अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़:हरियाणा पुलिस ने साइबर अपराध की रोकथाम के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। हरियाणा पुलिस द्वारा राज्यभर में की गई जांच में ऐसी 91 बैंक शाखाओं की पहचान की गई है जहाँ पर संदेह है कि साइबर अपराधियों के ‘म्यूल अकाउंट्स’ चलाए जा रहे हैं और इन खातों के माध्यम से बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी के लेन-देन हो रहे हैं। इनमें से सबसे अधिक 26 बैंक शाखाएँ गुरुग्राम तथा 24 बैंक शाखाएं जिला नूह की शामिल हैं। इन शाखाओं को चिन्हित करने के बाद पुलिस ने चरणबद्ध तरीके से सत्यापन, निरीक्षण और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
साइबर अपराध शाखा की ओर से गठित विशेष टीमें इन शाखाओं के रिकॉर्ड की गहन पड़ताल कर रही हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं बैंक कर्मचारियों की लापरवाही या जानबूझकर मिलीभगत से साइबर अपराधियों को मदद तो नहीं मिल रही। टीम द्वारा KYC मानकों की अनदेखी, अकाउंट खोलने में प्रक्रियागत खामियाँ, बैंक स्टाफ की भूमिका और किसी भी तरह की लापरवाही की जाँच की जा रही है। इस अभियान की निरंतरता में आज पुलिस की टीमों ने करनाल और यमुनानगर ज़िलों की संदिग्ध बैंक शाखाओं पर छापेमारी की। छापों के दौरान बैंक रिकॉर्ड खंगाले गए और संदिग्ध खातों की जाँच की गई।
यमुनानगर में अब तक की गई जांच में एक Current bank Account सामने आया जिसमें पाया गया कि जिस फर्म के नाम पर यह अकाउंट खोला गया है वह मार्च 2025 में बंद हो चुकी है जबकि उस खाता में उसके बाद भी 43 लाख रुपये का लेन देन किया गया है जिसके खिलाफ देश भर में आठ शिकायतें दर्ज हैं। ऐसे ही एक Current bank Account फर्जी पते पर खोला गया है जिसमें तीन माह में दो करोड़ का लेन देन किया गया है जिसके खिलाफ 33 शिकायतें देश भर में दर्ज हैं। इस संबंध में खाता धारकों और संबंधित बैंक कर्मियों की भूमिका की जाच की जा रही है और सख्त कार्रवाई की जा रही है। स्पष्ट है कि यह कार्रवाई केवल दो जिलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले दिनों में अन्य जिलों की भी संदिग्ध शाखाओं पर इसी तरह की छापेमारी की जाएगी।हरियाणा पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा कि हरियाणा पुलिस ने साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए एक ठोस और बहु-आयामी रणनीति बनाई है। इसमें बैंक शाखाओं की कड़ी निगरानी, संदिग्ध लेन-देन का त्वरित विश्लेषण, समय-समय पर छापेमारी, और बैंकिंग रेगुलेशन का पालन सुनिश्चित करना प्रमुख हिस्सा है। इस अभियान का मकसद यह है कि राज्य में किसी भी नागरिक की मेहनत की कमाई साइबर अपराधियों के जाल में न फँसे। इस दिशा में बैंकों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी पुलिस की, इसलिए बैंक अधिकारियों और साइबर नोडल अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा रही है। हरियाणा पुलिस इस दिशा में ज़ीरो-टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और आने वाले समय में और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।आईजी साइबर शिवास कविराज ने नागरिकों से अपील की है कि वे साइबर अपराधों से बचाव के लिए हमेशा सतर्क और जागरूक रहें। साइबर अपराधी अक्सर बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, सरकारी एजेंसी या किसी प्रतिष्ठित कंपनी का प्रतिनिधि बनकर कॉल करते हैं, संदिग्ध लिंक भेजते हैं या नकली ऐप डाउनलोड करने को कहते हैं। ऐसे मामलों में नागरिकों को किसी भी परिस्थिति में अपना ओटीपी, एटीएम पिन, यूपीआई पिन, पासवर्ड या आधार-पैन जैसे व्यक्तिगत दस्तावेज साझा नहीं करने चाहिए और न ही किसी अनजान लिंक या क्यूआर कोड को स्कैन करना चाहिए। बैंक या सरकारी संस्थाएँ कभी भी फोन पर व्यक्तिगत जानकारी या पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहतीं, अतः ऐसी मांग होने पर समझ लेना चाहिए कि यह धोखाधड़ी का प्रयास है। हाल ही में बढ़ते “डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए तरीकों के बारे में भी लोगों को सचेत रहने की आवश्यकता है, क्योंकि कोई भी वास्तविक पुलिस या एजेंसी वीडियो कॉल पर डराकर पैसे नहीं माँगती। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के खाते से संदिग्ध लेन-देन होता है या धोखाधड़ी का प्रयास किया जाता है, तो तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें, क्योंकि समय पर की गई शिकायत से पैसे की रिकवरी की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों से लड़ाई में जनता की जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है और हरियाणा पुलिस अपनी छापेमारी व कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ लगातार नागरिकों को जागरूक करने का अभियान भी चला रही है, ताकि राज्य को साइबर अपराध मुक्त बनाने के लक्ष्य को पूरा किया जा सके
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