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फरीदाबाद

फरीदाबाद: विप्र समाज ने बघौला के लक्ष्मी नारायण मंदिर में बने कुंड के जल में खड़े होकर निभाई श्रावणी परम्परा

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
फरीदाबाद:विप्र समाज की ओर से पलवल जिला के गांव बघौला में हर वर्ष की भांति  इस वर्ष भी रक्षाबंधन के दिन श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के प्रांगण में बने कुंड के जल में खडे होकर श्रावणी परम्परा निभाई। विधिवत मंत्रोच्चारण के बीच प्रायश्चित, स्वाध्याय और संस्कार के लिए श्रावणी उपाकर्म किया गया। इस दौरान वैदिक मंत्र गुंजायमान रहे। पंडित वेद प्रकाश शास्त्री ने कुंड के जल में विप्र समाज के लोगों को मंत्रोच्चारण कराते हुए कहा कि पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रावणी धार्मिक स्वाध्याय के प्रचार का पर्व है। सद्ज्ञान, बुद्धि, विवेक और धर्म की वृद्धि के लिए इसे निर्मित किया गया, इसलिए इसे ब्रह्मपर्व भी कहते हैं। श्रावणी वैदिक पर्व है। प्राचीन काल में ऋषि-मुनि इसी दिन से वेद पारायण आरंभ करते थे। ब्राह्मणों ने जल में खड़े होकर विधि विधान से परंपरागत तरीके से पूजा अर्चना करते हुए नया यज्ञोपवीत धारण किया गया।

इसमें बड़ी संख्या में विप्र समाज के लोगों ने हिस्सा लिया। जाने-अनजाने में हुए पाप के लिए प्रायश्चित किया गया। हेमाद्री संकल्प के साथ विप्र समाज ने वैदिक कालीन परंपरा का निर्वहन किया। पूजन में उपस्थित सभी ने मंत्रोच्चार के साथ पंचगव्य पान कर भस्म लेपन किया।श्रावणी के कर्मकांड में पाप-निवारण के लिए भविष्य में पातकों, उपपातकों और महापातकों से बचने, परद्रव्य अपहरण न करने, पर निंदा न करने, आहार-विहार का ध्यान रखने, हिंसा न करने , इंद्रियों का संयम करने एवं सदाचरण करने की प्रतिज्ञा ली गई. श्रावणी पर्व पर सामान्य देवपूजन के अतिरिक्त विशेष पूजन के अन्तर्गत ब्रह्मा, वेद एवं ऋषियों का आह्वान किया गया।

पूजन में उपस्थित सभी विप्रों ने मंत्रोच्चारण के साथ पंचगव्य का पान कर भस्म लेपन किया।श्रावणी उपाकर्म की परंपरा के दौरान ब्राह्मणों ने अंत: और बाह्य करण की शुद्धि के साथ सूर्य का ध्यान कर तेज की कामना की। इसके पश्चात नूतन यज्ञोपवीत का ऋषि पूजन कर उसे धारण किया गया।  रक्षा बंधन के त्योहार के साथ ही श्रावणी उपाकर्म, पितृ तर्पण और ऋषि तर्पण करने का महत्व भी है।जल में श्रावणी पूजन के बाद श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में हवन का आयोजन किया गया। जिसमें वेद प्रकाश शास्त्री ने मंत्रोच्चारण से यज्ञ हवन कराया। इस मौके पर मंदिर के पुजारी पंडित भूले राम, दिल्ली से रिटायर्ड पंडित हुकम, सोमदत्त वशिष्ठ, सुनील वशिष्ठ, अनिल शर्मा, राजकुमार पंडित जी, अनिल वशिष्ठ, नारायण पंडित, टोनी वशिष्ठ, सचिन वशिष्ठ, बाबू राम शर्मा, पंडित ओम प्रकाश, हर प्रसाद के अलावा विप्र समाज के काफी संख्या में लोगों ने हवन में आहुति दी.

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