अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने मोदी सरकार की विदेश नीति को विफल बताते हुए कहा कि यह भारत के सम्मान और गौरव को खतरे में डाल रही है। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी की सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स विभाग की अध्यक्ष सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराया। अब सिर्फ ट्रंप ही नहीं बल्कि रूस भी मानता है कि उन्होंने युद्ध विराम कराया। उन्होंने कहा कि यह भारत की संप्रभुता पर हमला है। सरेंडर प्रधानमंत्री की चुप्पी ये चीख-चीखकर कह रही है कि उन्होंने दबाव में आकर संघर्ष विराम किया है। उन्होंने आगे कहा कि कनाडा जैसे देश ने भारत को जी 7 शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित नहीं किया। जिस पाकिस्तान को भारत ने 2014 से पहले अलग-थलग कर दिया था, वह अब विश्व मंच पर हीरो बनकर उभर रहा है। मोदी सरकार अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, एशियाई विकास बैंक और विश्व बैंक से पाकिस्तान को मिलने वाली अरबों डॉलर की सहायता को रोकने में विफल रही है।

सुप्रिया श्रीनेत ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद-निरोधी समिति का उपाध्यक्ष बना है, जबकि वह खुद आतंकवाद को पनाह देने वाला देश है। उन्होंने कहा कि हाफिज सईद, मसूद अजहर जैसे आतंकवादियों की मौजूदगी और उससे पहले ओसामा बिन लादेन के वहीं पाए जाने के बावजूद बड़े-बड़े देश पाकिस्तान के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि पाकिस्तान जैसे आतंकी मुल्क की बराबरी भारत के साथ की जा रही है, इसका जिम्मेदार कौन है?कांग्रेस नेता ने कहा कि रूस ने भारत के समर्थन में अब तक खुलकर कोई ठोस बयान नहीं दिया है, बल्कि पाकिस्तान के साथ वह ढाई बिलियन डॉलर का सौदा कर रहा है। उन्होंने चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते घनिष्ठ संबंधों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 11 साल सत्ता में रहने और 90 से अधिक देशों का दौरा करने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति विफल साबित हुई है, जिससे आज भारत कूटनीतिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया है। अगर मोदी सरकार की विदेश नीति सही होती, तो दुनिया के तमाम देश हमारे साथ मुस्तैदी से खड़े रहते।श्रीनेत ने कहा कि भारत के प्रतिनिधिमंडलों को विभिन्न देशों में भेजा गया, लेकिन वे न तो राष्ट्राध्यक्षों और न ही प्रभावी राय बनाने वालों से मिल पाए। इन प्रतिनिधिमंडलों ने केवल संग्रहालयों का दौरा किया, सांस्कृतिक कार्यक्रम देखे और तस्वीरें खिंचवाईं, लेकिन भारत के पक्ष में कोई ठोस बयान प्राप्त करने में विफल रहे। उन्होंने बताया कि 27 मई को भारतीय सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने कुवैत पहुंचकर अपना पक्ष रखा और अगले ही दिन कुवैत ने पाकिस्तान पर लगा वीजा प्रतिबंध हटा दिया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि 45 दिन बीत जाने के बाद भी प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की गोलाबारी में शहीद हुए लोगों से मिलने की जहमत नहीं उठाई, जबकि वे देश भर में हर जगह गए। अब वह उद्घाटन कार्यक्रम के लिए वहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के 45 दिन बाद भी आतंक वादी फरार हैं और मोदी सरकार इस पर चुप है। उन्होंने 26/11 हमले के समय कांग्रेस सरकार की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि तब दस में से नौ आतंकवादियों को मार गिराया गया था और दसवें को फांसी दी गई थी।
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