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दिल्ली राजनीतिक राष्ट्रीय हाइलाइट्स

राष्ट्रीय मनरेगा मजदूर’ सम्मेलन में मनरेगा खत्म करने के खिलाफ बुलंद हुई आवाज़, देशभर से जुटे श्रमिक-कांग्रेस


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली:कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने देश के मजदूरों से आह्वान किया कि वे मनरेगा कानून की बहाली के लिए एकजुट होकर उसी तरह संघर्ष करें जैसे किसानों ने तीन काले कृषि कानूनों के खिलाफ किया था। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि पूरी कांग्रेस पार्टी मजदूरों के साथ खड़ी है और मनरेगा को उसके पुराने स्वरूप में बहाल कराने के लिए संसद से लेकर सड़क तक लड़ाई लड़ी जाएगी। कांग्रेस नेता गुरुवार को दिल्ली के जवाहर भवन में ‘रचनात्मक कांग्रेस’ द्वारा आयोजित ‘राष्ट्रीय मनरेगा मजदूर’ सम्मेलन में देशभर से आए मनरेगा मजदूरों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों मनरेगा मजदूरों और कार्यकर्ताओं ने मोदी सरकार द्वारा मनरेगा के स्थान पर लाए गए वीबी ग्राम जी कानून का विरोध किया।

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मोदी सरकार नए कानून के जरिए गरीबों को फिर से बंधुआ मजदूर बनाकर अमीरों के हाथों में सौंपने जा रही है,ताकि वे उनकी मर्जी से काम करें। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों, दलितों, पिछड़ों और कमजोर वर्गों के सम्मान व अधिकार से जुड़ा कानून था। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब किसी सरकार ने राष्ट्रपिता के नाम पर बनी योजना से उनका नाम हटाने की हिमाकत की है। मनरेगा को खत्म करना सिर्फ कमजोर तबकों पर प्रहार नहीं, बल्कि गांधी जी के ग्राम स्वराज की सोच पर हमला करने की साजिश है।बीते वर्षों में मोदी सरकार द्वारा मनरेगा योजना को कमजोर करने वाले कदमों को बताते हुए राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे ने कहा कि डिजिटल अटेंडेंस और आधार पर आधारित भुगतान प्रणाली जैसी पेचीदगियों के बहाने लाखों मजदूरों को सूची से बाहर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि न्यूनतम मजदूरी को महंगाई सूचकांक से नहीं जोड़ा गया। सरकार 100 दिन के रोजगार की गारंटी देने में भी विफल रही है और आज औसतन 40-45 दिन ही काम दिया जा रहा है, जबकि अब 125 दिन काम देने की बात की जा रही है। उन्होंने इसे गरीबों को भ्रमित करने का प्रयास बताया और कहा कि नए कानून के तहत साल में दो महीने तो काम मिलेगा ही नहीं।
खरगे ने आगे कहा कि यूपीए सरकार के दौरान लागू किए गए मनरेगा, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा का अधिकार और सूचना का अधिकार जैसे कानूनों की दुनिया भर में सराहना हुई, लेकिन मौजूदा सरकार इन्हें कमजोर कर रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गरीबी की तकलीफ नहीं पता, उनके इर्द-गिर्द सिर्फ अमीर लोग हैं। उन्होंने अंदेशा जताया कि भविष्य में यह सरकार अमीरों को ही वोट का अधिकार देने की दिशा में बढ़ सकती है। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मनरेगा को पंचायती राज व्यवस्था के जरिए चलाया जा रहा था, इसकी मूल भावना गरीबों को सम्मान के साथ रोजगार का अधिकार देने की थी। लेकिन सरकार इस अधिकार की अवधारणा को खत्म करना चाहती है। मनरेगा योजना हर गरीब व्यक्ति को काम की गारंटी देती थी, लेकिन अब मोदी सरकार द्वारा नए कानून के जरिए इसे केंद्रीकृत प्रणाली के तहत लाने की कोशिश की जा रही है, जिसमें दिल्ली से तय होगा कि किस राज्य और जिले को कितना पैसा मिलेगा।वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने आशंका जताई कि नई व्यवस्था में भाजपा शासित राज्यों को अधिक और विपक्षी शासित राज्यों को कम धन दिया जाएगा। साथ ही मजदूरों के अधिकार समाप्त हो जाएंगे और ठेकेदार व नौकरशाह पहले से भी अधिक ताकतवर बन जाएंगे।राहुल गांधी ने कहा कि तीन कृषि कानून, नोटबंदी, गलत जीएसटी और अब मनरेगा की जगह नया कानून- ये सब संविधान को कमजोर करने की कोशिश का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश का सारा धन और संपत्ति अडानी-अंबानी जैसे चुनिंदा पूंजीपतियों के हाथ में केंद्रित करना है ताकि दलित, आदिवासी, ओबीसी और गरीब वर्ग के लोग पूरी तरह उन पर निर्भर हो जाएं। उन्होंने कहा कि भाजपा संविधान, लोकतंत्र और एक व्यक्ति-एक वोट की व्यवस्था को खत्म करके आजादी से पहले वाला राजा-महाराजाओं के राज जैसा हिंदुस्तान लाना चाहती है। उन्होंने मजदूरों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि भाजपा के लोग डरपोक हैं। अगर हिंदुस्तान के गरीब लोग एक साथ खड़े हो गए, तो प्रधानमंत्री को पीछे हटना पड़ेगा।सम्मेलन की शुरुआत एक गूंजते हुए न्याय गीत के साथ हुई। एक प्रतीकात्मक कदम के रूप में श्रमिक अपने-अपने मनरेगा कार्यस्थलों से मिट्टी लेकर आए थे, जिसे एकत्र करके एकता और सामूहिक संघर्ष का संदेश दिया गया। इस अवसर पर कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश, रचनात्मक कांग्रेस के अध्यक्ष संदीप दीक्षित, चरणजीत सिंह चन्नी, उदित राज और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। इस दौरान शशिकांत सेंथिल, सप्तगिरी उलका और के. राजू ने नए कानून के प्रभावों पर अपने विचार साझा किए।

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