अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद:अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले के अंतर्गत आज बड़ी/मुख्य चौपाल में अंतरराष्ट्रीय लोक कलाओं की रंगारंग और भव्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। सांस्कृतिक विविधता से सजी इस संख्या में विभिन्न देशों से आए कलाकारों ने अपनी-अपनी पारंपरिक लोक संस्कृति का नृत्य, संगीत और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।कार्यक्रम के दौरान इराक, जॉर्डन, गाम्बिया, मोज़ाम्बिक सहित अन्य देशों के कलाकारों ने मंच पर अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को जीवंत किया। पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्यों की मधुर धुनों और ऊर्जावान नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर प्रस्तुति के उपरांत चौपाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी, जो कलाकारों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना का प्रमाण थी।

इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का मुख्य उद्देश्य विभिन्न देशों की समृद्ध लोक संस्कृतियों को एक मंच पर लाकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना रहा। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी-अपनी सभ्यता, परंपराओं और जीवनशैली की झलक दिखाई, जिससे दर्शकों को विश्व की विविध संस्कृतियों को करीब से जानने का अवसर मिला।सूरजकुंड मेले की पहचान हमेशा से ही लोककला, संस्कृति और परंपरा के वैश्विक संगम के रूप में रही है। अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की इन प्रस्तुतियों ने मेले की इसी पहचान को और अधिक सुदृढ़ किया है। स्थानीय दर्शकों के साथ-साथ देश-विदेश से आए पर्यटकों ने भी कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया और कलाकारों की खुले दिल से प्रशंसा की।उल्लेखनीय है कि सूरजकुंड मेला न केवल शिल्प और हस्तकला का केंद्र है, बल्कि यह विश्वभर की लोकसंस्कृतियों को जोड़ने वाला एक सशक्त मंच भी है, जहां कला, संस्कृति और सौहार्द का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
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