन चुनाव के समय आपके विकास के मुद्दे की बात होनी चाहिए। चुनाव के समय जो भी नेता आपके सामने आए, वो आपको बताए आपके लिए क्या करने जा रहा है और चुनाव के बाद जो 5 साल हैं, उसमें करके दिखाएं, नहीं तो अगले चुनाव में आप उनको हराइए। ये बात जब तक आप नहीं समझेंगे, जब तक आप अलग-अलग तरह की राजनीति के जाल में फंसे रहेंगे, तो आपका विकास नहीं होगा। तो जो भी आपके सामने आएगा, वो समझेगा, हम कुछ भी कह सकते हैं, चुनाव जीतकर जाएंगे, उसके बाद हम भूल जाएंगे, तो किसी को परवाह नहीं है। कोई हमसे जवाब नहीं मांगेगा।

मैं आपसे ये कहने आई हूं यहाँ, आपकी अपनी शक्ति एक बहुत बड़ी शक्ति है, इसे पहचानिए। जवाब मांगिए और मुद्दों पर मांगिए। अगर सिंचाई का पानी नहीं है, तो क्यों नहीं है? अगर बड़े-बड़े हवाई जहाजों को खरीदने का पैसा है, हजारों-करोड़ हैं, तो आपके बकाए माफ क्यों नहीं हो रहे हैं? अगर उद्योगपति, बड़े-बड़े उद्योगपति मित्र जो हैं भाजपा के, अगर हजारों-करोड़ कमा रहे हैं हर रोज, तो आप 27 रुपए क्यों कमा रहे हैं? आप कब पूछेंगे ये सवाल? कब तक आप ये नौटंकी देखते रहेंगे अपने सामने कि आपके सामने झूठ बोला जा रहा है, खोखले वचन दिए जा रहे हैं आपको और आप चुप बैठेंगे? मैं जानना चाहती हूं आपसे? क्या आप आवाज उठाने के लिए तैयार हैं कि नहीं, अपना हक मांगने के लिए तैयार हैं कि नहीं? जोर से बोलिए। ये आपके हक हैं। यहाँ का पान प्रसिद्ध है, इसका व्यापार बढ़ाने के लिए क्या किया गया है? जैतपुर की खादी के लिए क्या किया गया है? बरुआसागर की अदरक के लिए क्या किया गया है? मऊरानीपुर की टेरिकोट के लिए क्या किया गया है? जालौन की मटर के लिए क्या किया गया है? बुंदेलखंड की मूंगफली के लिए क्या किया गया है, कोई योजना बनाई है कि जब उसका व्यापार आगे बढ़े? कोई उद्योग बनाए हैं इन्होंने नए?गौरा पत्थर यहाँ का सोना है और यहाँ क्या हो रहा है, बड़े-बड़े पूंजीपति लूट रहे हैं इसको। इनकी जो नई खनन की नीति है भाजपा की, इससे रॉयल्टी बहुत मंहगी हो चुकी है। मैं जब यहाँ आ रही थी, तो हेलीकॉप्टर से आए, तो देख रही थी नीचे, क्रशर लगे हुए हैं। मुझे बताया गया कि यहाँ पर कम से कम 450 क्रशर होते थे, आज 50 से 60 बचे हैं। बालू का ट्रक 9,000 रुपए का था, आज 50,000 रुपए का हो चुका है। कारोबार पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। हजारों मजदूर बेरोजगार हैं, ढाबा का जो व्यवसाय होता था, खनन के चलते, अच्छा चलता था, उसको नुकसान हुआ है और पूरी तरह से भूमाफिया सक्रिय हो गए हैं।भाजपा के मित्र बड़ी-बड़ी बाहरी कंपनियों को ला रहे हैं यहाँ पर, लेकिन स्थानीय लोगों को कुछ नहीं मिल रहा है। अधिकारियों ने एक वसूली गैंग बना रखी है। आपने देखा होगा कि कबरई के क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी की किस तरह से हत्या हुई। आज भी उनके हत्यारे फरार हैं। आज भी उनको पकड़ा नहीं है। बुंदेलखंड पर्यटन में बुंदेलखंड एकदम आगे बढ़ सकता था। यहाँ अपार संभावनाएं हैं, भाजपा के विधायक पर्यटन के नाम पर जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। अवैध धंधा कर रहे हैं। गौशालाओं के नाम पर धंधा कर रहे हैं। गौशालाओं की बुरी हालत है। यहाँ के संसाधनों पर किसका हक है? सबसे पहला हक आपका है, किसी और का हक नहीं है। अगर आपको बदलाव लाना है, तो सबसे पहले राजनीति में बदलाव लाना पड़ेगा। सबसे पहले आपको ऐसे नेता चुनने पड़ेंगे, जो सिर्फ वचन और बड़े-बड़े भाषण नहीं, लेकिन काम करके दिखाएंगे आपके लिए।

हमने ये तय किया है कि बुंदेलखंड के लिए एक स्थाई बुंदेलखंड विकास का बोर्ड होना चाहिए। भाजपा की तरह चुनावी बोर्ड नहीं, एक स्थाई विकास का बोर्ड जो यहीं हो, जहाँ से आपकी जो समस्याएं हों, जो यहाँ से ही हल हो सकें। हर साल आपके लिए, बुंदेलखंड के लिए यहाँ से विकास का बजट बने और विकास बोर्ड सीधे पंचायतों से जुड़े। बुंदेलखंड विकास बोर्ड की कमान बुंदेलखंड के ही लोगों के हाथों में हो। हम चाहते हैं कि सरकार आपके द्वार आए। यहाँ की जो समस्याएं हैं, उसके लिए यहाँ पर एक अलग विकास का सचिवालय बने। छोटे-बड़े कार्यालय यहीं पर हों ताकि आपको दूर-दूर जाना नहीं पड़े अपने समस्याओं को हल करने के लिए। मंडियों का सही उपयोग होना चाहिए। मंडियों में आपके पान, चना, मटर, मूंगफली की खरीद हो। एक फूड प्रोसेसिंग की यूनिट लगनी चाहिए यहाँ पर। मनरेगा को आप जानते हैं कि कांग्रेस ने शुरु किया और उसको आहिस्ता-आहिस्ता कमजोर किया जा रहा है। जो मनरेगा में आपको काम मिलते थे, वो अब ठेकेदारों को मिल रहे हैं। तो मनरेगा को फिर से मजबूत बनाना हमारा काम है और हम चाहते हैं कि अगर हमारी सरकार आएगी, तो हम मनरेगा को फिर से मजबूत बनाएंगे।यहाँ पर नए उद्योग लगाना बहुत ही जरुरी है। आपको याद होगा कि कांग्रेस ने जो पैकेज किया था, उसके द्वारा कई नए उद्योग लगे थे। अब हम चाहते हैं कि हम और मजबूती से ये कार्य करें। भाजपा की जो खनन नीति है, इसको हम खत्म करना चाहते हैं। खनन नीति में हमारा ये विचार है कि स्थानीय लोगों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता मिलनी चाहिए। जल स्त्रोतों का संरक्षण होना चाहिए। यहाँ पर आल्हा उदल की संस्कृति के लिए एक सांस्कृतिक केन्द्र बनाना चाहिए। कीरत सागर, कजली मेला स्थल, गोरखगिरी पर्वत, ऐसे तमाम पर्यटन स्थल हैं बुंदेलखंड में, इनका विकास होना चाहिए, ताकि पर्यटन से रोजगार बने और आपकी कमाई हो।मेरी बहनें आप यहाँ बैठी हैं, देखिए, जहाँ-जहाँ जाती हूं मैं, अपनी बहनों से मिलती हूं और मुझे ये अहसास होता है कि समाज का सारा बोझ मेरी बहनें उठाती हैं। जो मंहगाई आजकल हैं, उसका बोझ आप उठा रही हैं। आप खेती में भी काम करती हैं, जहाँ-जहाँ बाहर नौकरी मिल सकती है, आप वो नौकरियां भी करती हैं, आपको जहाँ रोजगार मिलता है, आप करती हैं। उसके बाद घर आती हूं, घर संभालती हैं। बच्चों की परवरिश आप करती हैं और जो नई पीढी है, उसका भविष्य आप ही के हाथों में हैं। मैं भी एक महिला हूं, मैं समझती हूं कि आप पर कितना बोझ है और कितनी शक्ति, कितने सम्मान के साथ आप उस बोझ को उठाती हैं।
देखिए, आज की जो परिस्थिति है, सरसों का तेल इतना मंहगा हो गया है। आपको सरकार ने कहा कि एक गैस का सिलेंडर देंगे, गैस का सिलेंडर, चलो दे दिया, क्या उससे आपकी समस्याएं खत्म हो गई? क्या सरकार की आपके प्रति यही एक जिम्मेदारी थी कि एक गैस सिलेंडर पकड़ा दें या कोई और भी जिम्मेदारी थी? आपको मजबूत करने की जिम्मेदारी, आपके हाथों में अपनी शक्ति देने की जिम्मेदारी, क्या आपको पूछा सरकार ने कि उस एक गैस सिलेंडर के बाद आप कैसे हजार रुपए का गैस सिलेंडर खरीदेंगी? आज टमाटर खरीदने जाएंगे तो आपको पेट्रोल-डीजल के दाम का तो टमाटर मिल रहा है।तो स्थिति इतनी खराब हो चुकी है और जहाँ-जहाँ मैं जाती हूं, मैं अत्याचार देखती हूं। कल इलाहाबाद में गई, एक परिवार से मिली, पूरे परिवार को मार डाला। गला काट दिया, पिता का गला काट दिया। 10 साल के बच्चे का गला काट दिया और मां और 17 साल की बेटी का बलात्कार करके मारा, उनको मार डाला और महिलाएं रो रही थी, वो कह रहीं थीं कि एक ही पुरुष है अब हमारे परिवार में, ये बाहर काम करते हैं। हम अकेली अपनी सुरक्षा कैसे करेंगी? हमें कौन देखेगा? हमारे साथ इतना बड़ा हादसा हुआ है और सरकार हत्यारों के पक्ष में है, उनकी मदद कर रही है। वे भाजपा के नेता को जानते हैं। उनमें से एक भाजपा का एक छुट-पुट का नेता भी है। सरकार उनका संरक्षण कर रही है और हमारे लिए कोई नहीं है और मुझे ऐसा लगा कि जहाँ-जहाँ कुछ हो रहा है, वहाँ ललितपुर में भी जिन किसानों ने आत्महत्या की, लाइन में जो गुजर गए, उन्होंने छोड़ा क्या – मेरी बहनों को अकेले छोड़ा और मेरी बहनें ही, महिलाएं ही अब समस्याओं का हल ढूंढने की कोशिश कर रही हैं।तो जिस तरह से महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहा है प्रदेश में, जिस तरह से मेरी बहनों के साथ शोषण हो रहा है, उसका एक ही मुकाबला है कि महिलाएं अपनी शक्ति अपने हाथों में लें। अपने पैरों पर खड़ी हों। अपनी लड़ाई अपने आप लड़ें। इसीलिए जहाँ-जहाँ जाती हूं, मैं कहती हूं कि हमारा नया नारा ये है – लड़की हूं, लड़ सकती हूं। इसका मतलब क्या है – इसका मतलब है कि अब हम इंतजार नहीं करेंगे कि कोई और आकर हमारी समस्या को सुलझाए। हम अपनी समस्या को सुलझाने के लिए खुद खड़े होंगे। हम चाहते हैं, कांग्रेस पार्टी ने ये एलान किया है कि 40 प्रतिशत टिकट इस चुनाव में, आने वाले चुनाव में महिलाओं को देंगे, ताकि महिलाएं पूरी तरह से विधानसभा के चुनाव में भागीदार बनें, विधानसभा में बैठें। जब नए-नए कानून बनें उनके लिए, तब महिलाएं कानून भी बनाएं। उनकी भागीदारी हो, उनकी आवाज हर जगह उठे। इसीलिए महिलाओं के लिए हम कुछ खास प्रतिज्ञाएं करना चाहते हैं।मैंने एक प्रतिज्ञा पत्र बंटवाया है, शायद आपको मिला होगा। इसमें जो छात्राएं बारहवीं कक्षा में हैं, उनको स्मार्ट फोन दिया जाएगा। उनसे जो बड़ी हैं, उनको स्कूटी मिलेगी। बस की यात्राएं प्रदेशभर में महिलाओं के लिए मुफ्त होंगी। एक गैस सिलेंडर नहीं, आपको तीन गैस सिलेंडर मुफ्त मिलेंगे। मेरी आशा बहुएं और आंगनबाडी की जो बहनें हैं, अक्सर मुझसे मिलती हैं, कुछ दिनों पहले लखनऊ में एक बहन आई। उसने अपना हक मांगा, तो पुलिस ने उसको पीटा बहुत बुरी तरह। वह मुझे कहती हैं कि बहुत समय से उनका मानदेय बढ़ाया नहीं गया है। अगर हमारी सरकार आएगी, तो हमने प्रतिज्ञा ली है कि 10,000 रुपए मानदेय आशा बहुओं और आंगनवाडी बहनों की होगी। जितनी ये जो 20 लाख जो नौकरियां हैं, जो रोजगार हैं, जो हम देना चाहते हैं, इसमें से 40 प्रतिशत हम महिलाओं को देंगे और जो पहले से आरक्षण लागू है, उसी के अंदर आएगा, लेकिन 40 प्रतिशत महिलाओं को भी मिलेगा ये रोजगार। विधवा पैंशन 1000 रुपए का होगा। दलित छात्रावासों के लिए आधुनिक नई-नई हम फैसिलिटी बनवाएंगे और सुविधा बनवाएंगे। स्वयं सहायता समूहों एवं जहल सहेलियों का सरकारीकरण किया जाएगा। वीरांगना, झलकारी बाई जैसी वीरांगनाओं के नाम पर महिलाओं के लिए एक दक्षता विद्यालय हर एक जिले में बनेगा, जिसमें आधुनिक से आधुनिक सुविधाएं होंगी।तो देखिए, आपके लिए बहुत प्रतिज्ञाएं, बहुत योजनाएं हमने सोची हैं और हम आपके सामने कह रहे हैं, हम करेंगे। तो आप यकीन कैसे कर सकते हैं मेरी बातों पर – आपके सामने जो भी आता है, वो प्रतिज्ञा, वो वचन करके चला जाता है। तो आपको कैसे यकीन होना चाहिए कि कांग्रेस पार्टी के नेता जब आपके सामने आते हैं और कुछ कहते हैं तो उस पर खरा उतरते हैं। दो चीजें हैं – सबसे पहले तो हमारे मुख्यमंत्री जी आपके सामने आएं और इन्होंने आपको बताया कि किस तरह से छत्तीसगढ़ में और जहाँ-जहाँ हमारी सरकारें हैं, वहाँ जो प्रतिज्ञाएं की गई, वो निभाई गई और दूसरी बात आप याद करिए कि जब बुंदेलखंड का पैकेज बना था, तो यहाँ पर बीएचईएल का प्लांट लगाया गया। पारीछा थर्मल पावर प्लांट लगा, राजघाट का बांध बनाया गया। बंजर जमीनों को खेती युक्त बनाने के लिए ग्रास लैंड का संस्थान बनाया । रानी लक्ष्मी बाई कृषि विश्वविद्यालय बनाया। झांसी मेडिकल कॉलेज बना। बुंदेलखंड का विश्वविद्यालय बना। बुदेंलखंड में नवोदय विद्यालयों का एक जाल फैलाया गया। 72,000 करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया गया। उसमें से नहीं, अलग से 12,000 करोड़ रुपए का एक पैकेज बना था। ये सब कांग्रेस की सरकार ने किया था। तो जब हम आपके सामने आते हैं, तो हमें अच्छी तरह से अहसास है कि हम आपके प्रति जवाबदेह हैं। हम जानते हैं कि अगर हम वचन आपको देंगे तो हमें उस वचन को निभाना पड़ेगा, क्योंकि हमारी नीयत साफ है।आपने भाजपा के नेताओं की नीयत पांच सालों से देख ली है। आपके लिए क्या हुआ, आपके लिए क्या किया गया, आप सब मेरे से अच्छी तरह जानते हैं। सपा की सरकार आई, आपको लूटा गया। बसपा की सरकार आई, कुछ नहीं किया गया आपके लिए। भाजपा की सरकार आई, तमाम झूठे वायदे किए, उनको निभाया नहीं। उनकी नीयत साफ नहीं है। मैं यहाँ खड़े होकर आप सबसे कहना चाहती हूं कि जिन-जिन लोगों से मैं मिली हूं, उत्तर प्रदेश में, जहाँ-जहाँ गई हूं, जिन-जिन गावों में गई हूं, जिन परिवारों से मिली हूं, जहाँ-जहाँ मैंने देखा है कि दुख है, दर्द है, मैं समझी हूं कि आपको एक ऐसी सरकार की जरुरत है, जिनकी आपके साथ संवेदना हो, जो आपकी समस्याओं को समझे और सुलझाने की दिल से कोशिश करे और मैं चाहती हूं कि उत्तर प्रदेश में आने वाले समय में एक ऐसी ही कांग्रेस की सरकार आए, जो आपकी समस्याओं को सुलझाने के लिए दिन रात काम करे, पीछे नहीं हटे।तो आपसे आग्रह करती हूं कि आप अपनी शक्ति को अच्छी तरह से पहचानिए, उसको मजबूत बनाइए। मेरी बहनें यहाँ हैं, एक बहुत बड़ी शक्ति है, आप चाहें तो ये प्रदेश बदल सकता है, लेकिन आपको चाहना पड़ेगा, आपको समझना पड़ेगा और आपको अपनी शक्ति को पहचान कर आगे बढ़ना पड़ेगा।

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