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फरीदाबाद

ग्रीन फील्ड के 1000 प्लॉटों की रजिस्ट्री यूआईसी में पेंडिंग क्यों है, चेयरमैन इस मामले में खामोश क्यों है, लोगों के जेहन में उठ रहे सवाल।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद: ग्रीन फील्ड कॉलोनी में कुछ महीने पूर्व में बने नए बोर्ड ने अर्बन इम्प्रूव्मेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की लगभग पूरे सिस्टम को ठप कर दिया,जबकि नए बोर्ड से ग्रीन फील्ड कॉलोनी के हजारों निवासियों की बहुत ज्यादा उम्मीदे थी। लगता है कि बोर्ड में कोई एक ऐसा गलत शख्स है,जिसने ही अर्बन इम्प्रुवमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के चेयरमैन संजय सूद को पूरी तरह से हाईजैक कर लिया है। क्यूंकि चेयरमैन संजय सूद कुछ अच्छा करना नहीं चाहते, या कोई उन्हें काम करने देना नहीं चाहता है। ये सवाल ग्रीन फील्ड कॉलोनी के लोगों में खूब चला रहा है। यूआईसी पर लगभग 2 करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है, जो लोग कॉन्टेक्ट पर अपनी-अपनी सेवाएं एवं सर्विस दे रहे है, उन्हें बीते 3-4 महीनों से कोई बिल व तनखाह नहीं दिया गया है। भुगतान का आगे – पीछे का खेल चल रहा है।

क्यूंकि कंपनी के पास पैसों की भारी कमी है। कंपनी कोई काम करेगी तभी तो पैसे आएंगे, ऐसा कुछ करना नहीं चाहती है। बीते लगभग 3 सालों से प्लॉटों की रजिस्ट्री बंद है, तक़रीबन 1000 प्लॉटों की रजिस्ट्री यूआईसी के पास पेंडिंग पड़ा है। प्लॉट धारक बहुत ज्यादा ही परेशान है, उनकी सुनने वाला कोई नहीं, जो लोग दमदार थे, इस मामले में उनकी दम निकल चुकी है। अब वह भी किसी लायक नहीं रहे। प्लॉट धारकों का भी सब्र धीरे-धीरे जवाब दे रहा है। पहले से ही ग्रीन फील्ड की कीमती जमीनों पर भू -माफिया हावी है, और ग्रीन फील्ड कॉलोनी के निवासियों की सुरक्षा की आड़ में अवैध वसूली कर रहा है। इनके साथ जो लोग जुड़े है, उनको अंदर खाने धोखा दिया जा रहा है। ऐसे में ये लोग भी मुश्किल फंस सकते है। उस दिन उन्हें बचाने वाला उनके खुद के परिवार वालों के अलावा कोई नहीं आगे आएगा।
खबर के अनुसार ग्रीन फील्ड कॉलोनी, फरीदाबाद में प्लॉटों की रजिस्ट्री लगभग 3 सालों से बंद है, अब प्लॉटों के ट्रांसफर भी बंद कर दिए गए है।यूआईसी की इन्ही हरकतों की वजह से 1000 प्लॉटों की रजिस्ट्री कंपनी के पास पेंडिंग पड़ी है। इससे और अधिक लोग इंतजार में है कि रजिस्ट्री खुलेगी, तभी अपने -अपने प्लॉटों की रजिस्ट्री करवा लेंगें। ग्रीन फील्ड कॉलोनी में विकास का पहिया बिल्कुल थम सी गई है,और विनाश की ओर चल पड़ी है। थोड़ा बहुत विकास जो हुआ वह केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुजर के आशीर्वाद से हुआ है, जिसकी वजह से ग्रीन फील्ड कॉलोनी सांसे ले रही है। जो लोग कॉलोनी में पानी मुहैया कराने का दावा करते है, वह लोग खुद पानी का बिल नहीं भरते, कंपनी का बेडा गरक करने में ऐसे लोगों का भी बहुत बड़ा हाथ है। यूआईसी पर जो 2 करोड़ रुपए बकाया है, इनमें वकीलों की फीस, पानी के टेंकरों के मालिकों,लेवर,स्टाफ के वेतन, कॉन्ट्रेक्ट पर जो लोग काम रहे है, शामिल है।यूआईसी में तक़रीबन 48 से 50 कोर्ट केस है। इनके भी अलग से खर्चे है। यूआईसी के बोर्ड में बैठे लोग, खुद आमदनी का रास्ता बंद किया हुआ है। ऐसे में आम लोग  क्या कर सकते है। लोग पैसे देकर प्लॉटों की रजिस्ट्री करवाने को तैयार है, और पैसे देने को तैयार है, ऐसे में चेयरमैन संजय सूद खामोश क्यों है। वह चाहे तो यूआईसी और प्लॉट धारकों की समस्याए ख़त्म हो सकती है। सुना है कि वह किसी से मिलते नहीं है,ऐसे में ग्रीन फील्ड कॉलोनी के निवासियों की समस्याओं का समाधान कैसे होगा, नए बोर्ड के आने से ग्रीन फील्ड कॉलोनी , फरीदाबाद के निवासियों की समस्याएं और ज्यादा बढ़ गई है।सुना है कि चैयरमेन संजय सूद अपना और अपने साथी एक निदेशक की तनखाह 5.50-5.50 लाख रुपए करने के प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट में दी है,या जल्द ही दीजाएगी। जब कंपनी में आमदनी का रास्ता खुद ही बंद किया हुआ तो ऐसे में भारी भरकम तनखाह कैसे ले सकतें है। इसके लिए कहां से आएगा पैसा। आए हो ग्रीन फील्ड कॉलोनी, फरीदाबाद में विकास कराने के लिए, और खुद का विकास करने लग गए। ऐसी चर्चा ग्रीन फील्ड कॉलोनी के निवासियों में है।         

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