
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़: हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त (एफसीआर) डॉ. सुमिता मिश्रा ने आज राज्यभर में भूमि बंटवारा (पार्टिशन) मामलों के शीघ्र निपटारे के उद्देश्य से व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए। इस पहल का उद्देश्य राजस्व न्यायालयों में देरी के कारण लंबे समय से परेशान हजारों नागरिकों को राहत प्रदान करना है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि भूमि बंटवारा कार्यवाही राजस्व अधिकारियों की सबसे महत्वपूर्ण वैधानिक जिम्मेदारियों में से एक है। विस्तृत समीक्षा के बाद एफसीआर ने समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए तत्काल अनुपालन हेतु कई निर्देश जारी किए हैं। नए निर्देशों के तहत प्रत्येक सहायक कलेक्टर (द्वितीय श्रेणी) को प्रति माह न्यूनतम 12 बंटवारा मामलों का निपटारा अनिवार्य रूप से करना होगा। इन लक्ष्यों की कड़ाई से निगरानी के लिए तीन-स्तरीय मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित किया गया है। अनुपालन की समीक्षा उप आयुक्त, मंडल आयुक्त और वित्त आयुक्त (राजस्व) स्तर पर मासिक रूप से की जाएगी। सभी जिलों को सख्त निगरानी सुनिश्चित करने और बिना चूक मासिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
कार्यभार के असमान वितरण पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि वर्तमान में कुछ तहसीलदार अपेक्षाकृत कम कार्यभार वाली शाखाओं में तैनात हैं। संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे लंबित बंटवारा मामलों को ऐसे तहसीलदारों को स्थानांतरित करें। इन अधिकारियों के लिए प्रति माह न्यूनतम 20 मामलों का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही, जिला कलेक्टरों को अपने प्रशासनिक नियंत्रण में सभी राजस्व न्यायालयों के बीच बंटवारा मामलों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आपसी सहमति से समाधान को बढ़ावा देने और मुकदमेबाजी कम करने के लिए एफसीआर ने वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) तंत्र लागू किया है। इसके तहत उपायुक्त संविदा आधार पर सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों की सेवाएं लेकर लंबित बंटवारा मामलों का निपटारा कर सकते हैं। डॉ. मिश्रा ने बताया कि ये सेवानिवृत्त अधिकारी गांव स्तर पर एडीआर शिविर आयोजित करेंगे, जहां विवादित पक्षों को आपसी सहमति से समाधान के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सहमति बनने के बाद संबंधित पक्ष विधिक क्रियान्वयन के लिए संबंधित राजस्व अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होंगे। इस व्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति सफल निपटारे पर 10,000 रुपये का मानदेय स्वीकृत किया गया है,

जिसे विवादित पक्ष समान रूप से वहन करेंगे। पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु एडीआर तंत्र के लिए विस्तृत दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं। संस्थागत क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए डॉ. सुमिता मिश्रा ने उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि जहां आवश्यक हो वहां राजस्व अधिकारियों को अतिरिक्त स्वतंत्र रीडर उपलब्ध कराए जाएं और स्वतंत्र राजस्व न्यायालय स्थापित किए जाएं। नियमित न्याय उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नियमित तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को सप्ताह में न्यूनतम तीन दिन राजस्व न्यायालय लगाने तथा अन्य नामित अधिकारियों को सप्ताह में पांच दिन न्यायालय लगाने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ. मिश्रा ने कहा कि कार्यकुशलता बढ़ाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक प्रदर्शन समीक्षा तंत्र लागू किया गया है। बंटवारा मामलों से जुड़े अधिकारियों के प्रदर्शन की त्रैमासिक समीक्षा की जाएगी। प्रोत्साहन स्वरूप, शीर्ष पांच प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों (जो पहले से राजस्व भूमिकाओं में नहीं हैं) को प्रशासनिक व्यवहार्यता के अधीन अपनी पसंद की तहसीलों में तैनाती दी जा सकती है। वहीं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लगातार लक्ष्यों को पूरा न कर पाने वाले तहसीलों में तैनात निचले पांच अधिकारियों को गैर-राजस्व दायित्वों में स्थानांतरित किया जा सकता है।यह “कैरट एंड स्टिक” नीति राजस्व प्रशासन में दक्षता और संवेदनशीलता की संस्कृति विकसित करने के लिए अपनाई गई है। प्रतिस्थापित धारा 111ए का तत्काल क्रियान्वयन उन्होंने आगे बताया कि निर्देशों का एक महत्वपूर्ण पहलू प्रतिस्थापित धारा 111ए के प्रवर्तन से संबंधित है, जो संयुक्त खातेदारी के मामलों में अनिवार्य बंटवारे से जुड़ी है। इस धारा के तहत मंडल आयुक्त को अधिसूचना जारी कर यह निर्दिष्ट करना होता है कि यह प्रावधान किस तिथि से और किन राजस्व क्षेत्रों पर लागू होगा। अतः सभी मंडल आयुक्तों को निर्धारित प्रारूप के अनुसार तीन दिनों के भीतर आवश्यक अधिसूचना तत्काल जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। एफसीआर ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि उपरोक्त सभी आदेशों का अक्षरशः और भावना के अनुरूप तत्काल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। बंटवारा मामलों को राजस्व न्यायालयों के कार्यों में प्राथमिकता दी जाएगी और निर्धारित लक्ष्यों, समय-सीमाओं व प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी जिलों को प्रतिस्थापित धारा 111ए के प्रावधानों को बिना किसी और विलंब के लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ मिश्रा ने आगे कहा कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर नियमित प्रगति रिपोर्ट वित्त आयुक्त (राजस्व) कार्यालय को भेजना अनिवार्य होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य जनता को लंबे समय से लंबित राहत प्रदान करना और राजस्व न्याय वितरण प्रणाली में विश्वास बहाल करना है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रत्येक राजस्व अधिकारी की प्रगति और प्रदर्शन की इन निर्देशों के अनुसार कड़ाई से समीक्षा की जाएगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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