
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
सूरजकुंड (फरीदाबाद):हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष ने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन का मजबूत व जीवंत उदाहरण है। यह लोकल से ग्लोबल-आत्मनिर्भर भारत के मंत्र से प्रेरित है। सूरजकुंड मेला एक वाइब्रेंट प्लेटफार्म के तौर पर उभर रहा है। जहां ट्रेडिशन और नवाचार मिलकर काम करते हैं। राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष रविवार को 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्म निर्भर शिल्प महोत्सव के समापन अवसर पर अपना संबोधन दे रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मेले से ही लोकल शिल्पकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्लोबल पहचान मिली है और प्रदेश में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में सजग है।

इससे पहले राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष व उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मित्रा घोष ने सहकारिता, पर्यटन एवं विरासत मंत्री डा. अरविंद कुमार शर्मा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल, मेयर प्रवीण बत्रा जोशी के साथ मेले का अवलोकन किया। अवलोकन के दौरान सभी मेहमानों का आपणा घर पर हरियाणवी पगड़ी से स्वागत किया गया। इस बीच राज्यपाल ने कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए शिल्पकारों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया।

सूरजकुंड शिल्प मेला को भारतीय सभ्यता और संस्कृति विरासत तथा आत्मनिर्भरता की सामूहिक इच्छा को खूबसूरती से प्रदर्शित करने वाला बताते हुए उन्होंने कहा कि यह मेला विविधता में एकता की भावना को बल दे रहा है। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया भर के कारीगरों,बुनकरों और लोक कलाकारों के कौशल , दृढ़ निश्चय व रचनात्मकता की झलक मेले में दिखाई दी है। उन्होंने कहा कि मेले में मिस्र ने चौथी बार पार्टनर नेशन के तौर पर हिस्सा लिया है, जिससे हमारे सांझा सांस्कृतिक और सभ्यता के संबंधों को मजबूती मिली है।

वहीं इस बार मेले में थीम स्टेट उत्तर प्रदेश और मेघालय ने भी अपनी वाइब्रेंट लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित कर मेले को बेहतर बनाया है। मेले में 50 से ज्यादा देशो की लगभग 800 कलाकारों और कारीगरों ने हिस्सा लेकर पिछले वर्षों की तुलना में मेले के बढ़ते ग्लोबल रुतबे को मजबूती प्रदान की है। यह मेला पारंपरिक शिल्प के संरक्षण को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्कृति सहयोग को बढ़ावा देने में सहायक है। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड मेला दुनिया के संस्कृति और पर्यटन के नक्शे पर अपनी गहरी छाप छोड़ता रहेगा। उन्होंने देश के शिल्पकारों से आह्वान किया कि वे भारतीय कला, संस्कृति को आगे बढ़ाने की दिशा में अपना योगदान दें।

शिल्प महोत्सव के समापन अवसर पर राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष का स्वागत करते हुए सहकारिता एवं पर्यटन मंत्री डा. अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि सूरजकुंड मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है। यह वह मंच है जहां परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम दिखाई देता है। यहां हर कलाकृति केवल एक वस्तु नहीं होती, बल्कि उसके पीछे किसी कारीगर की पीढिय़ों से चली आ रही परंपरा, उसकी मेहनत, उसका सपना और उसकी पहचान जुड़ी होती है। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्टï्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव आत्मनिर्भरता को मजबूत करने, एक्सपोर्ट की संभावना को बढ़ाने और लोकल प्रोडक्ट्स को सही मायने में ग्लोबल प्लेटफॉर्म देने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि शनिवार तक इस मेले में 17 लाख 88 हजार लोगों ने विजिट किया और आज रविवार को करीब 03 लाख लोग पहुंचे हैं।उन्होंने कहा कि इस वर्ष मेले की थीम लोकल से ग्लोबल – आत्मनिर्भर भारत की पहचान रही, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की वर्तमान विकास यात्रा का मूल मंत्र है। आज भारत का कारीगर केवल अपने गांव या राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका हुनर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रहा है। सूरजकुंड मेला इस परिवर्तन का सशक्त प्रतीक बनकर सामने आया है, जहां स्थानीय शिल्प को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर मिला। आज देश में कारीगरों और शिल्पकारों को सशक्त बनाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्हें कौशल विकास, आधुनिक प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने के लिए योजनाएं लागू की गई हैं, जिससे पारंपरिक शिल्प को नई ऊर्जा मिली है। सूरजकुंड मेला ऐसे प्रयासों का एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है।उन्होंने कहा कि इसके साथ ही भागीदार देश इजिप्ट की सहभागिता ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय आयाम प्रदान किया। इजिप्ट और भारत दोनों प्राचीन सभ्यताओं के धनी देश हैं, जिनकी सांस्कृतिक परंपराएं हजारों वर्षों पुरानी हैं। इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय सहभागिता न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देती है, बल्कि देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को भी सुदृढ़ करती है।सहकारिता मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार पर्यटन, संस्कृति और विरासत को रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक विकास से जोड़ने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने दोहराया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि हरियाणा केवल औद्योगिक प्रगति का ही प्रतीक न रहे, बल्कि एक सशक्त सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित करे। सूरजकुंड मेला इस सोच का सजीव उदाहरण है।सहकारिता एवं पर्यटन मंत्री ने कहा कि पिछले पंद्रह दिनों में देश-विदेश से लाखों आगंतुकों ने इस मेले का भ्रमण किया और कारीगरों की कला को सराहा। यह इस बात का प्रमाण है कि हमारे पारंपरिक हस्तशिल्प के प्रति लोगों का आकर्षण और विश्वास निरंतर बढ़ रहा है। यह मेला आमजन और कारीगरों के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य कर रहा है।
वीरगति को प्राप्त हुए शहीद इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद को भावभीनी श्रद्धांजलि
पर्यटन मंत्री ने मेला परिसर में सुरक्षा, स्वच्छता और व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए पर्यटन विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सराहना की। उन्होंने 7 फरवरी को झूला हादसे के दौरान पर्यटकों की जान बचाते हुए वीरगति को प्राप्त हुए शहीद इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी शहादत सदैव स्मरणीय रहेगी।इस अवसर पर सहकारिता एवं पर्यटन मंत्री डा. अरविंद कुमार शर्मा की धर्मपत्नी डा. रीटा शर्मा, पुलिस आयुक्त सतेंद्र कुमार गुप्ता, हरियाणा पर्यटन निगम के एमडी पार्थ गुप्ता, उपायुक्त आयुष सिन्हा सहित अन्य अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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