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अपराध दिल्ली नई दिल्ली

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने आज एक बिल्डर को खरीदारों से साढ़े 4 करोड़ ठगने के आरोप में किया अरेस्ट।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने आज एक बिल्डर को खरीदारों से साढ़े 4 करोड़ रूपए ठगने के आरोप में अरेस्ट किया हैं। ये आरोपित ने वर्ष -2012 में गाज़ियाबाद में एक परियोजना शुरू की थी और आज तक खरीदारों को कब्ज़ा नहीं दिया। अरेस्ट किए गए आरोपित सचिन दत्ता ने एक भूमि पर परियोजना का शुभारंभ किया था जिसे लीज राशि का भुगतान न करने के कारण प्राधिकरणों द्वारा रद्द कर दिया गया था। इस आरोपित सचिन दत्ता , उम्र 40 को  एफआईआर -नंबर -118, दिनांक 25 जुलाई 2017, भारतीय दंड सहिंता की धारा 420, 406 व 120 बी, थाना ईओडब्लू , नई दिल्ली में अरेस्ट किया गया है। 

पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक रचित चावला और 12 अन्य पीड़ितों ने एक संयुक्त शिकायत में आरोप लगाया था कि अप्रैल 2012 के महीने में, आरोपी व्यक्ति अर्थात् सिद्धार्थ बरमेचा और सचिन दत्ता, मेसर्स बालाजी बिल्डसर्व प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक थे। लिमिटेड ने उन्हें ‘अज़ेलिया ओपस पॉइंट’ के नाम से विकसित की जाने वाली एक परियोजना में फ्लैट बुक करने के लिए प्रेरित किया। वसुंधरा, गाजियाबाद, यूपी, आरोपी व्यक्तियों ने गलत तरीके से प्रस्तुत किया कि उनकी कंपनी का भूमि पर स्पष्ट स्वामित्व है और पहले ही सभी सरकार से सभी आवश्यक अनुमोदन प्राप्त कर चुके हैं। आवासीय समूह आवास परियोजना शुरू करने के लिए प्राधिकरण। इसके अलावा, पीड़ितों को वादा किया गया था कि सभी सुविधाओं के साथ आवासीय फ्लैट 3 साल के भीतर सौंपे जाएंगे। इसके बाद ये शिकायतकर्ताओं ने जुलाई 2012 से जनवरी 2013 के बीच अपने फ्लैटों की बुकिंग राशि के रूप में कंपनी को कुल रु.1,29,59,784/- का भुगतान किया। इसके बाद, शिकायतकर्ताओं द्वारा यह देखा गया कि उक्त परियोजना का निर्माण शुरू नहीं हुआ है और बिल्डर ने उन्हें निवेश की गई राशि वापस करने से इनकार कर दिया।इन पीड़ितों की शिकायत की जांच की गई और एफआईआर संख्या -118, दिनांक 25/07/2017, धारा 420/406/120बी आईपीसी पीएस ईओडब्ल्यू नई दिल्ली के तहत मामला दर्ज किया गया।

जाँच पड़ताल

यूपी आवास विकास परिषद से एकत्र की गई जानकारी से पता चला कि प्रस्तावित परियोजना की भूमि का भूखंड शुरू में एक मेसर्स राज हंस टावर्स प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित किया गया था। लिमिटेड इसके बाद, मेसर्स बालाजी बिल्डसर्व प्राइवेट लिमिटेड ने अपने निदेशक सचिन दत्ता के माध्यम से, प्राधिकरण से अपेक्षित अनुमति के बिना, मेसर्स राज हंस टावर्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ बेचने का समझौता किया था। लिमिटेड और शुरू पीड़ितों से वसूल की बुकिंग राशि तथापि, इन दोनों कंपनियों में से किसी ने भी आवंटन की शर्तों के अनुसार भू-स्वामी प्राधिकारी को पट्टे की राशि/किश्तों का भुगतान नहीं किया। तदनुसार, 2015 में, यूपी आवास विकास परिषद द्वारा भूखंड का आवंटन रद्द कर दिया गया था। बैंक विवरण, लेखा पुस्तकों, लेखा परीक्षा रिपोर्ट तथा अन्य अभिलेखों की संवीक्षा से पता चला कि मेसर्स बालाजी बिल्डसर्व प्रा. लिमिटेड ने  2012 में संभावित घर खरीदारों से 4.5 करोड़ ले लिए लेकिन वे अधर में रह गए क्योंकि 9 साल बीतने के बाद भी, न तो परियोजना स्थल पर निर्माण शुरू हुआ था और न ही उनकी निवेश की गई राशि उन्हें वापस की गई थी।

काम करने का ढंग

मेसर्स बालाजी बिल्डसर्व प्राइवेट लिमिटेड के सचिन दत्ता ने संभावित घर खरीदारों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया कि उनकी कंपनी के पास परियोजना के लिए भूमि पर स्पष्ट स्वामित्व है और आगे संबंधित सरकार से सभी आवश्यक अनुमतियां / लाइसेंस पहले ही प्राप्त कर चुके हैं। अधिकारियों, जहां कि बिल्डर कंपनी भूमि की मालिक नहीं था  और सरकार द्वारा परियोजना के लिए कोई लेआउट/भवन योजना स्वीकृत नहीं की गई थी। अधिकारियों, आरोपी सचिन  ने रुपये वसूल किए। भोले-भाले निवेशकों से झूठे वादे के साथ 4.5 करोड़ रुपये कि सभी सुविधाओं के साथ पूरी तरह से सुसज्जित फ्लैटों का कब्जा भुगतान के तीन साल के भीतर यानी 2015 में या उससे पहले सौंप दिया जाएगा।

गिरफ़्तार करना

मेसर्स बालाजी बिल्डसर्व प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सचिन दत्ता को  गत  22 जून 2021 को मामले में गिरफ्तार किया गया था और मेसर्स राज हंस टावर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों की भूमिका थी। साजिश में जांच की जा रही है। आरोपी सचिन दत्ता पहले भी इसी तरह के तौर-तरीकों से निवेशकों को ठगने के मामलों में शामिल पाया गया है। इससे पहले 21.06.2021 को अन्य आरोपी सिद्धार्थ बरमेचा को गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है। अरेस्ट किए आरोपित सचिन दत्ता को कल 23 जून 2021 को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

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