अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़:दो बार वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाले लेफ्टिनेंट कमांडर देवदत्त शर्मा पंचकूला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंडित मोहन लाल बड़ौली से मिले। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लेफ्टिनेंट कमांडर देवदत्त शर्मा के रिकार्ड को नायाब बताया। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि लगातार 602 दिनों तक हाफ मैराथन पूर्ण कर दूसरी बार गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कर उन्होंने प्रदेश और देश का मान बढ़ाया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बड़ौली ने भी लेफ्टिनेंट कमांडर देवदत्त शर्मा की प्रशंसा की और कहा कि देवदत्त शर्मा ने इस शानदार उपलब्धि से देश-प्रदेश का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने लेफ्टिनेंट कमांडर देवदत्त शर्मा को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। इस मौके पर खेलमंत्री गौरव गौतम, भाजपा नेता कैप्टन भूपेंद्र, जवाहर सैनी, मदन चौहान आदि नेता उपस्थित रहे।
बड़ी उपलब्धि के लिए बड़ा संघर्ष
भारतीय नौसेना में हिसार ज़िले के खरबला गांव के लेफ्टिनेंट कमांडर देवदत्त शर्मा ने दूसरी बार गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराकर न केवल हरियाणा, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने अपनी नियमित नौसैनिक कार्यालयीन ड्यूटी के साथ-साथ लगातार 602 दिनों तक प्रतिदिन एक हाफ मैराथन दौड़ पूरी की। इन 602 दिनों में इन्होंने 13000 किलोमीटर की दूरी तय की। इससे पहले वे 82 दिनों तक लगातार 42.2 किलोमीटर की पूर्ण मैराथन दौड़ लगाकर अपना पहला गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना चुके थे। इन व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ-साथ उन्होंने आज़ादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत भारतीय नौसेना की पहली 1500 किलोमीटर की दौड़ की परिकल्पना की और उसे सफलतापूर्वक पूरे हरियाणा प्रदेश के हर जिले में जाकर अंजाम दिया। इस अभियान के दौरान वे प्रतिदिन 42 से 45 किलोमीटर दौड़ने के बाद 200 से अधिक स्कूलों,कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाकर युवाओं को अनुशासन, नशामुक्ति तथा सेना में करियर बनाने के लिए प्रेरक और जागरूकता व्याख्यान देते रहे। लेफ्टिनेंट कमांडर देवदत्त शर्मा का जीवन संघर्ष और संकल्प की मिसाल है। मात्र दस वर्ष की आयु में उन्होंने अपने पिता को खो दिया, जिसके बाद उन्होंने अपनी माँ के साथ खेतों में काम कर परिवार का सहारा बनने की ज़िम्मेदारी निभाई, उनके चाचा श्री वासुदेव शर्मा ने उनके सपनों को नींव दी।

गाँव के सरकारी स्कूल में सीमित संसाधनों के बीच शिक्षा प्राप्त करते हुए उनका बचपन बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहा।युवावस्था में उन्होंने जवान के रूप में सेना में भर्ती होने के लिए कई बार भर्ती रैलियों में उनके चाचा से छुपकर भाग लिया। एनडीए की परीक्षा में वे पाँच बार असफल हुए, परंतु इन असफलताओं ने उनके आत्मविश्वास और संकल्प को कभी कमजोर नहीं किया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूर्ण करने के बाद निरंतर परिश्रम और धैर्य के बल पर उन्होंने अंततः वर्ष 2016 में भारतीय नौसेना में एक अधिकारी के रूप में प्रवेश किया। नौसैनिक सेवा के साथ-साथ वे एक अल्ट्रामैराथन धावक, ट्रायथलीट, योग प्रशिक्षक, कॉम्बैट डाइवर और पर्वतारोही हैं। अनुशासन, सहनशक्ति और राष्ट्रसेवा उनके जीवन के मूल सिद्धांत हैं।मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि एक किसान के पुत्र से लेकर भर्ती रैलियों में दौड़ने वाले युवक, फिर एक नौसैनिक अधिकारी और दो बार गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक बनने तक की उनकी यात्रा धैर्य, सेवा और अनुशासित आत्म-परिवर्तन की एक अद्वितीय मिसाल है।
Related posts
0
0
votes
Article Rating
Subscribe
Login
0 Comments
Oldest
Newest
Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

