अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने असम के नौगांव लोकसभा उपचुनाव में प्रचार के दौरान छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं के काफिले पर जानलेवा हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भाजपा हार के डर से विपक्षी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को डराने-धमकाने की सुनियोजित कोशिश कर रही है। पार्टी ने विपक्षी नेताओं के साथ लगातार देशभर में हो रही ऐसी हिंसक घटनाओं को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।

बता दें कि सोमवार को नौगांव के समागुरी क्षेत्र में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर नकाबपोश हमलावरों ने जानलेवा हमला किया था। इन हमलावरों ने पहले काले झंडे दिखाए, फिर पथराव किया और हॉकी स्टिक, क्रिकेट बैट तथा लोहे की छड़ों से हमला किया। काफिले में पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल, गौरव गोगोई, धुबरी सांसद रकीबुल हुसैन, विधानसभा में विपक्ष के नेता वाजिद अली चौधरी, पार्टी के राष्ट्रीय सचिव मनोज चौहान,महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मीरा बोरठाकुर, प्रत्याशी सिबामोनी मोरा और कई विधायक शामिल थे। कुछ कांग्रेस नेताओं की गाड़ियों पर एसिड भी फेंका गया था। इस दौरान पत्रकारों पर भी हमला किया गया, ताकि घटना की रिपोर्टिंग न हो। हमले के विरोध में पत्रकारों को दो घंटे तक सड़क पर धरना देना पड़ा। पार्टी नेता मनोज चौहान की पसलियों में चोट आई और उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। इस हमले को लेकर कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के जम्मू-कश्मीर के प्रभारी महासचिव एवं राज्यसभा सांसद डॉ. नासीर हुसैन ने चुनाव आयोग से मांग की कि संबंधित डीसी और एसपी से रिपोर्ट तलब की जाए। जिम्मेदार अधिकारियों का तबादला और निलंबन हो। मामले की स्वतंत्र जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कांग्रेस ने साथ ही एफआईआर और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा चुनाव तक प्रत्याशियों, विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
डॉ. नासीर हुसैन ने कहा कि जब भाजपा को चुनाव में हार का डर सताता है, तब वह हिंसा का सहारा लेती है। उन्होंने इस तरह की घटनाओं को वोट चोरी का एक रूप बताते हुए चुनाव आयोग पर भाजपा के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया।कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि घटना से एक दिन पहले इसी तरह की धमकियों के मद्देनजर हमले की आशंका को लेकर पार्टी नेताओं ने पुलिस और चुनाव आयोग को शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। डॉ. नासीर हुसैन ने जोर देकर कहा कि यह केवल कांग्रेस नेताओं पर हमला नहीं, बल्कि मतदाताओं को भी डराने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि ऐसा पहले भी हुआ है और यह विपक्ष के नेतृत्व पर हमला करने का एक पैटर्न है। ऐसी घटनाओं के बाद डर से लोग वोट डालने बाहर नहीं निकलते और वोटिंग प्रतिशत गिरता है, जिसका सीधा फायदा सत्ता पक्ष को मिलता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित कर रहा है और पूछा कि कांग्रेस पार्टी द्वारा पहले से हमले की आशंका जताने के बावजूद भीड़ को नियंत्रित क्यों नहीं किया गया? मौके पर मौजूद केंद्रीय एजेंसियां हमलावरों को रोकने की बजाए पत्रकारों पर हमला क्यों कर रही थीं? चुनाव आयोग ने मामले में अब तक किसी के ऊपर कार्रवाई की है या नहीं? विपक्षी नेताओं को छोटी सी बात पर भी नोटिस भेज दिया जाता है, लेकिन दंगाइयों के खिलाफ चुनाव आयोग कोई कार्रवाई क्यों नहीं करता? कांग्रेस महासचिव ने विपक्षी नेताओं पर हुए पिछले हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि देशभर में ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जनवरी 2024 में ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान असम में राहुल गांधी और जयराम रमेश के वाहनों पर हमला हुआ था। 13 नवंबर 2024 को समागुरी उपचुनाव और 20 फरवरी 2025 को रुपाहीहाट में रकीबुल हुसैन के काफिले पर हमला हुआ था। 30 मार्च 2026 को नादुआर में कांग्रेस प्रत्याशी सुनील कुमार छेत्री पर हमला हुआ था, जिसमें वे घायल भी हुए थे। डॉ. हुसैन ने कहा कि सिर्फ असम ही नहीं, उत्तर प्रदेश में भी 18 सितंबर 2026 को सांसद लक्ष्मीकांत निषाद और पश्चिम बंगाल में महुआ मोइत्रा पर हमला हुआ। त्रिपुरा में साल दर साल कांग्रेस नेताओं पर हमले हुए हैं। हाल ही में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी को नामांकन वापस लेना पड़ा और कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को पुराने केस में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने नकाबपोश हमलावरों के जेएनयू, शाहीन बाग और उत्तर-पूर्वी दिल्ली की घटनाओं में शामिल होने का उल्लेख भी किया।
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