अरविन्द उत्तम की रिपोर्ट
नोएडा: छह सौ करोड़ रुपए खर्च कर यह अस्पताल इसलिए बनाया गया था कि गरीबों को उचित इलाज मिल सके, लेकिन यूरिनरी रोग से पीड़ित एक कैब ड्राइवर की इलाज के दौरान हुई मौत से इस अस्पताल की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। कैब ड्राइवर के परिजनों ने जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही किए जाने का आरोप लगा कर हंगामा किया. इस मामले को डीएम ने संज्ञान में लेकर सिटी मजिस्ट्रेट को जांच कर उचित विधिक कार्रवाई करने का आदेश दिया है. सिटी मजिस्ट्रेट ने जिला अस्पताल पहुंच कर मामले की जांच शुरु कर दी है. जिला अस्पताल के बाहर फर्श पर पड़ा तड़फ रहे मरीज का नाम प्रकाश है.

यूरिनरी रोग से पीड़ित प्रकाश इलाज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में चल रहा था जो दिल्ली मदनपुर खादर के पास अली गांव निवासी है. देर रात पेशाब बंद होना एवं सांस लेने में तकलीफ पर उसके परिजन सफदरजंग ले जाने के बजाय नोएडा के जिला अस्पताल पास होने के कारण उसे लेकर यहां आ गए . पहले डॉक्टर और स्टाफ इलाज के नाम पर भटकाते रहे। प्रकाश की पत्नी सरिता का कहना कि पति की मौत चिकित्सकों की लापरवाही से हुई है। चिकित्सक ने सही इलाज नहीं किया और न ही मरीज को रेफर किया। हालत गंभीर होने के बाद पेशाब बंद होने की शिकायत पर यूरिन पास करने के लिए (कैथेटर) लगाया, लेकिन मरीज का दर्द बंद नहीं हुआ उसे घर जाने को कहा दिया।
अस्पताल के गेट पर तबीयत बिगड़ गई। मरीज बेहोश होकर जमीन पर गिर गया। सुरक्षा गार्डों की मदद से पुन: इमरजेंसी में भर्ती कराया , लेकिन जब तक डॉक्टर इलाज शुरू करते मरीज की मौत हो चुकी थी।

इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सकों ने करीब 20 मिनट तक मरीज के मौत की बात छुपाए रखी। नाराज परिजनों ने दो घंटे तक अस्पताल परिसर में हंगामा किया। प्रबंधन ने पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने आकर मामले को शांत किया। इस मामले को डीएम ने संज्ञान में लेकर सिटी मजिस्ट्रेट को जांच कर उचित विधिक कार्रवाई करने का आदेश दिया है. सिटी मजिस्ट्रेट धर्मेंद्र सिंह ने जिला अस्पताल पहुंच कर मामले की जांच शुरु कर दी है. प्रकाश के शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। शव का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के पैनल से कराया जायेगा, पूरे मामले में सीएमओ डा. सुनील कुमार शर्मा से रिपोर्ट तलब की है।
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