अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
केंद्रीय रक्षा मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने आज उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता को संबोधित किया और दिल्ली में हालिया घटनाक्रमों को लेकर कांग्रेस और उसकेसहयोगियों पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने, अराजकता फैलाने और बांग्लादेशकी तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेसका उद्देश्य चुनाव सुधार नहीं, बल्कि सत्ता हासिल करना है। श्री सिंह ने आपातकाल,1984 के सिख नरसंहार और कारसेवकों पर गोलीबारी का उल्लेख करते हुए कांग्रेस केइतिहास पर सवाल उठाए। केंद्रीय रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा को रेखांकित किया तथाआरोप लगाया कि कांग्रेस अपने सहयोगियों के साथ देश को बदनाम करने का प्रयास कर रहीहै।राजनाथ सिंह ने कहा कि दिल्ली में पिछले दिनों जो घटनाक्रम हुए हैं,

वे कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस और उसके राजनीतिकसहयोगी प्रत्यक्ष रूप से और अपने समर्थक संगठनों के माध्यम से लोक तांत्रिक कार्योंको समाज के निर्माण की बजाय राजनीतिक उद्देश्यों और अराजकता फैलाने का साधन बनानेकी कोशिश कर रहे हैं। देश के नौजवानों को अराजकता का मोहरा बनाने का प्रयास कियाजा रहा है। वे बांग्लादेश की तर्ज पर रिजीम चेंज कराना चाहते हैं। एक प्रेसकॉन्फ्रेंस में खुलकर कहा जाता है कि उन्होंने रिजीम चेंज के लिए बांग्लादेश सेप्रेरणा ली है, तो दूसरा डंके की चोट पर सरकार को गिराने की बात करता है। इससेस्पष्ट होता है कि उनका एकमात्र एजेंडा लोकतांत्रिक संस्थाओं को बंद करना और देशमें आग लगाना है। इन लोगों के द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों से इनकी लड़ाई काउद्देश्य स्पष्ट हो जाता है। इनकी लड़ाई न तो चुनाव सुधार के लिए है, न एफआईआर केलिए, न ज्ञानेश कुमार के लिए और न ही देश के नौजवानों के उज्ज्वल भविष्य के लिएहै। बल्कि, देश में अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करना ही इनका एकमात्र लक्ष्यहै।

केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कहा कि जब राजनीतिक स्वार्थ को सत्य औरराष्ट्रहित से ऊपर रखा जाता है, तो लोकतांत्रिक विमर्श तथ्यों और तर्कों के बजायझूठ और दुष्प्रचार का शिकार हो जाता है। राहुल गांधी और उनके साथियों को यह समझनाहोगा कि लोकतंत्र अराजकता फैलाने, संवैधानिक संस्थाओं की साख पर चोट करने या भारतकी विकास यात्रा में बाधा डालने का लाइसेंस नहीं है। बीते दिन सर्वोच्च न्यायालयद्वारा की गई टिप्पणी भी इसी दिशा में एक संकेत है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने केलिए कानून का सम्मान करना आवश्यक है। भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं को राजनीतिकस्वार्थों की बलि नहीं चढ़ाया जा सकता। इस बात को समझना होगा कि झूठे आरोपों केजरिए संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास और राजनीतिक अवसरवाद के सहारे भारत कीविकास यात्रा को बाधित नहीं किया जा सकता। राहुल गांधी को लोकतंत्र की रक्षा केनाम पर पॉलिटिक्स ऑफ डिसरप्शन करने के बजाय जनमत का सम्मान करते हुए अपनी राजनीतिक रणनीति पर आत्ममंथन करना चाहिए। यह राहुल गांधी को हमारा सुझाव है। जहां तक भारतके भविष्य का प्रश्न है, उसकी जिम्मेदारी सभी की है। हमें टकराव के बजाय समाज औरराष्ट्र निर्माण का मार्ग चुनना चाहिए। सिंह ने कहा कि कांग्रेस के संरक्षण और शासनकाल में तीन सबसे बड़ेअक्षम्य अपराध हुए। पहला अक्षम्य अपराध 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाई गईइमरजेंसी थी। दूसरा अक्षम्य अपराध 1984 में कांग्रेस के संरक्षण में सिख भाई-बहनोंका नरसंहार था। तीसरा अक्षम्य अपराध 1990 में रामभक्त कारसेवकों के खून की नदियांबहाने वालों को समर्थन देकर उनकी सरकार को बचाना था। चौथा अक्षम्य अपराध आज कांग्रेसद्वारा संविधान, संवैधानिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं को चोट पहुंचाकर किया जारहा है। वर्ष 1975 में इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र को सलाखों के पीछे कैद करने काकाम किया था। आज राहुल गांधी संविधान को अपनी जेब में रखकर अराजकता फैलाने काप्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस के इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें, तो उसमें कईकाले अध्याय मिलेंगे। राजनाथ सिंह ने कहा कि इलेक्शन कमीशन और देश की चुनावी प्रक्रिया परसवाल उठाने वाले राहुल गांधी को यह भी बताना चाहिए कि उनकी कांग्रेस ने आयोग औरचुनाव प्रक्रिया को किस तरह अपनी कठपुतली बनाकर रखा था। वर्ष 1993 में कांग्रेससरकार के दौरान चुनाव आयोग में अचानक बदलाव करते हुए रातोंरात दो नए चुनाव आयुक्तनियुक्त किए गए थे। 2006 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी नेराष्ट्रपति को पत्र लिखकर चुनाव आयुक्त नवीन चावला को पद से हटाने की सिफारिश कीथी। उन्होंने आरोप लगाया था कि नवीन चावला ने चुनाव आयोग की संवेदनशील जानकारीकांग्रेस नेताओं के साथ साझा की थी। यह बहुत गंभीर आरोप था, लेकिन कांग्रेस ने नकेवल नवीन चावला को पद पर बनाए रखने का काम किया, बल्कि उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्तभी बनाया, क्योंकि वे नेहरू-गांधी परिवार के करीबी थे। कांग्रेस सरकार ने कितनेनिष्पक्ष लोगों को अपने खिलाफ खड़ा किया था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकताहै। कांग्रेस द्वारा नियुक्त किए गए एक पूर्व चुनाव आयुक्त बाद में एक नहीं, बल्किदो बार केंद्र सरकार में मंत्री बने। उनका नाम एम. एस. गिल था।केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कहा कि देश में पांच दशक तक बिना वोटर आईडी कार्डके चुनाव होते रहे। यानी वर्ष 1993 से पहले वोटर आईडी कार्ड की व्यवस्था नहीं थीऔर मतदाताओं की पहचान साबित करने के लिए कोई पुख्ता प्रमाण नहीं होता था। जब सेवोटर आईडी कार्ड की व्यवस्था लागू हुई है, तब से कांग्रेस के लिए बहुमत हासिल करनाबहुत दूर की बात हो गई है। जब से देश में वोटर आईडी कार्ड की व्यवस्था लागू हुईहै, तब से कांग्रेस ने लोकसभा में अपने दम पर सरकार नहीं बनाई है। कांग्रेस कहतीहै कि उसके वोटों की चोरी हो गई। जबकि इसी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को आखिरी बारवर्ष 1985 में विजय हासिल हुई थी। वर्ष 1984 के बाद कांग्रेस को देश में बहुमत भीनहीं मिला, जबकि उस समय भारतीय जनता पार्टी केवल दो सीटों वाली पार्टी थी। अब आपही फैसला कीजिए कि यह वोट चोरी थी या काम चोरी? राहुल गांधी इसका जवाब दें। सिंह ने कहा कि आपने देखा होगा कि राहुल गांधी ने वोट चोरी कोहाइड्रोजन बम बताकर पूरे देश में शोर मचाया था। लेकिन सच्चाई यह है कि उनकाहाइड्रोजन बम दिवाली का पटाखा भी साबित नहीं हुआ। राहुल गांधी ने कभी 70 साल कीमहिला को डबल वोटर बता दिया, तो कभी 35 साल की महिला को 124 साल का वोटर बना दिया।कहीं सामान्य नागरिकों को फर्जी वोटर बताकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गई।लेकिन हर मामले में झूठ और राजनीतिक नाटक ही सामने आया। उनकी अपनी ही पार्टी नेमतदाता सूची के खिलाफ एक भी औपचारिक अपील दाखिल नहीं की, क्योंकि उनके पास कोईसबूत ही नहीं था। हमें कभी भी संवैधानिक संस्थाओं पर शक नहीं रहा है। यह हमाराचरित्र है। हमने देश की चुनावी व्यवस्था पर भी कभी संदेह नहीं किया और न हीसंवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करके जनता को गुमराह करने का प्रयास किया। हमने हमेशादेश की जनता, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान किया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि पहले, यदि चुनाव के दौरान किसी उम्मीदवार कीमृत्यु हो जाती थी, तो सामान्यतः केवल उसी सीट पर चुनाव स्थगित कर दिया जाता था।एक सीट के लिए पूरे देश का चुनाव स्थगित करने का कोई नियम नहीं था। राजीव गांधी कीहत्या पूरे देश के लिए एक अत्यंत दुखद घटना थी। उस घटना से केवल कांग्रेस पार्टीही नहीं, बल्कि पूरा देश दुखी था। लेकिन जब आज कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षतापर सवाल उठा रही है, तो हम उससे पूछना चाहते हैं कि क्या यह प्रावधान नहीं था किकिसी उम्मीदवार की मृत्यु के बाद केवल उसी सीट का चुनाव स्थगित किया जाए? फिर क्याकारण था कि राजीव गांधी की हत्या के बाद पूरे देश के चुनाव स्थगित कर दिए गए थे?जबकि सच्चाई यह है कि अमेठी में चुनाव हो चुका था।केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के दौर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रतिष्ठा, साख और विश्वसनीयता बढ़ी है।आज भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वालीअर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। डिजिटल लेन-देन के मामले में भी भारत ने कमाल किया हैऔर दुनिया का नंबर एक देश बना है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी भारत नई ऊंचाइयों कोहासिल कर रहा है। दो दर्जन से अधिक देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 35 देशों के सर्वोच्च सम्मानप्राप्त हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ रही है, लेकिनकांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों द्वारा भारत को बदनाम करने की कोशिश की जा रहीहै। देश का रक्षा मंत्री होने के नाते मैं यह कहना चाहता हूं कि रक्षा उत्पादन केक्षेत्र में भी भारत ने शानदार सफलता हासिल की है। जहां पहले मुश्किल से 30 हजारकरोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन होता था, वहीं आज यह उत्पादन बढ़कर 1 लाख 78 हजारकरोड़ रुपये से अधिक हो गया है। भारत अब रक्षा उपकरणों का इंपोर्टर नहीं, बल्किएक्सपोर्टर बन गया है। यह स्वाभाविक है कि भारत के इस उभार से तमाम शक्तियां खुशनहीं होंगी। सिंह ने कहा कि देश को यह समझने की आवश्यकता है कि दशकों से चुनाव हाररहे राजनीतिक दल जाने-अनजाने में इन शक्तियों के हाथों में खेल रहे हैं। ‘रिजीमचेंज’, ‘रेजिस्टेंस’ और ‘संसद नहीं, सड़क से ही रास्ता निकलता है’ जैसे शब्दों सेआज यह स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली में जो कुछ भी हो रहा है, वह संवैधानिक व्यवस्थाके जरिए नहीं, बल्कि अराजकता के माध्यम से भारत की विकास यात्रा को पटरी से उतारनेका एक निंदनीय प्रयास है। इसी उत्तर प्रदेश के चौरी-चौरा में अंग्रेजों के शासनकालमें हिंसा की घटना होने मात्र से महात्मा गांधी ने पूरा असहयोग आंदोलन रोक दियाथा। आज कांग्रेस, जो स्वयं को गांधी जी का उत्तराधिकारी होने का दावा करती है,अराजकता और रिजीम चेंज जैसी बातें करके अपनी राजनीतिक पराजय का बदला देश से लेनाचाहती है। यह कांग्रेस के नैतिक मूल्यों के पतन की पराकाष्ठा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि आज कांग्रेस जिस हिंसा और अराजकता की आग मेंदेश को झोंकना चाहती है और बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करने का स्वप्न देख रहीहै, उसे देखते हुए हम कह सकते हैं कि कांग्रेस ने गांधी नाम का प्रयोग करने कानैतिक अधिकार पूरी तरह खो दिया है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 37 वर्षों से सत्तासे बाहर है। क्या यह वोट चोरी की वजह से है या काम चोरी की वजह से? देश की जनता इसबात को अच्छी तरह समझती है। हम राहुल गांधी से पूछना चाहते हैं कि क्या वेसमाजवादी पार्टी के बिना रायबरेली की अपनी सीट भी जीतने का सामर्थ्य रखते हैं यानहीं? कांग्रेस का यह दावा कि जनता को उसकी बात पर भरोसा है, कितना खोखला है, इसका प्रमाण उत्तर प्रदेश ही दे रहा है। जब कांग्रेस की प्रदेश इकाई के नेताओं को हीएक-दूसरे पर भरोसा नहीं है और वे एक-दूसरे का विरोध करते हुए न केवल मौखिक, बल्किशारीरिक स्तर पर भी भिड़ते दिखाई दिए। हम कांग्रेस के नेतृत्व से पूछना चाहते हैंकि क्या इसके लिए भाजपा जिम्मेदार है? जो कांग्रेस देश में अराजकता उत्पन्न करनाचाहती है, उसे पहले उत्तर प्रदेश में अपनी ही पार्टी के भीतर व्याप्त अराजकता परध्यान देना चाहिए।
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