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नई दिल्ली: कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आज आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पीएम नरेंद्र मोदी के बारे क्या कहा -देखें वीडियो

नई दिल्ली/ अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
पवन खेड़ा, राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा जारी वक्तव्य: लगभग तीन महीनों से लगातार लद्दाख में भारतीय सीमा में चीन की घुसपैठ की ख़बरें हम और आप सुन रहे हैं। सैटेलाइट के तस्वीरों के माध्यम से,सेवानिवृत्त अधिकारियों के माध्यम से,रक्षा विशेषज्ञों के माध्यम से एवं स्थानीय नागरिकों के माध्यम से,चीन की शर्मनाक घुसपैठ की ख़बरें निरंतर आ रही हैं। एक तरफ तो प्रधानमंत्री चीन को क्लीन चिट दे देते हैं यह कहते हुए कि हमारी सीमा में कोई नहीं घुसा और दूसरी तरफ रक्षा मंत्री एवं नार्दन कमान के आला अधिकारी कुछ और स्थिति बयान करते हैं। मीडिया के माध्यम से यह भी जानकारी मिली है कि चीन के विरूद्ध बोलने पर कैबिनेट के मंत्रियों पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने पाबंदी लगा दी है।

पिछले कुछ सप्ताहों में, हमने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चीन प्रेम के कई उदाहरण आपके समक्ष रखे। वे उदाहरण जो गुजरात के मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए नरेन्द्र मोदी जी का चीन के प्रति विशेष लगाव हो अथवा अब प्रधानमंत्री बनने के पश्चात हो। कैसे गुजरात में चीन की कंपनियों को प्राथमिकता दी जाती रही है यह सर्वविदित है। कैसे PM CARES Fund में चीन की कंपनियों से पैसे आए, जिन पैसों का कोई हिसाब किताब सार्वजनिक पटल पर नहीं रखा जा रहा; पिछले 5 साल में हमने यह भी देखा कि कैसे अकेले गुजरात राज्य में स्मार्ट सिटी, टेक्सटाइल पार्क, इंडस्ट्रियल पार्क आदि के तहत चीन के साथ 43 हजार करोड़ रुपए के करारनामें हुए।

जब नरेन्द्र मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो 2011 में मोदी जी ने गुजरात के स्कूलों में मैन्डरिन (mandarin) भाषा लाने की भी घोषणा कर दी थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में ग्लोबल टाइम्स जो कि चीन की सरकार का मुखपत्र माना जाता है कि लिखता है “चीनी कंपनियां चाहती हैं कि गुजरात में एक बार फिर नरेन्द्र मोदी की ही पार्टी की जीत हो’’ “अगर गुजरात में मोदी को बडी जीत मिलती है तो वह चीनी कंपनियों के लिए फ़ायदे मंद हो सकता है’’ “चीन की कुछ कंपनियों को डर है कि अगर गुजरात में अगर मोदी की हार होती है तो केन्द्र में उनके द्वारा आर्थिक फैसले लिए जा रहे हैं उन पर ब्रेक लग जाएगा’’
दो देशों के संबंधों में कूटनीति के साथ-साथ व्यापार एक महत्वपूर्ण पहलू होता है, इससे कोई इंकार नहीं कर सकता। लेकिन 2 देशों के व्यापारिक रिश्तों में कोई भी देश अपने सामरिक हितों को ताक पर रखकर व्यापार नहीं करता। वैश्वीकरण के इस युग में कंपनियां व निवेश भौगोलिक सीमाओं से कमोवेश नहीं बंधते, यह बात तो किसी हद तक समझ में आती है, लेकिन जब चीन की एक ऐसी कंपनी को जम्मू कश्मीर जैसे संवेदनशील राज्य में एक संवेदनशील कार्य के लिए पिछले दरवाज़े से प्रवेश होने दिया जाता है तब वह चिंता का विषय बन जाता है। चिंता तब और बढ़ जाती है जब यह पता चले कि चीन की यह कंपनी न केवल चीन की सरकार के नियंत्रण में है,अपितु विश्व बैंक द्वारा पिछले वर्ष इस पर भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते पाबंदी भी लगाई गई है। (संलग्न 1)
डोंगफेंग (Dongfang) नामक यह कंपनी विश्व के अनेक देशों में सक्रिय है एवं पाकिस्तान के साथ इसके विशेष संबंध हैं। पाकिस्तान का बहुचर्चित नंदी पुर पावर प्राजेक्ट, जिसमें बाद उस वक्त के प्रधानमंत्री को जेल जाना पडा, इसी कंपनी ने बनाया था एवं चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड (Belt and Road) इनिशिएटिव में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। ऊर्जा के क्षेत्र में यह कंपनी हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (Internet of Things, IoT) दोनों में सक्रिय है जिसके तहत पावर ग्रिड, स्मार्ट मीटर, मीटर के अंदर लगने वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी टेक्नोलॉजी (Radio Frequency Technology- RF Technology), आदि में यह कंपनी व्यापक समाधान के लिए जानी जाती है।

जम्मू कश्मीर में स्मार्ट मीटर लगाने का ठेका जिस कंपनी को मिला है, उसने रिमोट कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (Remote Communication Technology) का ठेका डोंगफेंग को दे दिया है। (संलग्न 2) उक्त ठेका ग्रामीण विद्युतीकरण निगम, ऊर्जा मंत्रालय ने दिया है। जिसके तहत जम्मू एवं श्रीनगर में एक-एक लाख स्मार्ट मीटर लगने हैं। स्मार्ट मीटर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रेडियो फ्रीक्वेंसी अथवा रिमोट कम्युनिकेशन सिस्टम (Remote Communication System) होता है। ऐसा महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील काम, एक बेहद संवेदनशील इलाके में होने वाला काम, एक ऐसी कंपनी को मिल जाए जो कि सीधे चीन की सरकार एवं सेना को रिपोर्ट करती हो तो यह विषय राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय हो जाता है।

2017 में जी कृष्ण रेड्डी जो कि उस वक्त भारतीय जनता पार्टी के एक सांसद थे और आज गृह राज्य मंत्री हैं ने इस कंपनी के विरूद्ध ट्वीट करके अपनी ही सरकार को आगाह भी किया था। विशेषज्ञों का यह मानना है कि इस तरह की टेक्नोलॉजी के जरिये दुश्मन जब चाहे तब उस इलाके में ब्लैक आउट कर सकता है। उपभोक्ताओं का संवेदनशील डेटा भी गलत हाथों में जाने का खतरा रहता है। आज पूरे विश्व में साइबर हमलों को लेकर हर देश सजग रहने की चेष्टा कर रहा है। अभी हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की संसद पर साइबर हमला हुआ था एवं इस हमले के लिए ऑस्ट्रेलिया ने सीधे-सीधे चीन को जिम्मेदार ठहराया था। अकेले जून में इस वर्ष चीन के हैकर्स ने भारत के बैंकिंग क्षेत्र पर चालीस हजार साइबर हमले किए थे। आज की स्थिति में जब हमारे बहादुर जवान सीमाओं पर दुश्मन का डटकर मुकाबला कर रहे हों, चीन लगातार वादाखिलाफी कर रहा हो एवं पूरा देश लद्दाख की सीमा को लेकर चिंतित हो तब हमारी सरकार जम्मू कश्मीर के लाखों नागरिकों के जीवन को खतरे में डालने का काम करे तो सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लग जाता है।

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