अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने संस्कृति मंत्रालय द्वारा सांप्रदायिक संगठन ‘सनातन संस्था’ के उस कार्यक्रम को 63 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दिए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया, जिसमें अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भड़काने और देश के संविधान को खत्म करने की बात कही गई। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता में पार्टी प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक ने कहा कि 2014 के बाद से देश में कुत्सित विचारधारा वाले संगठन फल-फूल रहे हैं, जो संविधान को दरकिनार कर हिंदू राष्ट्र बनाने की बात करते हैं और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से सांप्रदायिक संगठन सनातन संस्था द्वारा दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ के लिए मोदी सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा 63 लाख रुपये देने पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, श्रीपद नायक, संजय सेठ और दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा जैसे भाजपा से जुड़े नेता शामिल हुए।

रागिनी नायक ने कहा कि इस महोत्सव में मुसलमानों के जबरन सामूहिक धर्मांतरण, उन्हें देश से भगाने, संविधान को बदलने और भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग की गई। उन्होंने याद दिलाया कि सनातन संस्था वही संगठन है, जिसकी जांच कर्नाटक पुलिस गौरी लंकेश और एम.एम. कलबुर्गी की हत्या के मामलों में कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे संगठनों ने सनातन शब्द का सबसे ज्यादा अपमान और दुरुपयोग किया है। उन्होंने आगे कहा कि आरएसएस ने हमेशा से भारत के संविधान का विरोध किया है। यह कोई संयोग नहीं, भाजपा का प्रयोग है, जिसमें वह संविधान के खिलाफ काम करने वाले संगठनों को पैसा दे रही है। ऐसे संगठन जनता को बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं कि संविधान को छोड़ दो। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठाए।असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के सांप्रदायिक और भड़काऊ बयानों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि वे फ्रिंज एलिमेंट नहीं, बल्कि संवैधानिक पद पर बैठे नेता हैं। उन्होंने कहा कि जब हिमंता सरमा को वीडियो में मुसलमानों को गोली मारते दिखाया जाता है, तो वह गोली मुसलमानों पर नहीं, संविधान पर चलती है। ऐसी ही नफरत की गोली ने महात्मा गांधी का सीना छलनी किया था। उन्होंने कहा कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से ऐसे नेताओं को संरक्षण मिलता है।रागिनी नायक ने सवाल किया कि एक ऐसे कार्यक्रम में, जहां सांप्रदायिक और भड़काऊ नारे लगे, उसके लिए भाजपा सरकार ने 63 लाख रुपये क्यों खर्च किए? क्या नरेंद्र मोदी समाज में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण चाहते हैं, अल्पसंख्यकों के खिलाफ काम करने वाले संगठनों को मजबूत करना चाहते हैं, देश में अनेकता में एकता को पूरी तरह ध्वस्त करना चाहते हैं? क्या भाजपा हिंदुस्तान की गंगा-जमुनी तहजीब को सरकारी पैसे से तार-तार करना चाहती है?
रागिनी नायक ने मांग की कि ऐसे आयोजनों को सरकारी फंडिंग रोकी जाए और उनकी जांच हो। उन्होंने देश में नफरत भरे भाषणों पर रोक लगाने के लिए एक निवारक कानून लाने की भी मांग की, ताकि भविष्य में ऐसे बयान रोके जा सकें।
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