अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डरे हुए व कॉम्प्रोमाइज हैं और यह अभूतपूर्व है कि उन्हें जनरल नरवणे, एपस्टीन फाइल्स एवं अमेरिका के साथ ट्रेड डील जैसे मुद्दों पर संसद में बोलने से रोका जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एपस्टीन खुलासों और अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे केस से मोदी डरे हुए हैं, इसी कारण उन्होंने दबाव में आकर अमेरिका के साथ ट्रेड डील की है।मंगलवार को संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में संसद में न बोलने दिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मुद्दा पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब नहीं है। मुख्य बात यह है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कॉम्प्रोमाइज़ हैं। राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि जो सौदा पिछले चार महीनों से अटका हुआ था, उस पर प्रधानमंत्री ने अचानक सोमवार शाम को हस्ताक्षर कर दिए। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी पर भयंकर दबाव है। उनकी जिस छवि को बनाने के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, वह गुब्बारा अब फूट सकता है। उन्होंने आगे कहा कि इतिहास में पहली बार नेता प्रतिपक्ष को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने नहीं दिया जा रहा है।

जब पत्रकारों ने राहुल गांधी से पूछा कि प्रधानमंत्री मोदी पर आखिर किस तरह का दबाव है, तो उन्होंने बताया कि अडानी केस और एपस्टीन फाइल्स के संभावित ख़ुलासों के दबाव में आकर प्रधानमंत्री ने ट्रेड डील पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडानी पर चल रहा केस असल में नरेंद्र मोदी और भाजपा के फाइनेंशियल स्ट्रक्चर पर हमला है। साथ ही उन्होंने कहा कि एपस्टीन फाइल्स से जुड़ी बहुत बातें आनी बाकी हैं, जिन्हें अभी अमेरिका ने जारी नहीं किया है। इसलिए मोदी दबाव में हैं।राहुल गांधी ने आगे कहा कि इस नए व्यापार समझौते में किसानों की मेहनत, खून-पसीने और देश के हितों को प्रधानमंत्री ने बेच दिया है, इसलिए उन्हें संसद में नहीं बोलने दिया जा रहा है ताकि मोदी जी के सरेंडर का ख़ुलासा न हो जाए। इससे पहले लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता ने फिर से राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया।सत्ता पक्ष के लगातार व्यवधान के बावजूद राहुल गांधी ने 2020 में लद्दाख में चीन के साथ टकराव की स्थिति पर पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के संस्मरण पर एक पत्रिका में छपे लेख का हवाला देते हुए कहा कि वह केवल यह बताना चाहते हैं कि चीन और भारत के बीच क्या हुआ और उस पर प्रधानमंत्री ने कैसी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि उन्हें क्यों रोका जा रहा है?भाषण के दौरान जब उन्हें अपनी बात रखने से रोकने की कोशिश की गई, तो राहुल गांधी ने कड़े शब्दों में आपत्ति जताई। पीठासीन अधिकारी द्वारा ‘अनुमति’ शब्द के इस्तेमाल पर भी ऐतराज़ जताते हुए उन्होंने कहा कि वह नेता प्रतिपक्ष हैं और सदन में बोलना उनका संवैधानिक अधिकार है। संसद में चर्चा के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखे एक पत्र में राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सभापति के निर्देश पर उन्होंने सदन में जिस पत्रिका का हवाला दिया था, उसे प्रमाणित भी कर दिया था। इसके बावजूद उन्हें लोकसभा में बोलने से रोका गया,जो लंबे समय से चली आ रही संसदीय परंपराओं और पूर्व सभापतियों के निर्णयों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि किसी दस्तावेज को प्रमाणित किए जाने के बाद उस पर बोलने या उसका हवाला देने की अनुमति देना सभापति की जिम्मेदारी होती है और उसके बाद सरकार को जवाब देना होता है। राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर जानबूझकर बोलने से रोका गया, जबकि राष्ट्रपति के अभिभाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा एक प्रमुख विषय था। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करने वाली अभूतपूर्व स्थिति बताते हुए कहा कि यह लोकतंत्र पर एक गंभीर आघात है। राहुल गांधी ने अपने पत्र में यह भी कहा कि लोकसभा अध्यक्ष सदन के निष्पक्ष संरक्षक होते हैं और प्रत्येक सदस्य, विशेषकर विपक्ष के सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना उनका संवैधानिक और संसदीय दायित्व है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता और सदन के प्रत्येक सदस्य को बोलने का अधिकार लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है, और इस अधिकार से वंचित किया जाना संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।
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