
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
सोनीपत: जिला बाल भवन में सोमवार को राज्य स्तरीय लोहड़ी एवं मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक रंगों के साथ मनाया गया। हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा आयोजित इस राज्य स्तरीय लोहड़ी समारोह में राज्यपाल एवं हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद के अध्यक्ष प्रो० अशीम कुमार घोष, उनकी धर्मपत्नी एवं हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्षा मित्रा घोष तथा मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी एवं हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने लोहड़ी की पवित्र अग्नि में आहुति देकर प्रदेशवासियों को लोहड़ी व मकर संक्रांति के पावन पर्व की हार्दिक बधाई दी। राज्यपाल प्रो अशीम कुमार घोष ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि लोहड़ी के इस आनंदमय अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में आप सभी के साथ शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने कहा कि लोहड़ी केवल फसल का त्योहार नहीं, बल्कि जीवन, प्रकृति और सामूहिक खुशियों का उत्सव है। यह सर्दियों के अंत और नए कृषि चक्र की शुरुआत का प्रतीक है, जो आशा, समृद्धि और नई शुरुआत का संदेश देता है।

राज्यपाल ने कहा कि लोहड़ी की पवित्र अग्नि हमें गर्मजोशी, एकता और प्रकृति की प्रचुरता के प्रति कृतज्ञता की याद दिलाती है। हरियाणा समृद्ध परंपराओं, गहरी जड़ों वाले मूल्यों और जीवंत सांस्कृतिक विरासत की भूमि है। लोकगीतों, नृत्यों और पारंपरिक उत्सवों के माध्यम से यहां की सांस्कृतिक आत्मा झलकती है।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि जब युवा अपनी जड़ों, संस्कृति और विरासत से जुड़ते हैं, तो संस्कृति जीवंत रहती है। लोहड़ी जैसे पर्व साझा करने, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामूहिक जिम्मेदारी के मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं। अंत में राज्यपाल ने किसानों की समृद्धि, परिवारों की खुशहाली तथा राज्य व देश की प्रगति की कामना करते हुए कहा कि लोहड़ी की अग्नि की गर्माहट हर घर को शांति, स्वास्थ्य और आनंद से भर दे। समारोह में विभिन्न स्कूलों के बच्चों द्वारा बेहतरीन सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई।इस दौरान लेडी गर्वनर एवं हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्षा मित्रा घोष ने लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लोहड़ी कृतज्ञता, प्रकृति और लोगों के साथ हमारे गहरे रिश्ते का उत्सव है। लोहड़ी की पवित्र अग्नि आशा, गर्मजोशी और एकजुटता का प्रतीक है। जो हमारे समाज और संस्कृति को मजबूत बनाते हैं। यह पर्व हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोगों के बीच एकता की भावना को भी उजागर करता है।

उन्होंने कहा कि लोहड़ी हर घर में खुशियां, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि लेकर आए। उन्होंने यह भी कहा कि लोहड़ी के साथ-साथ बंगाल में इसी समय मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। बंगाल में इस पर्व पर पीठा और पायस (खीर) बनाई जाती है, जिन्हें आपस में बांटकर और एक-दूसरे के घर जाकर खुशियां साझा की जाती हैं। यह परंपरा हमारे देश की विविधता में एकता की सुंदर मिसाल है और पूरे देशवासियों के लिए आनंद और उल्लास का अवसर है।
लोहड़ी हमारी संस्कृति और परंपराओं की आत्मा, यह पर्व हमें प्रकृति से जोड़ता है-उपाध्यक्षा सुमन सैनी समारोह में मुख्यमंत्री नायब सैनी की धर्मपत्नी एवं हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्षा ने प्रदेशवासियों को लोहड़ी एवं राष्ट्रीय युवा दिवस की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि लोहड़ी हमारी संस्कृति और परंपराओं की आत्मा है। यह पर्व हमें प्रकृति से जोड़ता है और मेहनतकश लोगों के जीवन में खुशियां भरता है। अग्नि के चारों ओर एकत्रित होकर गीत गाना, मूंगफली, रेवड़ी और गुड़ अर्पित करना हमें अपनी जड़ों से फिर से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि लोहड़ी का पर्व एकता और भाईचारे का संदेश देता है, जहां जाति-धर्म, अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं होता, केवल इंसानियत और खुशियां होती हैं।उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रीय युवा दिवस भी है जो स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के रूप में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद भारत के महान संन्यासी, विचारक और युवाओं के प्रेरणास्रोत थे। उनका अमर संदेश उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए आज भी हम सभी को निरंतर आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने युवाओं को देश की असली शक्ति बताया था। यदि युवा मजबूत हैं तो देश भी मजबूत होता है। उन्होंने इस अवसर पर हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए बताया कि वर्ष 1971 से परिषद बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रही है। परिषद द्वारा संचालित बाल भवन और लघु बाल भवन बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ खेल, कला, योग, स्वास्थ्य और संस्कारों से जोडक़र उनके सपनों को साकार करने का मंच प्रदान कर रहे हैं। हर वर्ष लाखों बच्चे, युवा और युवतियां परिषद की गतिविधियों से लाभान्वित हो रहे हैं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि नारी परिवार की रीढ़ होती है। जहां नारी सशक्त होती है, वहां परिवार और समाज दोनों सशक्त होते हैं।
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