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दिल्ली ब्रेकिंग:राहुल गांधी के घर आज पहुंची दिल्ली पुलिस नए नोटिस के साथ,पूछे सवाल के जवाब-लाइव वीडियो सुने


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली: जयराम रमेश ने पत्रकार साथियों को संबोधित करते हुए कहा कि नमस्कार साथियों, आज आपको डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी जी और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी संबोधित करेंगे। पहले सिंघवी साहब संबोधित करेंगे, उसके बाद अशोक गहलोत जी संबोधित करेंगे। डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि दोस्तों, बहुत संक्षिप्त में हिंदी में और फिर अंग्रेजी में संबोधित करूंगा। 16 तारीख को सुबह माननीय राहुल गांधी जी को एक नोटिस दिया गया। उस नोटिस में क़रीब-क़रीब 2 पन्नों जितने लंबे प्रश्न थे… वो प्रश्न कई ऐसे मुद्दे उठा रहे थे कि भारत जोड़ो यात्रा में… जिसमें कि लाखों लोग मिले राहुल गांधी जी से… उनके विषय में, कुछ विक्टिम्स के बारे में, उनके नाम, उनकी जगह, क्या वारदात थी, इत्यादि-इत्यादि। उस पर मैं अभी आऊंगा, लेकिन ये हुआ 16 को। दिल्ली पुलिस ने आकर ये नोटिस दिया उनको कि हम आपसे इन प्रश्नों का उत्तर चाहते हैं। ये प्रश्न थे राहुल जी के उस वक्तव्य के विषय में, जहाँ उन्होंने कहा था कि कई महिलाएं जो मिलती हैं, वो डोमेस्टिक वायलेंस की बात करती हैं, बलात्कार की बात करती हैं और परिवार में उत्पीड़न की बात करती हैं और इसके विषय में इस क्वेश्चनेयर में उनके नाम, उनकी रहने की जगह, क्या हुआ, क्या नहीं हुआ… ये सब पूछा गया है दिल्ली पुलिस द्वारा।

आज फिर 19 तारीख को सुबह दिल्ली पुलिस के दस्ते और उनके साथ कुछ और लोग आए वही प्रश्न वापस पूछने के लिए नया नोटिस लेकर। बाकी चीजें हम बाद में लिखित रूप से देंगे दिल्ली पुलिस को, लेकिन हमने उनको आज कहा… हम सब लोग वहाँ उपस्थित थे और मैं आपसे शेयर करना चाहता हूं – ये एक बहुत ही विचित्र पहलू है, एक नया आयाम बनाया गया है, एक उत्पीड़न का, प्रतिशोध की राजनीति का, धमकाने और धमकी की राजनीति का। मैं ये क्यों कह रहा हूं – मैं इसलिए कह रहा हूं कि इसका प्रथम बिंदु है कि 4,000 किलोमीटर की यात्रा… 12 प्रदेशों, 2 यूनियन टेरिटरी… जिसके दौरान श्री राहुल गांधी लाखों-करोड़ों लोगों से मिले, 140 दिन तक चली… उसके विषय में तीन दिन में दो बार आना और प्रश्न पूछना कि वो कौन महिलाएं थीं, कब हुआ, कैसे हुआ उनके साथ, आपने ये किया, वो किया, उसके विषय में शिकायत कब की, कहाँ की, इत्यादि-इत्यादि। हम सबको लगा और हमने पुलिस दस्ते से भी कहा कि ज़रा कृपा करके बताएंगे कि आपने कितने ऐसे राजनीतिक अभियानों के विषयों में ऐसे प्रश्न पूछे हैं… सत्तारूढ़ पार्टी से विशेष रूप से या किसी और अभियान यात्रा के विषय में। ये अगर राजनीतिक प्रतिशोध नहीं है, उत्पीड़न नहीं है, धमकी की राजनीति नहीं है तो क्या है?

दूसरा, जैसा आप जानते हैं कि जब लीडर एक राजनीतिक अभियान करते हैं, तो हर पक्ष के लाखों लोग उनके सामने आते हैं। कई की अलग-अलग शिकायतें होती हैं, कई के अलग-अलग दस्तावेज होते हैं, कई की अलग-अलग भावनाएं होती हैं, उन सबको सुनना पड़ता है और जहाँ संभव होता है, वहाँ पर जो लोग चल रहे होते हैं साथ, उनको कहा जाता है कि आप ध्यान दें इसमें। कोई भी लीडर हर इंडिविजुअल शिकायत के विषय में यात्रा रोक कर कोई एक्शन नहीं लेता है, ना लेना संभव है और ना ये किसी के दिमाग में भी आता है और ना आज तक मैं समझता हूं कि 70 वर्ष, 75 वर्ष में भारतवर्ष में इस प्रकार के बेहूदे प्रश्न किसी सरकार ने, किसी पुलिस फोर्स ने पूछे हैं किसी अभियान, किसी लीडर से।

तीसरा पहलू, जिस वक्तव्य का संज्ञान लिया गया है इस क्वेश्चनेयर में, वो 30 जनवरी के श्रीनगर के वक्तव्य के बारे में कहा गया है। तो 30 जनवरी के श्रीनगर के वक्तव्य के बारे में दिल्ली पुलिस लगता है अभी जगी है 45 दिन बाद और 45 दिन सुप्त होने के बाद और इतनी दूरी के बाद, जगने के बाद दो बार तीन दिन के अंदर पहुंच गई है, अब बहुत ज्यादा जल्दी है उनको। 45 दिन तक कोई प्रश्न नहीं, कुछ नहीं। ये तो आप ही निर्णय ले सकते हैं कि ये अचानक इतनी ज्यादा अलर्टनेस, गति और दिशा कैसे मिल गई दिल्ली पुलिस को। क्या वो राहुल गांधी जी के प्रश्नों से जो पार्लियामेंट में वो करते हैं, उनके संबोधनों से, उनके भाषणों से या आजकल जो विशेष फोकस राहुल गांधी जी के ऊपर है सरकार का, उस कारण से… जो वो डिफिकल्ट, अनकंफर्टेबल प्रश्न पूछते हैं,

उस कारण से ये अचानक दिल्ली पुलिस पहुंच गई है 45 दिन बाद और हम इसकी भर्त्सना करते हैं। हम निश्चित रूप से जितने भी तथ्य हैं, जितने भी डिटेल्स हैं उनको जोड़ कर एक विस्तृत जवाब देंगे। लेकिन आज हम आपके समक्ष इसलिए आए हैं कि हम इस चीज़ की भर्त्सना करते हैं कि राजनीति को किस स्तर पर आपने गिराया है। किस प्रकार से आप हैरेसमेंट में लगे हैं और किस प्रकार से आपने किसी सीमा को नहीं छोड़ा है… ये पूरा देश देख रहा है। राहुल गांधी जी के दिए वक्तव्य पार्लियामेंट के अंदर या बाहर हैं, उनको एक प्रकार से प्रमाणित कर रहे हैं ये। असहिष्णुता की चरम सीमा हो गई है… उत्पीड़न, धमकियों और प्रतिशोध की भी। तो हम बाकी रिप्लाई अपने विस्तृत रिप्लाई में देंगे, जो आपके साथ बाद में शेयर होगा।

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