
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:दिल्ली में हर बच्चे को शानदार शिक्षा देने के क्रम में “आप” सरकार ने उत्तरी-पूर्वी दिल्ली के सुंदर नगरी में एक नया वर्ल्ड क्लास स्कूल तैयार करवाया है। गुरुवार को बाल दिवस के मौके पर सीएम आतिशी ने उद्घाटन कर इस स्कूल को बच्चों को समर्पित किया। इस मौके पर सीएम आतिशी ने कहा कि, “सुंदर नगरी और नंद नगरी का इलाका दिल्ली की सबसे घनी आबादी वाले इलाके है। इस घनी आबादी वाले इलाके में पैर रखने तक की जगह नहीं है, लेकिन ऐसी जगह पर इतने शानदार वर्ल्ड क्लास स्कूल को देख कर विश्वास नहीं होता कि ये सुंदर नगरी-नंद नगरी इलाके के बीचो-बीच है।”उन्होंने कहा कि, “इस स्कूल का उद्घाटन करते हुए मुझे बहुत खुशी है क्योंकि 2015 में जब हमारी सरकार बनी और हम इस इलाके के स्कूलों में निरीक्षण के लिए जाते थे तो यहाँ हर क्लासरूम में 100-150 बच्चे बैठा करते थे। फर्श पर, टाट पट्टी पर बैठा करते थे। और जब एक क्लास में 150 बच्चे होंगे तब भगवान भी आ जाए तो बच्चों को अच्छी पढ़ाई नहीं मिल सकती है।”
सीएम आतिशी ने कहा कि, “आज दिल्ली सरकार की बदौलत सुंदर नगरी एफ़-1, एफ़-2 ब्लॉक में इतने शानदार स्कूल का उद्घाटन हो रहा है और मैं दावे के साथ कह सकती हूँ कि, इस इलाके के बड़े से बड़े प्राइवेट स्कूलों में इतनी शानदार बिल्डिंग, इतनी सारी सुविधाएं नहीं होगी।”उन्होंने साझा किया कि, ये सर्वोदय स्कूल 2 शिफ्ट में चलेगा। इस स्कूल बिल्डिंग में 131 कमरें है, 7 लैब्स है, लाइब्रेरी है, 2 बड़े एमपी हाल है, कॉन्फ्रेंस रूम है। और इन सभी सुविधाओं की वजह से इस स्कूल में आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस तीनों स्ट्रीम की पढ़ाई होगी। इस भव्य स्कूल बिल्डिंग में 7000 से ज़्यादा बच्चे पढ़ेंगे और इसका सबसे ज़्यादा फ़ायदा सुंदर नगरी और नंद नगरी में रहने वाले बच्चों को होगा। यहाँ पेरेंट्स को अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए दूर नहीं भेजना होगा। और कुछ सप्ताह में आसपास के स्कूलों में जहाँ ज़्यादा बच्चे है, उन स्कूलों से बच्चों को यहाँ शिफ्ट किया जाएगा।बता दे कि, स्कूल की जमीन दिल्ली सरकार के प्रयासों की बदौलत भू माफियाओं के चंगुल से छुटवाई गई थी। जनवरी 2023 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने इसकी नींव रखी थी और अब यहाँ 4 मंज़िला शानदार स्कूल तैयार है। इस नए स्कूल से मंडोली, सबोली, सुंदर नगरी, बैंक कॉलोनी, हर्ष विहार, नंद नगरी इलाक़ों के स्कूलों पर स्टूडेंट्स का दबाव कम होगा। 131 कमरों वाला नया स्कूल स्मार्ट क्लास रूम, लाइब्रेरीज, शानदार लैब्स, एक्टिविटी रूम, लिफ्ट सहित तमाम अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। सीएम आतिशी ने कहा कि, “जिस ज़मीन पर आज ये स्कूल बना है। इसे 2003 में डीडीए द्वारा शिक्षा विभाग को स्कूल बनाने के लिए दी गई थी। लेकिन पुरानी पार्टियां और नेताओं की आम आदमी के बच्चों को शिक्षा देने में कोई रुचि नहीं थी। इसलिए इस जमीन भूमाफियाओं का कब्जा हो गया था। लेकिन जब दिल्ली में अरविंद केजरीवाल जी की, आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तब भू माफियाओं से लड़कर इस ज़मीन से कब्जा खाली करवाया गया और यहाँ पर स्कूल बनाने का काम शुरू करवाया गया।”सीएम आतिशी ने कहा कि, पहले नेता सिर्फ़ अपने परिवार के बारे में सोचते थे। वो सोचते थे कि, जमीन पर कब्जा करो, और अपने आने वाली पीढ़ियों के लिए पैसे जमा करो। लेकिन अरविंद केजरीवाल अपने परिवार के भविष्य के बारे में नहीं सोचते। वो दिल्ली के आम लोगों के भविष्य के बारे में, उनके बच्चों के भविष्य के बारे में सोचते है। इसलिए भूमाफियाओं के कब्जे से स्कूल की जमीन वापस लेकर यहाँ बच्चों के लिए शानदार स्कूल बनाया।सीएम आतिशी ने कहा कि, “दिल्ली के सरकारी स्कूल हमेशा ऐसे नहीं होते थे। 2015 से पहले दिल्ली में सरकारी स्कूल बदहाल होते थे। ये सरकारी स्कूल टीन-टप्पर में चलते थे। बरसात में स्कूल की छत टपकती थी। स्कूल के अंदर घुसते ही सबसे पहले टॉयलेट की बदबू आती थी। और क्लासरूम की कमी के कारण बच्चे टॉयलेट के बाहर टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे।”उन्होंने कहा कि, सरकारी स्कूलों के क्लास रूम में टेबल-कुर्सियां नहीं होती थी, लाइटें-खिड़कियां टूटी होती थी। पीने का पानी नहीं होता था। क्लासरूम में टीचर्स नहीं होते थे क्योंकि उनकी पल्स पोलियो से लेकर आधार कार्ड तक में सरकारी ड्यूटी लगाई जाती थी। दिल्ली के इस हिस्से में एक एक क्लास में 100-150 बच्चे हुआ करते थे। कोई भी अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में नहीं भेजना चाहता था। जिसके पास भी थोड़े पैसे आ जाते थे वो परिवार पेट काट-काटकर अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजता था। क्योंकि उन्हें पता होता था कि, यदि बच्चा टूटे-फूटे सरकारी स्कूल में पढ़ा तो उसका कोई भी भविष्य नहीं होगा। सीएम कहा कि, हमारे देश में कहा जाता है कि, बच्चों का भविष्य उनकी हाथ की लकीरों में लिखा होता है। ये सच भी है कि, हमारे देश में बच्चे का भविष्य तीन साल की उम्र में तय हो जाता है। अगर कोई ऐसे घर से होता था जहां पैरेंट्स महंगे प्राइवेट स्कूल की फीस दे सकते तो वो अच्छे स्कूल में जाता था, अच्छे कॉलेज में जाता था और अच्छी नौकरी पाता था। लेकिन दूसरी ओर जो बच्चा गरीब परिवार से आता था वो पढ़ाई के लिए टूटे-फूटे टीन-टप्पर के सरकारी स्कूल में जाता था। उन्होंने कहा कि, आंकड़े बताते है कि हमारे देश में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 50% बच्चे ही पढ़ाई पूरी कर पाते है। और यदि पढ़ाई पूरी कर ले तो उन्हें छोटी मोटी नौकरी करनी पड़ती। कोई मैकेनिक का काम करता तो कोई किराना की दुकान में किसी के घर में काम करना पड़ता। उन्होंने कोई भी काम छोटा नहीं होता लेकिन वो काम करना किसी की मजबूरी नहीं होनी चाहिए। हर बच्चे को चाहे वो अमीर परिवार से आता हो या गरीब परिवार से आता हो उसे बराबरी का मौका मिलना चाहिए, आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए। सीएम आतिशी ने कहा कि, “ये बदलाव दिल्ली में 2015 से आया है। सुंदर नगरी के लोगों ने हमेशा से हमें बहुत प्यार दिया है। सरकार में आने से पहले अरविंद केजरीवाल जी सुंदर नगरी की गलियों में आम लोगों के लिए काम करते थे। यही से हम लोग की राजनीति की शुरुआत हुई। और लोगों के प्यार की वजह से, आशीर्वाद की वजह से दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षा क्रांति आई।”
उन्होंने कहा कि, “आम आदमी पार्टी की, अरविंद केजरीवाल की सरकार देश की पहली ऐसी सरकार है, जिसने कहा कि हम सरकारी स्कूलों को प्राइवेट से शानदार बनायेंगे। ये पहली ऐसी सरकार थी जिसनें अपने बजट का 25% हिस्सा दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था पर लगाया, आम लोगों के बच्चों के भविष्य को संवारने पर लगाया। पिछले 10 सालों से लगातार हर साल दिल्ली सरकार का सबसे ज्यादा बजट शिक्षा पर लगता है।”सीएम आतिशी ने कहा कि, “सिर्फ़ सुंदर नगरी या नंद नगरी ही नहीं आज पूरी दिल्ली में हर जगह बच्चे शानदार बिल्डिंग में पढ़ते है। उन्होंने साझा किया कि, 1947 से 2015 तक दिल्ली में सरकारी स्कूलों में मात्र 24,000 कमरें बने जबकि अरविंद केजरीवाल जी के मार्गदर्शन में 2015 से 2024 तक मात्र 10 साल में ही 22,700 नए कमरे बनवाए गए। आज सरकारी स्कूलों में जितनी शानदार सुविधाएं है वो प्राइवेट स्कूलों के भी मौजूद नहीं है।”उन्होंने कहा कि, “स्कूलों में न सिर्फ क्लास रूम, लैब-लाइब्रेरी अच्छे बने बल्कि हमनें अपने शिक्षकों की ट्रेनिंग पर भी निवेश किया। 2015 में शिक्षकों की ट्रेनिंग पर हर साल मात्र 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाते थे। लेकिन जब अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बनें, मनीष सिसोदिया दिल्ली के शिक्षा मंत्री बने तब इस 10 करोड़ के बजट को 10 गुणा किया गया और शिक्षकों की ट्रेनिंग पर 100 करोड़ रुपये खर्च किया जाने लगा। हमनें अपने शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए अमेरिका भेजा, ब्रिटेन भेजा, फिनलैंड भेजा, सिंगापुर भेजा। देश के सबसे बड़े-बड़े संस्थानों में दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षक ट्रेनिंग लेकर आए। क्योंकि जब हमारे शिक्षकों-प्रिंसिपलों की वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग होगी तभी वो हमारे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को वर्ल्ड क्लास शिक्षा दे पायेंगे।”सीएम आतिशी ने कहा कि, “इन सब काम का नतीजा रहा कि, पिछले 8 साल से दिल्ली सरकार के स्कूलों के नतीजे प्राइवेट से बेहतर आ रहे है। ये देश के किसी और राज्य में नहीं होता। पहले दिल्ली के सरकारी स्कूलों के पढ़ने वाले बच्चे मैकेनिक बनते थे, दुकान पर काम करते थे। आज दिल्ली सरकार के स्कूलों के बच्चे जेईई-नीट का एग्जाम पास कर देश के बड़े-बड़े इंजीनियरिंग-मेडिकल कॉलेजों के एडमिशन ले रहे है। सिर्फ पिछले साल ही दिल्ली सरकार के स्कूलों के 2800 बच्चों ने जेईई और नीट की परीक्षा क्वालीफाई की।”सीएम आतिशी ने कहा कि, “जहां देशभर में लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों से निकालकर प्राइवेट स्कूलों में डाल रहे है। वही दिल्ली इकलौता ऐसा राज्य है, जहाँ पेरेंट्स अपने बच्चों का प्राइवेट स्कूलों से निकालकर सरकारी स्कूलों में एडमिशन करवा रहे है। पिछले 3 साल में 4 लाख से ज़्यादा बच्चों ने प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में एडमिशन लिया है। ये है दिल्ली की शिक्षा क्रांति।”उन्होंने कहा कि, “आज भी दिल्ली के आसपास के राज्यों में जहां दूसरी पार्टियों की सरकारें है, वहाँ बच्चे टीन-टप्पर में पढ़ने को मजबूर है। उनके बैठने के लिए टेबल-कुर्सी नहीं है। बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर है।”सीएम आतिशी ने कहा कि, “अगर दिल्ली के लोगों को अच्छे स्कूल चाहिए, अपने बच्चों के लिए अच्छा भविष्य चाहिए तो ये दिल्लीवालों के हाथ में ही है। यदि दिल्ली के लोग चाहते है कि, सरकारी स्कूलों में ऐसी ही शिक्षा मिलती रहे, सरकारी स्कूल शानदार बने रहे, बच्चों की अच्छे लैब, क्लासरूम मिले तो उन्हें एक बार फिर अरविंद केजरीवाल की लाना होगा। शिक्षा पर काम करने वाली सरकार को चुनना होगा। क्योंकि कोई और आया तो वो शिक्षा पर काम नहीं करेगा और दिल्ली के स्कूलों का भी वही हाल होगा जो उत्तर प्रदेश में है।
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