अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:दिल्ली पुलिस ने सोमवार को चुनाव आयोग के खिलाफ निकाले जा रहे विपक्षी दलों के सांसदों के मार्च को संसद मार्ग पर रोककर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल समेत लगभग तीन सौ सांसदों को हिरासत में ले लिया। यह मार्च बिहार समेत कुछ अन्य राज्यों में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और चुनावों में वोट चोरी के मुद्दे को लेकर आयोजित किया गया था।

सांसदों को चुनाव आयोग के कार्यालय में ज्ञापन सौंपने से रोकने पर मल्लिकार्जुन खरगे ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार सांसदों को चुनाव आयोग तक पहुंचने नहीं देती, समझ नहीं आता कि उसे किस बात का डर है? उन्होंने आगे कहा कि इस मार्च में सभी सांसद थे, शांतिपूर्ण ढंग से मार्च निकाल रहे थे। चुनाव आयोग सभी सांसदों को बुलाता और बैठक में सभी अपना पक्ष रखते, लेकिन चुनाव आयोग ने कहा कि सिर्फ 30 सांसद ही आएं।

वहीं राहुल गांधी ने कहा कि हिंदुस्तान में लोकतंत्र की हालत ये है कि 300 सांसद चुनाव आयोग से मिलना चाहते हैं। लेकिन चुनाव आयोग कहता है कि वे मिलने नहीं आ सकते। क्योंकि चुनाव आयोग सच्चाई से डरता है। उन्होंने कहा कि अब यह राजनीतिक लड़ाई नहीं है, यह देश की आत्मा और संविधान को बचाने की लड़ाई है। संविधान के हिसाब से एक व्यक्ति को एक वोट का अधिकार है। लेकिन हमने साफ दिखाया है कि अब यह वास्तविकता नहीं रह गई है, कुछ व्यक्ति कई जगहों पर वोट डाल रहे हैं। देश के युवाओं को यह सच्चाई पता चल गई है। अब चुनाव आयोग का छिपना मुश्किल है।वोट चोरी के खुलासे पर हलफनामा मांगे जाने से जुड़े एक प्रश्न के जवाब में चुनाव आयोग पर करारा पलटवार करते हुए राहुल गांधी ने आगे कहा कि यह चुनाव आयोग का डेटा है, मेरा डेटा नहीं है, जिसके लिए मैं हलफनामे पर दस्तखत करूं। चुनाव आयोग डेटा उठाए और उसे अपनी वेबसाइट पर डाले, फिर उसे खुद पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सब सिर्फ मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए है। वोटों की धांधली सिर्फ बेंगलुरु में ही नहीं हुई, बल्कि कई अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी हुई है। चुनाव आयोग जानता है कि जो डेटा वो छिपाने की कोशिश कर रहे हैं, वो एक दिन उजागर होगा।
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