
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि विफल शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्रों ने कुछ भी गलत नहीं किया है और उन्हें किसी से माफी मांगने की जरूरत नहीं है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह में न संसद का सामना करने का साहस है, न मीडिया का। वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की बर्बर कार्रवाई से पीड़ित छात्रों समेत विभिन्न राज्यों के युवा प्रदर्शनकारियों के साथ बुधवार को पत्रकार वार्ता कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने छात्रों से 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर बातचीत की और उनकी आपबीती सुनी। राहुल गांधी के साथ मीडिया से बातचीत करने वालों में रिया अहीर, मुस्कान शर्मा, नूतन टोप्पो, फरहा नाज़ और भरत सहित कई युवा शामिल थे। उन्होंने पुलिस कार्रवाई और सोशल मीडिया पर हो रहे उत्पीड़न के बारे में जानकारी दी। नूतन टोप्पो ने पैलेट गन के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया।इस दौरान राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों ने कोई हिंसा नहीं की, फिर भी उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा है, उनके घरों पर असामाजिक तत्व भेजे जा रहे हैं और उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने 15 वर्षीय बच्ची के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि लड़कियों के घरों पर गुंडे भेजकर दबाव बनाया जा रहा है और उनसे माफी मंगवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों ने कुछ भी गलत नहीं किया है और उन्हें किसी से माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है।वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि विफल हो चुकी शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है। सरकार को छात्रों को प्रताड़ित करने के बजाय इस व्यवस्था में सुधार करने और कमियों को ठीक करने की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश का युवा और विपक्ष एक बेहतर, निष्पक्ष एवं पारदर्शी शिक्षा प्रणाली चाहता है। देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित होना चाहिए और पेपर लीक बंद होने चाहिए। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने प्रदर्शनकारी युवाओं के साहस की सराहना करते हुए उन पर गर्व जताया और कहा कि युवाओं ने संविधान, भारत के विचार और देश के भविष्य की रक्षा की है। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों पर हुई हिंसा के लिए गृह मंत्री अमित शाह जिम्मेदार हैं, लेकिन उनकी संसद में आने और छात्रों पर हुई बर्बर कार्रवाई पर बोलने की हिम्मत नहीं है। उन्होंने दोहराया कि यदि गृह मंत्री को छात्रों पर हुई हिंसा की जानकारी नहीं थी, तो यह उनकी गंभीर अक्षमता को दर्शाता है; यदि उन्होंने खुद छात्रों पर बल प्रयोग का आदेश दिया था, तो वे सीधे तौर पर इसके दोषी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों ही सूरतों में गृह मंत्री कसूरवार हैं।
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