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फरीदाबाद

ब्राह्मण सभा ने लिया फैसला शादी समारोहों नहीं बजेगा डी.जे,10 कुरीतियों को बंद करने का फैसला।


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
फरीदाबाद: शादी समारोहों व अन्य आयोजनों में चली ऐसी रीतियों का जिनका आज के दौर में कोई प्रासिंगगता नहीं बची है उनको बंद करने को लेकर रविवार को जिला फरीदाबाद ब्राह्मण सभा ने अनाज मंडी बल्लभगढ़ स्थित ब्राह्मण भवन में एक पंचायत का आयोजन का आयोजन हुआ। इस पंचायत में जिलेभर सभी गांवों व शहर की कॉलोनियों व सेक्टरों के मौजिज लोग मौजूद थे। इसके अलावा जिलेभर की सभी सामाजिक संस्थाओं के प्रधान और पदाधिकारी मौजूद रहे। मंच को संचालन एडवोकेट महेश शर्मा ने किया।

पंचायत में जिला फरीदाबाद ब्राह्मण सभा के प्रधान बृजमोहन बाति ने पंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे समाज में कुछ रीतियां है जो वर्षो पूर्व समय और काल के अनुरूप शुरू की गई थी। लेकिन आज के मौजूदा समय में इन सभी रीतियों की या तो प्रासिंगता नहीं रही है या उनमे विसंगतियाँ गई हैं । इसके अलावा  कुछ ऐसी भी परंपरा शुरू गई  है जिनका समाज पर बुरा असर पड रहा है। श्री बातिश  ने पंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि शादी समारोहों में डी.जे रंग में भंग डालने का काम करता है। कई बार स्थिति बेहद गंभीर बन जाती है और डी.जे की ध्वनि से सेहत पर भी बुरा असर पडता है, इसलिए शादी समारोहों में डी.जे बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लगन सगाई में जो दहेज के सामान की लिस्ट पढने की परंपरा है वह बंद होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में लगन सगाई समारोह में सत्कार के तौर पर सीमित लोगों को चद्दर देने की परंपरा शुरू हुई है , वह बंद होनी चाहिए। शादी, भात और छूछक में आने वालों की संख्या सीमित रखी जाए। शादी, लगन-सगाई, भात व छूछक मे खर्चा लेने की प्रथा बंद हो। शादी समारोह में सभी को परोसा देने का चलन शुरू है। परोसा देने की परंपरा सिर्फ रिश्तेदारों तक ही सीमित होनी  चाहिए। इसके अलावा स्वर्गवासी हो गए लोगों के ऊपर चद्दर डालने की प्रथा बंद होनी चाहिए। चद्दर की जगह सामग्री और घी लगाने की परंपरा शुरू हो। शोक संतप्त परिवार के घर जो सूखा खाद्य सामग्री ले जाने की प्रथा है वह बंद हो। तेहरवीं  से पहले मृतक परिवार के घर भोजन व जलपान का चलन बंद हो। बुर्जुगों की मृत्यु पर होने वाले काज, दिन यानी टेहले में भजन व धार्मिक का ही आयोजन होना चाहिए और मंच में नाचने जैसे आयोजन पूरी तरह से बंद होने चाहिए। टेहले ,दिन, काज में भोजन साधारण हो। अगर पिता जीवित है और माता की मृत्यु होने पर पगड़ी नहीं बांधी जाएगी , सिर्फ शोक सभा का आयोजन होना चाहिए।

पगड़ी में सिर्फ सफेद पगड़ी बांधी जाए। व्यक्तिगत पगड़ी की जगह संस्थागत पगड़ी बंधे। इसके अलावा रस्म पगडी के अवसर पर पुरषों के साथ महिलाएं भी बैठें ताकि वह उन सामाजिक बातों का हिस्सा बने। इन सभी कुरीतियों को लेकर पंचायत में सभी मौजिज लोगों की राय मांगी गई। पंचायत में मौजूद सभी लोगों ने एकमत से इन सभी कुरीतियों को तुरंत बंद करने की सहमति दी और उसके बाद ध्वनिमत से उक्त सभी कुरीतियों को बंद कर दिया गया और इस फैसले को घर घर पहुंचाने की बात कही गई। इसके अलावा कई ऐसी कुरीतियों पर भी चर्चा हुई जिन पर पंचायत में सहमति नहीं बन पाई। इन कुरीतियों को लेकर सभी ने यह फैसला लिया कि इनकी चर्चा पडोस के जिलों में चर्चा करके फैसला लिया जाए। इस मौके पर मुख्य रूप से डॉक्टर राम नारायण भारद्वाज, बृजलाल शर्मा, योगेश गौड़, गिरिराज भारद्वाज शास्त्री, पूर्व विधायक नीरज शर्मा, पराग शर्मा, मास्टर गंगा विष्णु, रविदत्त शर्मा, देवेन्द्र गौड़, कृष्ण कौशिक, न्यादर गौतम, रघु वत्स, जिला पार्षद संदीप शर्मा, जिला पार्षद अनिल पाराशर, सुनील कौशिक, बाबूराम वशिष्ठ, गिर्राज शर्मा आदि गणमान्य लोग मौजूद थे।

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