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गुडगाँव

इंडियन ओवरसीज बैंक व केनरा बैंक ने अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कार्यशाला का आयोजन किया।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
गुरुग्राम:देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्योगों को आसानी से ऋण सुविधा उपलब्ध करवाने तथा हाउसिंग फार आॅल के बारे में नए सुझाव प्राप्त करने के लिए बैंकरों द्वारा दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम इंडियन ओवरसीज बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय तथा केनरा बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा गुरूग्राम में दो अलग-अलग स्थानों पर आयोजित किया गया। इंडियन ओवरसीज बैंक क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक वी पी मिश्रा ने कहा कि इस दो दिवसीय कार्य शाला में देश की अर्थव्यवस्था मजबूत करने के बारे में बैंकर्स से सुझाव प्राप्त किए गए । इसके अलावा, उन्हें सरकार की सभी को घर उपलब्ध करवाने तथा एमएसएमई अर्थात् सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को आसानी से ऋण सुविधा देने के बारे में दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

यह अपनी तरह का पहला मंथन कार्यक्रम था जिसमें बैंक की शाखाओं द्वारा ऋण प्रक्रिया के सरलीकरण को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में बैंकिंग क्षेत्र से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार- विमर्श करने के साथ साथ भविष्य की रणनीति और कार्ययोजना तैयार करने पर विस्तार से चर्चा की गई। मंथन कार्यक्रम के दौरान अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में ऋण बढ़ाने के तरीकों और उपायों पर ध्यान केंद्रित करने सहित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा, विस्तृत डेटा अनुसंधान के लिए प्रोद्योगिकी के प्रयोग को बढ़ाये जाने एवं वरिष्ठ नागरिकों, किसानों, छोटे उद्योगपतियों, उद्यमियों, युवाओं, छात्रों तथा महिलाओं की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के साथ-साथ बैंकिंग को नागरिक -केंद्रित बनाए जाने पर जोर दिया गया ।



सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) में सुधार तथा बैंकिंग क्षेत्र के सामने आने वाली विभिन्न प्रकार की चुनौतियों पर डॉमेन विशेषज्ञों द्वारा नौ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई जिसमें बढ़ते डिजिटल भुगतान, सार्वजनिक उपक्रमों में कॉर्पोरेट नियंत्रण, भारत के एमएसएमई के लिए साख सुविधायें,पीएसबी में प्रौद्योगिकी का उपयोग, रिटेल लेंडिंग -बड़ा मौका, कृषि वित्त, भारत में निर्यात क्रेडिट ,वित्तीय ग्रिड स्थापित करने की आवश्यकता, $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था हेतु बैंक क्रेडिट को सक्षम करना आदि शामिल है।
इस कार्यक्रम में बैंक के कार्य निष्पादन एवं राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में आर्थिक विकास के लिए क्रेडिट समर्थन,आधारिक सरंचना उद्योग ,कृषि क्षेत्र एवं ब्लू इकॉनोमी, जल शक्ति, एमएसएमई क्षेत्र एवं एमयूडीआरए (मुद्रा)ऋण,शिक्षा ऋण,निर्यात ऋण,ग्रीन इकॉनोमी स्वच्छ भारत,वित्तीय समावेशन एवं महिला सशक्तिकरण, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण,कम नकदी ,डिजिटल इकॉनोमी जीवन में आसानी आदि विषयों पर भी विशेषज्ञों द्वारा विचार रखे गए।

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