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फरीदाबाद

फरीदाबाद की तहसील में दो कांड, एक के उड़े होश, दूसरा बेहोश, तहसीलदारों पर भड़के पाराशर

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद: शहर की तहसीलों में बड़े-बड़े घपले जारी हैं। हाल में तहसीलों के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए थे।  फरीदाबाद की तहसीलों में फर्जी रजिस्ट्री, एक ही स्टैम्प से दो रजिस्ट्री और फर्जी रजिस्ट्री पर लोन लेने के मामले के बाद अब एक और मोड़ आ रहा है। अभी तक शहर की तहसीलों में फर्जी स्टैम्प से रजिस्ट्री का मामला आया था अब फर्जी रजिस्ट्री का मामला भी सामने आया है। एक स्टैम्प से दो रजिस्ट्री के मामले में जब तहसीलदार फंसने लगा तो अब उसने रजिस्ट्री को ही रद्द कर दिया है। बार एसोशिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति ने अध्यक्ष एडवोकेट एल एन पाराशर ये एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है।  पाराशर का कहना है कि एक स्टाम्प से जो दो रजिस्ट्री हुई थी वो चार जुलाई 2017 को हरियाणा सरकार की पोर्टल पर ऑन लाइन शो हो रही थी जिसका नंबर 3579 था। लगभग एक हफ्ते पहले रजिस्ट्री का मालिक कपिल गुप्ता नक़ल लेने गया तो उसे जो बताया गया उसे सुनकर वो बेहोश हो गया।



उसे फरीदाबाद के तहसीलदार ने बताया तुम्हारी रजिस्ट्री ही नहीं हुई। जबकि ये रजिस्ट्री 17 जून 2016 में हुई थी तीन लाख 43 हजार का स्टैम्प लिया गया था। और 16 नवम्बर 2016 को कपिल गुप्ता ने इसकी नक़ल भी निकलवाई थी और 49 लाख रूपये जमीन के मालिक को दिए थे। आपको बता दें कि इसी स्टाम्प का दुरूपयोग कर बड़खल में दूसरी रजिस्ट्री भी हुई थी। उन्होंने बताया कि 19433484 नंबर के स्टाम्प से दो बार रजिस्ट्री की गई थी और इसी स्टाम्प पेपर पर दूसरी फर्जी रजिस्ट्री 2 फरवरी 2018 को बड़खल के तहसीलदार ने रमेश गोस्वामी के नाम की थी। वकील पाराशर ने कहा कि तहसीलदार ने बड़ा गड़बड़झाला किया है और कपिल गुप्ता के साथ हुए इस घोटाले में तहसीलदार की पूरी मिली भगत है। पाराशर बताया कि एक अन्य मामला भी उनके पास आया है जिसमे रोहतक निवासी अजय गुगनानी ने दिनांक 23/5/ 2017 को स्टांप खरीदने के लिए दो लाख दस हजार रूपये ट्रेजरी के पास जमा करवाया लेकिन जांच में उन्होंने पाया कि जो प्रॉपर्टी वो खरीद रहे हैं वो अप्रूव्ड नहीं है।



इसलिए उन्होंने अपना सौदा कैंसिल कर दिया लेकिन बाद में जब वो स्टाम्प के पैसे वापस लेने के लिए ट्रेजरी में गया तो कोषाधिकारी फरीदाबाद एस के बंसल ने उसे जो कुछ बताया उसके भी होश उड़ गए। कोषाधिकारी ने उसे बताया कि आपने जिस स्टाम्प के लिए दो लाख दस हजार दिए थे उस पैसे का दुरूपयोग हो चुका है और उसी पैसे से एक रजिस्ट्री तहसील बल्लबगढ़ में दिनांक 7 जून 2017 को नेहा गोयल के नाम हो चुकी है। बेंचने वाला का नाम आशीष मलिक है।  इसके बाद अजय गुगनानी ने अपनी शिकायत लेकर प्रॉपर्टी डीलर के पास पहुंचे और अपने तीस लाख रूपये वापस मांगे और स्टाम्प के दुरूपयोग के बारे में बताया तो प्रापर्टी डीलर ने उसे नकली स्टाम्प पेपर पकड़ा दिया। नकली स्टम्प पेपर में मात्र 25 रूपये जमा पाए गए थे। इस नकली स्टाम्प पेपर को दो लाख दस हजार का बताया गया था। वकील पाराशर ने कहा कि फरीदाबाद की तहसीलों में ये सब घोटाले जारी हैं। सरकार इन घोटालेबाजों पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही है जबकि ये सरकार को ही चूना लगा रहे हैं।

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