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Surajkund चंडीगढ़ फरीदाबाद राष्ट्रीय हरियाणा हाइलाइट्स

फरीदाबाद:सूरजकुंड शिल्प मेला भारत की आत्मा और कारीगरों के सम्मान का प्रतीक – नायब सिंह सैनी

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
चंडीगढ़:हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि 39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आत्म निर्भरता की भावना से जोड़ रहा है। यह मेला ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को सशक्त आधार प्रदान करते हुए स्थानीय शिल्प, कला और कारीगरों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है। इस वर्ष ‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत की पहचान’ थीम पर आधारित यह मेला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन को धरातल पर उतारने का प्रयास है, जिसमें हर कारीगर के हुनर को सम्मान और बाजार दोनों मिलें। मुख्यमंत्री शनिवार को उप राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा फरीदाबाद में 39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले के उद्घाटन करने उपरांत उपस्थित जन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल, विरासत व पर्यटन मंत्री डॉ. अरविन्द शर्मा , खाद्य , नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री राजेश नगर, खेल राज्य मंत्री  गौरव गौतम, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल कौशिक भी उपस्थित थे। 

नायब सिंह सैनी ने उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का विशेष रूप से स्वागत करते हुए कहा कि इस मेले में आने से देश-विदेश के शिल्पकारों को नई प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि आज हम कला और शिल्प के उस महाकुंभ के साक्षी बनने जा रहे हैं, जिसकी न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में विशेष पहचान है। मुख्यमंत्री ने विदेशी मेहमानों का हरियाणा की धरा पर स्वागत करते हुए कहा कि सूरजकुंड शिल्प मेला हमारी प्राचीनता और आधुनिकता का संगम है। आज हम यहां उस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, जो पिछले 38 वर्षों से भारतीय लोक कला और संस्कृति को जीवित रखे हुए है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर का अर्थ केवल आर्थिक स्वतंत्रता नहीं है। इसमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना, अपनी विरासत को सहेजना और उसे दुनिया के सामने शान से प्रस्तुत करना भी शामिल हैं। सूरजकुंड मेला इसी ‘आत्मनिर्भरता’ का जीता-जागता उदाहरण है। यहां मिट्टी के बर्तनों से लेकर हाथ से बुने हुए कपड़े तक, हर एक वस्तु में भारत की आत्मा बसती है। इस मेले के असली नायक हमारे शिल्पकार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार भी देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन करने आए हैं। चाहे वह पूर्वोत्तर भारत की बांस की कारीगरी हो, दक्षिण की सिल्क साड़ियां हों, पश्चिम की रंग-बिरंगी कढ़ाई हो या उत्तर भारत की लकड़ी की नक्काशी हो, पूरा ‘अतुल्य भारत’ आज यहां सूरजकुंड में सिमट आया है। उन्होंने कहा कि इस बार सहयोगी और भागीदार राज्य के रूप में उत्तर प्रदेश और मेघालय की विशेष उपस्थिति है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय पटल पर मित्र देश मिस्र की भागीदारी इस मेले को सही मायने में अंतर्राष्ट्रीय बनाती है। यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान ही है, जो देशों के बीच की दूरियों को मिटाता है और दिलों को जोड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। पर्यटन विकास का एक ऐसा इंजन है जो रोजगार के सबसे अधिक अवसर पैदा करता है। सूरजकुंड मेला इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। अगले 15 दिनों तक, यानी 15 फरवरी तक, यहां लाखों पर्यटकों के आने से न केवल शिल्पकारों को बाजार मिलेगा, बल्कि स्थानीय टैक्सी चालकों, होटल व्यवसायियों और छोटे दुकानदारों को भी रोजगार मिलेगा। जब यहां आए पर्यटक कोई वस्तु खरीदते हैं, तो वे केवल एक उत्पाद नहीं खरीदते, बल्कि एक शिल्पकार की कला का सम्मान करते हैं और ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को सिद्ध करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में शिल्पकला को बढ़ावा देने के लिए इसी तरह के मंच प्रदान किए जाते हैं। इस शिल्प मेले के अलावा जिला स्तर पर सरस मेले लगाए जाते हैं, जिनमें शिल्पकारों और बुनकरों को अपनी शिल्पों का प्रदर्शन करने का अवसर मिलता है। यहीं पर हर साल दीपावली मेले का आयोजन भी किया जाता है। हर साल अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव और कुरुक्षेत्र में भी हर वर्ष अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर भी भव्य सरस मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देशभर के शिल्पकार शामिल होते हैं। सरकार ने माटी कला को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में ‘माटी कला बोर्ड’ का गठन किया है। श्री विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय में भी परंपरागत शिल्पों में प्रशिक्षण दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने शिल्पकारों से अनुरोध करते हुए कहा कि वे अपनी कला को और अधिक निखारने के लिए आधुनिक तकनीक का भी प्रयोग करें। यह आधुनिक तकनीक का ही कमाल है कि दूर-दराज में बैठा एक शिल्पी आज ऑनलाइन बिक्री प्लेटफार्म से अपने उत्पादों को दुनिया के किसी भी कोने में बेच सकता है। इसी तरह से शिल्पकार हस्त उत्पादों की डिजाइनिंग में भी आधुनिक तकनीक का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि सभ्यताएं समागम और सहयोग से ही समृद्ध होती हैं। इसलिए, इस दिशा में दुनिया के दूसरे सभी देशों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस मेले का आगे और भी विस्तार हो जिससे ज्यादा से ज्यादा संख्या में देश साथ आएं। देश और विदेशों से आए कलाकार और पर्यटक हरियाणा के अतिथि सत्कार की एक सुखद अनुभूति लेकर जाएंगे। यह अनुभूति उन्हें बार-बार हरियाणा आने के लिए प्रेरित करेगी। हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि 39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1987 से शुरू हुआ यह मेला आज देश-विदेश में भारतीय सांस्कृतिक विरासत, शिल्प और कला की एक सशक्त पहचान बन चुका है। सूरजकुंड मेला ‘लोकल टू ग्लोबल’ विजन का सशक्त मंच बनकर स्वदेशी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प में हरियाणा का विशेष योगदान सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी निरंतर इसी दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जहां 44 देशों ने मेले में भागीदारी की थी, वहीं इस वर्ष 50 से अधिक देशों के 700 से ज्यादा विदेशी प्रतिनिधि और डेलीगेट्स हिस्सा ले रहे हैं। इस वर्ष का पार्टनर नेशन मिस्र (इजिप्ट) है, जो सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और सुदृढ़ करेगा। यह मेला कलाकारों और शिल्पकारों को न केवल अपनी कला प्रदर्शित करने का मंच देता है, बल्कि उन्हें अधिक राजस्व अर्जित करने और अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने का अवसर भी प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर है, जिनमें 7000 वर्ष पुरानी सभ्यता वाली राखीगढ़ी विश्व स्तर पर प्रदेश की पहचान को सुदृढ़ करती है। 

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