
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद : नवरात्रि के तीसरे दिन महारानी माता वैष्णो देवी मंदिर में मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की भव्य रूप से पूजा की गई. इस अवसर पर मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने प्रातः कालीन आरती हवन यज्ञ का शुभारंभ करवाया. नवरात्रों के तीसरे दिन मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लाइन लगी रही और हर किसी ने माता चंद्रघंटा के सामने अपना मस्तक झुकाकर अपने मन की मुराद मांगी. मंदिर के प्रधान जगदीश भाटिया ने आए हुए सभी भक्तों को नवरात्रों की बधाई और शुभकामनाएं दी.

इस शुभ अवसर पर शहर के जाने-माने उद्योगपति आर के जैन ने माता के सामने शीश नवाया और ज्योति प्रज्वलित करके माता रानी की भव्य पूजा अर्चना की. इस मौके पर भाटिया ने आए हुए सभी भक्तों को माता रानी की चुनरी और प्रसाद भेंट किया. इसके पश्चात उन्होंने मां चंद्रघंटा की महिमा का बखान करते हुए कहा कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से माता रानी की पूजा अर्चना करते हैं और अपने मन की मुराद मांगते हैं उनकी इच्छा अवश्य पूर्ण होती है. उन्होंने बताया कि माता चंद्रघंटा वीरता, साहस और शक्ति का प्रतीक हैं।

इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण इन्हें ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है। भक्त इस दिन पीले या सुनहरे कपड़े पहनकर पूजा करते हैं। मां चंद्रघंटा की आराधना से भक्तों को निर्भयता, सौम्यता, एकाग्रता और सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। मां चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए पीला या ग्रे रंग पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। सुबह स्नान के बाद माता को पीले या लाल फूल, चंदन, अक्षत, सिंदूर और धूप-दीप अर्पित करें। माता रानी को केसर की खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए। पूजा के दौरान 108 बार इस मंत्र का जाप करें: “ॐ देवी नम: और अंत में, कपूर या घी के दीपक से मां चंद्रघंटा की आरती करें और उनसे अपने जीवन में सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
Related posts
0
0
votes
Article Rating
Subscribe
Login
0 Comments
Oldest
Newest
Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

