अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने कहा कि एआई पर बड़े दावे करने वाली मोदी सरकार आलोचनात्मक एआई वीडियो हटवाकर दोहरा रवैया अपना रही है। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि बीते छह हफ्तों में कांग्रेस के नौ एआई वीडियो डिलीट कराए गए, जबकि सभी वीडियो पर कानून के अनुसार स्पष्ट एआई डिस्क्लेमर मौजूद थे।सुप्रिया श्रीनेत ने बताया कि कुछ वीडियो डिलीट करने के आदेश भाजपा शासित बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र की पुलिस द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भेजे गए, जबकि कुछ वीडियो को डिलीट करवाने का आदेश सीधे सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के मंत्रालय से आए।
श्रीनेत ने स्पष्ट किया कि हटवाए गए इन वीडियो पर कानून के तहत एआई जनरेटेड वीडियो का डिस्क्लेमर था, जिससे साफ होता है कि किसी को भ्रमित करने की कोई कोशिश नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि इन वीडियो में कांग्रेस पार्टी ने वही दिखाया था जो वह सार्वजनिक रूप से सड़क से लेकर संसद में बोल रही है, जैसे कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनरल नरवणे और सेना को यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया कि ‘जो उचित समझो, वही करो’। कैसे मोदी ने राष्ट्रहित की अनदेखी करते हुए अमेरिका के साथ ट्रेड डील की और भारत के किसानों के हक की बलि चढ़ा दी, रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया। कैसे मोदी एपस्टीन की सलाह पर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को खुश करने में जुट गए। कैसे नरेंद्र मोदी ने अडानी के ऊपर अमेरिका में कसते कानूनी शिकंजे से बौखलाकर ट्रंप के आगे सरेंडर कर दिया और कैसे प्रधानमंत्री तीन महिला सांसदों से डरकर लोकसभा में नहीं आए। उन्होंने कहा कि इनमें से कोई भी बात काल्पनिक या गलत नहीं है। ये सभी वही मुद्दे हैं, जिन पर पूरा देश सवाल पूछ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक व्यंग्य करना और तीखी टिप्पणी करना डीपफेक नहीं है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि वीडियो को डिलीट करवाना 2021 के आईटी नियमों का राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ घोर दुरुपयोग है। उन्होंने कहा कि वीडियो हटाने का कोई कारण नहीं बताया जा रहा। कोई पारदर्शिता नहीं है, कोई सार्वजनिक आदेश नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे आदेश तानाशाही शासन में दिए जाते हैं, लोकतंत्र में नहीं। उन्होंने बताया कि कांग्रेस सोशल मीडिया टीम में काम करने वाले युवाओं को भी पुलिस से फोन करवाकर डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि छोटी और निराधार बातों पर सरकार से सवाल पूछने वाले और जनता से जुड़े जरूरी मुद्दों को उठाने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को नोटिस भेजा जा रहा है, उनके चैनल को डिमोनेटाइज़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार सवालों और सच से इतना डरती है कि इन डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के पैसे का स्रोत ही बंद करने का काम कर रही है।सुप्रिया श्रीनेत ने आने वाले दिनों में ‘सहयोग’ नामक ऑनलाइन सेंसरशिप पोर्टल के प्रभावी होने से उत्पन्न होने वाली स्थिति को लेकर भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि यह पोर्टल सरकारी अधिकारियों को किसी भी सोशल मीडिया कंटेंट को हटवाने का आदेश जारी करने का अधिकार देगा। दिल्ली में चल रहे एआई समिट पर तंज कसते हुए श्रीनेत ने कहा कि एक वैश्विक आयोजन को मोदी के फ़ोटो शूट में बदल दिया गया, जो शर्मनाक है। उन्होंने सम्मेलन में कुव्यवस्थाओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि टेक इवेंट होने के बावजूद इंटरनेट स्थिर नहीं था और लोगों को लैपटॉप लाने तक से रोका गया। एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी द्वारा चीनी रोबोट को खरीदकर उसे अपना आविष्कार बताने को अक्षम्य करार देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी चैनल व आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसका प्रचार किया तथा चीनी मीडिया ने हमारा मजाक उड़ाया। श्रीनेत ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की विरासत आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे संस्थान हैं। वहीं, मोदी सरकार की विरासत फेक न्यूज फैक्ट्री, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी और वह निजी यूनिवर्सिटी है, जिसने देश की छवि धूमिल की है।सुप्रिया श्रीनेत ने सवाल किया कि अगर सरकार को एआई कंटेंट से इतनी दिक्कत है, तो देश में एआई समिट क्यों करवाया जा रहा है और कॉलेजों में इसे क्यों पढ़ाया जा रहा है?
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