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अलका लम्बा ने आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में आम आदमी पार्टी के नेताओं पर बोला हमला- लाइव वीडियो सुने

अजीत सिन्हा / नई दिल्ली
श्रीमती अल्का लांबा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस पार्टी का जन्म भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के आंदोलन से हुआ, आज वही पार्टी और उसके मुखिया अरविंद केजरीवाल दिल्ली की जनता को भगवान भरोसे छोड़ सिर्फ भ्रष्टाचार के केस में जेल में बंद उनके नेताओ के बचाव में लगे हुए हैं और दिल्ली में बैठकर रिमोट से पंजाब चलाने की उनकी जिद की वजह से आज वहाँ कानून व्यवस्था का बुरा हाल है और जनता भयभीत है। बहुचर्चित शराब घोटाला जिसमें आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जेल में बंद हैं। कांग्रेस द्वारा सबसे पहले यह घोटाला उजागर किया गया था। सिसोदिया और अन्य आरोपी एक कानूनी प्रक्रिया के तहत गुजर रहे हैं। कानून अपना काम करेगा, लेकिन आए दिन खुद को कट्टर ईमानदार बताने वाले केजरीवाल और उनकी पार्टी शराब घोटाले से जुड़े एक भी प्रश्न का तथ्यात्मक उत्तर देने के बजाय आए दिन खुद के पीड़ित होने का दावा कर सहानुभूति जुटाने में लगे हुए हैं। सीबीआई के बाद अब ईडी ने भी सिसोदिया को गिरफ्तार किया है। अगर ये इतने ही कट्टर ईमानदार हैं और इन्हें अपनी बेगुनाही का यकीन है, तो क्यों अभी तक अपने ऊपर हुई एफआईआर निरस्त करवाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय नहीं गए? इसका कारण कहीं ये डर तो नहीं कि उच्च न्यायालय में मामले की कुछ ऐसी परतें खुलेंगी, जो सिसोदिया और केजरीवाल दोनों के ईमानदारी के मुखौटे को उतार कर रख देंगी?

अपने मूल उद्येश्य से इतर राजनैतिक लोगो एवं दलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए फीडबैक यूनिट का दुरूपयोग सिसोदिया ने किसके इशारे पर किया? इस मामले में गृह मंत्रालय ने सीबीआई को सिसोदिया के खिलाफ एफआईआर कर जाँच की मंजूरी दी है। बेहद चौंकाने वाले इस मामले में यह भी सामने आया कि इस विभाग द्वारा लगभग 700 मामलों में सूचनाएं इकट्ठा की गईं जिनमें 60 प्रतिशत राजनैतिक पार्टियां और नेताओं के बारे में थीं। एक करोड़ का Secret Service Fund इस यूनिट के लिए आवंटित किया गया था। दिल्ली की जनता की टैक्स की कमाई से अपने राजनैतिक विरोधियों पर जासूसी करने का मामला बेहद गंभीर और चौकाने वाला है। आम आदमी पार्टी के दूसरे पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पिछले कई महीनों से जेल में बंद हैं। कोर्ट द्वारा उन्हें जमानत तक नही मिल पा रही है। और तो और एक आदेश में जमानत खारिज करते हुए कोर्ट ने यहाँ तक कहा की प्रथम दृष्ट्या सत्येंद्र जैन के खिलाफ PMLA कानून के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत हैं। उसके बाद तिहाड़ मे सत्येंद्र जैन किस तरह अपने रसूख का इस्तेमाल कर एक बलात्कार के आरोप में सजा काट रहे कैदी से मसाज करवा रहे थे और पकवानों का लुत्फ उठा रहे थे, ये पूरे देश ने देखा। उस पर भी केजरीवाल चुप रहे और बेशर्मी की पराकाष्ठा दिखाते हुए सत्येंद्र जैन को देशभक्त बताते हुए उनके लिए पद्म विभूषण पुरस्कार की माँग कर दी।

जिस तरह मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन अपने भ्रष्टाचार की वजह से जेल की सलाखों के पीछे पहुँच गए और केजरीवाल उनका लगातार बचाव कर रहे हैं, उसे देख यही कहा जा सकता है कि इनके वचन और इनके वर्तन मे जमीन-आसमान का फर्क है। दिल्ली सरकार मे AAP के नेता जितेंद्र तोमर का मामला भी अभी तक जनता याद करती है। एक फर्जी डिग्री धारी को विधानसभा चुनाव का टिकट देना और उसके बाद उसे दिल्ली का कानून मंत्री बना देना AAP की फर्जी पारदर्शिता की पोल खोलता है। उस वक्त भी अरविंद केजरीवाल ने तोमर को बचाने की भरसक कोशिश की। प्रेस में वक्तव्य दिया, लेकिन अंत मे उन्हे जितेंद्र तोमर को निकाल बाहर करना पड़ा।इसी तरह पंजाब में स्वास्थ्य मंत्री रहे विजय सिंगला को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बर्खास्त किया। टेंडर प्रक्रिया मे 1℅ कमीशन खाने की वजह से सिंगला को हटाना पड़ा। जब यह मामला प्रकाश में आया तब विजय सिंगला को बचाने के प्रयास किये गए, लेकिन पोल खुल चुकी थी, तो मजबूरी में ही सही, तुरंत कारवाई करनी पड़ी।हाल ही में हुए दिल्ली MCD चुनाव में टिकट वितरण के दौरान AAP विधायक अखिलेश त्रिपाठी के करीबी रिश्तेदार और उनके दो सहयोगियों को भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने गिरफ्तार किया। AAP से MCD चुनाव के लिए टिकट के बदले 90 लाख रुपये लेने के आरोप मे गिरफ्तार किया। करोडों रुपए का लेन-देन MCD चुनाव में हुआ, लेकिन तथाकथित कट्टर ईमानदार केजरीवाल हमेशा की तरह चुप रहे और खुद के पीड़ित होने का घिसा-पीटा रोना रोने लगे। दिल्ली में AAP की महिला पार्षद गीता रावत को CBI ने 20,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था। गरीबों के लिए काम करने का दम भरने वाली आम आदमी पार्टी की पार्षद अपने क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्य में सहयोग करने के बदले रिश्वत लेते पकड़ी गई।पंजाब के बठिंडा ग्रामीण से आम आदमी पार्टी के विधायक अमित रतन कोटफट्टा को पंजाब के विजिलेंस विभाग ने रिश्वत लेने के आरोप मे गिरफ्तार किया है। आप के विधायक ग्राम विकास कार्यो के लिए आवंटित पैसों को मंजूरी देने के बदले 5 लाख की रिश्वत लेने के जुर्म में सलाखों के पीछे पहुँच गए। अगर आम आदमी पार्टी के भ्रष्टाचार के मामलों की सूची दी जाए, तो यह कभी खत्म ना होती दास्तां बन जाएगी, लेकिन अपने आप को कट्टर ईमानदार बताने वाले अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की असलियत, इनकी कथनी और करनी का फर्क जनता के सामने लाना जरूरी है और कांग्रेस एक जिम्मेदार राजनैतिक दल होने के नाते आम आदमी पार्टी के भृष्टाचार की पोल खोलती रहेगी। अब थोड़ा ध्यान पंजाब पर ले चलते हैं, जहां पिछले एक साल से आम आदमी पार्टी की सरकार है और जनता अभी से भय के साए में जीने को मजबूर है। ऐसा कहने के पीछे वजह भी उतनी ही ठोस है। आप सबको पता है कि कैसे मशहूर पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की सरेआम गोलियों से भूनकर हत्या की गई। मूसेवाला की हत्या का सबसे बड़ा दोष भगवंत मान सरकार का है क्योंकि ऐसे लोगो की सूची सार्वजनिक हो गई थी, जिनकी सुरक्षा हटाई गई थी, या तो कम की गई थी। यह सरकार की विफलता थी और इसी वजह से मूसेवाला के हत्यारों ने साजिश को अंजाम दिया। सिद्धू मूसेवाला की हत्या में शामिल शूटर दीपक टीनू मानसा पुलिस की गिरफ्त से भागने में कामयाब हुआ, जिसे दिल्ली पुलिस ने बड़ी मशक्कत के बाद दोबारा पकड़ा। सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह जी ने पंजाब विधानसभा के बाहर धरना दिया और कहा कि पिछले दस महीने में उनके बेटे के मामले में कुछ नही हुआ और वो चाहते हैं कि मामला CBI को सौंप दिया जाए। बलकौर जी ने यह भी बताया कि कैसे उन्हें इस केस में आवाज उठाने की वजह से गोल्डी बरार और अन्य गैंग से लगातार धमकियां मिल रही हैं। ये सब क्या दर्शाता है? एक जवान गायक दिन-दहाड़े मार दिया जाता है, उसकी हत्या की साजिश तिहाड़ में बंद गैंगस्टर रचते हैं और अब पीड़ित पिता को भी जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।

भगवंत मान सरकार बनने के बाद जालंधर में अंतर्राष्ट्रीय कबड्डी खिलाडी संदीप सिंग नांगल की दिन-दहाड़े हत्या कर दी गई थी।

आप सब जानते है कैसे 9 मई 2022 को मोहाली स्थित पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस मुख्यालय पर RPG (Rocket Propelled Granade) से हमला किया गया था। उस वक्त भगवंत मान और उनकी पुलिस को जवाब देना मुश्किल हो गया था और किसी तरह से रटे रटाए बयान देकर मामले से ध्यान हटाने की कोशिश हुई। हाल ही में अमृतसर के अजनाला में जो हुआ वो पंजाब की कानून व्यवस्था के हालात बताने के लिए काफी है। अमृतपाल सिंह और उनके समर्थक हजारों की संख्या में हाथ में हथियारों के साथ थाने का घेराव करते है, अमृतपाल खुलेआम टीवी पर एसपी अमृतसर से धमकी भरे लहजे में बात करता है और पंजाब पुलिस गिरफ्तार किए आरोपी को छोड़ने का आदेश अदालत से लेने के लिए तत्परता दिखाती है। थाने को घेरने आई भीड़ के हमले में कई पुलिसवाले घायल होते हैं, लेकिन अभी तक दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। गौर करने वाली बात ये भी है कि जब अजनाला की घटना हो रही थी, तब मुख्यमंत्री भगवंत मान केजरीवाल के साथ मुंबई में अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के काम मे लगे हुए थे और जब वहां मीडिया ने भगवंत मान से अजनाला की घटना पर सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि ये सब गलत खबर है। पंजाब में हर तरफ शांति है।केजरीवाल एक तरफ दिल्ली में हमेशा ये कहते हैं कि अगर दिल्ली पुलिस का नियंत्रण उनके हाथ में होगा, तो दिल्ली से अपराध का नाम-ओ-निशान मिटा देंगे। दिल्ली के हर नागरिक को सुरक्षा देंगे। हम केजरीवाल से पूछना चाहते हैं कि क्या पंजाब पुलिस का नियंत्रण आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार के पास नहीं है? पंजाब में रोजाना बढ़ते अपराध के लिए अब आप किसको जिम्मेदार ठहराते हैं? क्या पंजाब की गिरती कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी आपकी नही है?पंजाब एक ऐसा राज्य है, जिसने दशकों तक आतंकवाद का दंश झेला है। हजारों-लाखों लोग हिंसा का शिकार हुए हैं। कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता, मुख्यमंत्री बेअंत सिंह जी को खोया है। दशकों की मेहनत, वीर पुलिस और सेना के जवानो के बलिदान के बाद उस राज्य मे शांति प्रस्थापित हुई है। पंजाब देश की सुरक्षा के लिहाज से भी बहुत महत्वपूर्ण राज्य है। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान जो भारत विरोधी हर गतिविधि को समर्थन और मदद करता आया है, हमेशा मौके की तलाश में रहता है। इसलिए पंजाब में कानून व्यवस्था सिर्फ राज्य के लिए नही बल्कि पूरे देश की सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लेकिन पिछले एक साल से AAP सरकार के कार्यकाल में स्थिति बद से बदतर होती जा रही है और सरकार सिर्फ जनता की कमाई पर खुद के विज्ञापन देने में व्यस्त नजर आती है। कांग्रेस पार्टी का यह मानना है की केंद्र की मोदी सरकार द्वारा केंद्रीय जाँच एजेंसियों जैसे ED, CBI, IT आदि का इतना दुरुपयोग किया गया हैं, जहाँ उचित आधार पर कार्रवाई होती हैं वहाँ भी संशय और डर स्वाभाविक है।

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