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चंडीगढ़ हरियाणा हाइलाइट्स

विकसित कृषि और समृद्ध किसान के बिना विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता : शिवराज सिंह चौहान


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
चंडीगढ़: देशभर में किसानों को टिकाऊ एवं लाभकारी खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा चलाए गए ‘खेत बचाओ अभियान’ का मंगलवार को हरियाणा के रेवाड़ी में भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। समारोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  शिवराज सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने की। इस अवसर पर हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में  चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति प्रोफेसर बलदेव राज कंबोज ने सभी अतिथियों का समारोह में पहुंचने पर स्वागत किया और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। रेवाड़ी जिला के बावल स्थित कृषि महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संयुक्त रूप से कृषि के नवीनतम नवाचारों पर आधारित कृषि औद्योगिक प्रदर्शनी तथा हरियाणा एफ.पी.ओ. मिशन-2026 का शुभारंभ भी किया। कार्यक्रम में मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए जनभागीदारी आधारित प्रयासों को और अधिक गति देने का संकल्प दोहराया गया। 
 केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है, लेकिन विकसित भारत का निर्माण उन्नत कृषि और समृद्ध किसान के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान हैं और किसानों की समृद्धि ही भारत की समृद्धि का आधार है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कृषि को लाभकारी, आधुनिक और टिकाऊ बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक खेती, आधुनिक तकनीकों और किसानों की सक्रिय भागीदारी से भारत विश्व की अग्रणी कृषि शक्ति के रूप में और अधिक मजबूत होगा। शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को बधाई देते हुए कहा कि हरियाणा ने कृषि क्षेत्र में पूरे देश के सामने एक प्रेरणादायी मॉडल प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश 24 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) उपलब्ध कराने वाला अग्रणी राज्य है। इसके साथ ही भावांतर भरपाई योजना, ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’, ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ जैसी योजनाओं ने किसानों की आय बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि देश के अनेक राज्यों को हरियाणा की इन पहलों से सीख लेने की आवश्यकता है। कृषि मंत्री ने कहा  कि हरियाणा केवल देश के अन्न भंडार को भरने वाला अग्रणी राज्य ही नहीं, बल्कि कृषि क्रांति का मजबूत केंद्र भी है। कभी भारत को विदेशों से खाद्यान्न आयात करना पड़ता था, लेकिन आज हरियाणा जैसे राज्यों के किसानों की मेहनत के कारण देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के किसान देश के 140 करोड़ नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यही नहीं, प्रदेश के युवा सीमाओं पर देश की रक्षा करने और खेलों में भारत का गौरव बढ़ाने में भी अग्रणी हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा वास्तव में खेती, सैनिक परंपरा और खेल प्रतिभा—तीनों क्षेत्रों में पूरे देश के लिए प्रेरणा का केंद्र है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने किसानों से आह्वान किया कि वे आवश्यकता के अनुसार ही संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी की उर्वरता लगातार प्रभावित हो रही है, पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ रहा है और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने किसानों से मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने, प्राकृतिक खेती और आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि धरती हमारी माता है और इसकी उर्वरता को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ आज समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि अब यह जन-जन का अभियान बनकर खेतों तक पहुंचेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि तथा समृद्ध कृषि की नींव मजबूत करेगा। समारोह को संबोधित करते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि भौगोलिक दृष्टि से देश के कुल क्षेत्रफल का मात्र 1.3 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद हरियाणा कृषि क्षेत्र में अपनी अद्वितीय पहचान बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश के केंद्रीय खाद्यान्न भंडार में दूसरा सबसे बड़ा योगदान देने वाला राज्य है, जो प्रदेश के किसानों की मेहनत, समर्पण और कृषि के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा देश की खाद्य सुरक्षा की मजबूत आधारशिला है। प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि हरियाणा भविष्य में भी देश की अन्न शक्ति के रूप में अपनी अग्रणी भूमिका निभाता रहे। 
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश में आज से ‘हरियाणा एफ.पी.ओ. मिशन-2026′ का शुभारंभ किया जा रहा है, जो छोटे एवं सीमांत किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हरियाणा में कृषि, बागवानी और डेयरी क्षेत्रों से जुड़े लगभग 775 किसान उत्पादक संगठन (एफ.पी.ओ.) सक्रिय हैं। नए मिशन के माध्यम से इन संगठनों को और अधिक मजबूत बनाते हुए कृषि आधारित सामूहिक उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा। आधुनिक आपूर्ति श्रृंखला , मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण एवं बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराकर किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाया जाएगा। इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी , ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा हरियाणा की कृषि मूल्य श्रृंखला को नई मजबूती मिलेगी।  मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की अनिश्चितता भी बढ़ रही है। ऐसे में हरियाणा सरकार ने कृषि विकास का नया मंत्र दिया है।’उत्पादन भी बढ़े और प्राकृतिक संसाधन भी बचें।’ उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि ऐसी कृषि पद्धतियां अपनाई जाएं, जो वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ धरती और पर्याप्त जल संसाधन भी सुरक्षित रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, फसल विविधिकरण और जलवायु अनुकूल कृषि को अपनी कृषि नीति का मूल आधार बनाया है। रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग पर रोक लगाने के लिए ‘हर खेत स्वस्थ खेत’ और ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ जैसी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे मिट्टी की जांच करवाकर वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करें। 
 

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